अल-फुरकान · 55/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُهُمْ وَلَا يَضُرُّهُمْ ۗ وَكَانَ الْكَافِرُ عَلَىٰ رَبِّهِ ظَهِيرًا ۝٥٥
Wa ya`budoona min doonil laahi maa laa yanfa`uhum wa laa yadurruhum; wa kaanal kaafiru `alaa Rabbihee zaheeraa
📖 हिंदी अर्थ
और लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) ख़ुदा को छोड़कर उस चीज़ की परसतिश करते हैं जो न उन्हें नफा ही दे सकती है और न नुक़सान ही पहुँचा सकती है और काफिर (अबूजहल) तो हर वक्त अपने परवरदिगार की मुख़ालेफत पर ज़ोर लगाए हुए है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظَهِيرًا: मददगार, सहायक, साथ देने वाला। यहाँ इसका अर्थ है कि काफिर शैतान का सहायक बन जाता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इन सब दलीलों के बावजूद जो अल्लाह तआला की क़ुदरत (शक्ति) और उसकी नेमतों (अनुग्रहों) को साबित करती हैं, काफिर लोग अल्लाह को छोड़कर ऐसी चीज़ों की इबादत करते हैं जो न उन्हें कोई फायदा पहुँचा सकती हैं और न ही कोई नुकसान। वे ऐसे माबूदों (पूज्यों) के आगे सिर झुकाते हैं जिनमें न तो भलाई पहुँचाने की ताक़त है और न बुराई दूर करने की। अगर वे इनकी इबादत करें तो इनसे कोई लाभ नहीं मिलता, और अगर छोड़ दें तो कोई हानि नहीं होती। यह उनकी नासमझी और गुमराही की सबसे बड़ी निशानी है।

इसके बाद अल्लाह तआला फ़रमाता है कि काफिर अपने रब के मुक़ाबले में शैतान का मददगार बन जाता है। यानी वह शैतान का साथी और सहायक बनकर अल्लाह की नाफ़रमानी (अवज्ञा) में उसकी मदद करता है। शिर्क (बहुदेववाद) करके वह शैतान के काम को आगे बढ़ाता है और उसके नक्शे-क़दम पर चलता है। यह बहुत बड़ी बदक़िस्मती है कि इंसान अपने पालनहार के खिलाफ़ उसके दुश्मन का साथ दे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किसे अपना सहारा बनाते हैं। क्या हम उस अल्लाह पर भरोसा करते हैं जो सब कुछ कर सकता है, या फिर उन चीज़ों पर निर्भर रहते हैं जो न फायदा पहुँचा सकती हैं और न नुकसान? अल्लाह तआला ने हमें अक्ल दी है ताकि हम सही और गलत में फर्क कर सकें। वह हमें बुला रहा है कि हम सिर्फ उसी की इबादत करें, क्योंकि वही है जो सुनता है, देखता है, और हर मुश्किल में हमारी मदद कर सकता है। जो लोग उसे छोड़कर दूसरों के आगे झुकते हैं, वे न सिर्फ खुद को नुकसान पहुँचाते हैं बल्कि शैतान के साथी बनकर अपनी आख़िरत (परलोक) भी बर्बाद कर लेते हैं। आओ, हम अपने रब की तरफ लौटें और उसी के बताए रास्ते पर चलें, क्योंकि कामयाबी और खुशी सिर्फ उसी की इबादत में है।

🎧 सुनें

📜 आयत 53-57 — अल-फुरकान

53۞ وَهُوَ الَّذِي مَرَجَ الْبَحْرَيْنِ هَٰذَا عَذْبٌ فُرَاتٌ وَهَٰذَا مِلْحٌ أُجَاجٌ وَجَعَلَ بَيْنَهُمَا بَرْزَخًا وَحِجْرًا مَّحْجُورًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने दरयाओं को आपस में मिला दिया (और बावजूद कि) ये खालिस मज़ेदार मीठा है और ये बिल्कुल खारी कड़वा (मगर दोनों को मिलाया) और दोनों के दरमियान एक आड़ और मज़बूत ओट बना दी है (कि गड़बड़ न हो)
54وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ مِنَ الْمَاءِ بَشَرًا فَجَعَلَهُ نَسَبًا وَصِهْرًا ۗ وَكَانَ رَبُّكَ قَدِيرًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने पानी (मनी) से आदमी को पैदा किया फिर उसको ख़ानदान और सुसराल वाला बनाया और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार हर चीज़ पर क़ादिर है
55وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُهُمْ وَلَا يَضُرُّهُمْ ۗ وَكَانَ الْكَافِرُ عَلَىٰ رَبِّهِ ظَهِيرًا
और लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) ख़ुदा को छोड़कर उस चीज़ की परसतिश करते हैं जो न उन्हें नफा ही दे सकती है और न नुक़सान ही पहुँचा सकती है और काफिर (अबूजहल) तो हर वक्त अपने परवरदिगार की मुख़ालेफत पर ज़ोर लगाए हुए है
56وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا مُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
और (ऐ रसूल) हमने तो तुमको बस (नेकी को जन्नत की) खुशख़बरी देने वाला और (बुरों को अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है
57قُلْ مَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ إِلَّا مَن شَاءَ أَن يَتَّخِذَ إِلَىٰ رَبِّهِ سَبِيلًا
और उन लोगों से तुम कह दो कि मै इस (तबलीगे रिसालत) पर तुमसे कुछ मज़दूरी तो माँगता नहीं हूँ मगर तमन्ना ये है कि जो चाहे अपने परवरदिगार तक पहुँचने की राह पकडे
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीRevelation
55आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 55

सूरा अल-फुरकान आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) ख़ुदा को छोड़कर उस चीज़ की…

सूरा आयत 55/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए