अल-फुरकान · 76/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
خَالِدِينَ فِيهَا ۚ حَسُنَتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا ۝٧٦
Khaalideena feehaa; hasunat mustaqarranw wa muqaamaa
📖 हिंदी अर्थ
ये लोग उसी में हमेशा रहेंगें और वह रहने और ठहरने की अच्छी जगह है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले, कभी न मरने वाले।
  • مُسْتَقَرًّا: ठहरने की जगह, आराम की जगह।
  • مُقَامًا: रहने की जगह, क़ियाम की जगह।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन नेक बंदों के बारे में है जिन्हें अल्लाह तआला ने "इबादुर्रहमान" (रहमान के बंदे) कहा है। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इबादत की, उसके हुक्मों का पालन किया, और उसकी राह में सब्र किया। अल्लाह तआला उन्हें जन्नत के सबसे ऊँचे दर्जे अता करेगा, और वे उसमें हमेशा रहेंगे—कभी मौत नहीं आएगी, कभी दर्द नहीं होगा, और कभी वहाँ से निकाला नहीं जाएगा।

वे जन्नत के उस मुकाम पर होंगे जो निहायत ही खूबसूरत, पुरसुकून और आरामदायक है। वहाँ वे चैन से बैठेंगे, आराम करेंगे, और हमेशा के लिए उसी में रहेंगे। यह जगह इतनी अच्छी है कि उससे बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती। वे वहाँ हर तरह की नेमतों से लुत्फ़ उठाएँगे, और उन्हें कभी कोई कमी या बुराई नहीं दिखेगी।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को कितनी बड़ी इज़्ज़त और इनाम देता है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की राह पर चलते हैं, सब्र करते हैं, और अच्छे काम करते हैं, उनके लिए आख़िरत में ऐसी जगह तैयार है जो हमारी कल्पना से भी परे है। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है कि अगर हम अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें, तो हमें भी यही इनाम मिल सकता है।

तो प्यारे भाइयों और बहनों! आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों के मुताबिक बनाएँ, और उस जन्नत के हक़दार बनें जो हमेशा रहने वाली है, जहाँ न दुख है, न थकान, और न ही कोई कमी। यही हमारी सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 74-77 — सूरा अल-फुरकान

74وَالَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
और वह लोग जो (हमसे) अर्ज़ करते हैं कि परवरदिगार हमें हमारी बीबियों और औलादों की तरफ से ऑंखों की ठन्डक अता फरमा और हमको परहेज़गारों का पेशवा बना
75أُولَٰئِكَ يُجْزَوْنَ الْغُرْفَةَ بِمَا صَبَرُوا وَيُلَقَّوْنَ فِيهَا تَحِيَّةً وَسَلَامًا
ये वह लोग हैं जिन्हें उनकी जज़ा में (बेहश्त के) बाला ख़ाने अता किए जाएँगें और वहाँ उन्हें ताज़ीम व सलाम (का बदला) पेश किया जाएगा
76خَالِدِينَ فِيهَا ۚ حَسُنَتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا
ये लोग उसी में हमेशा रहेंगें और वह रहने और ठहरने की अच्छी जगह है
77قُلْ مَا يَعْبَأُ بِكُمْ رَبِّي لَوْلَا دُعَاؤُكُمْ ۖ فَقَدْ كَذَّبْتُمْ فَسَوْفَ يَكُونُ لِزَامًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर दुआ नही किया करते तो मेरा परवरदिगार भी तुम्हारी कुछ परवाह नही करता तुमने तो (उसके रसूल को) झुठलाया तो अन क़रीब ही (उसका वबाल) तुम्हारे सर पडेग़ा
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
76आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 76

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Thursday, October 1, 2026

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