अल-फुरकान · 75/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
أُولَٰئِكَ يُجْزَوْنَ الْغُرْفَةَ بِمَا صَبَرُوا وَيُلَقَّوْنَ فِيهَا تَحِيَّةً وَسَلَامًا ۝٧٥
Ulaaa`ika yujzawnal ghurfata bimaa sabaroo wa yulaqqawna feehaa tahiyyatanw wa salaamaa
📖 हिंदी अर्थ
ये वह लोग हैं जिन्हें उनकी जज़ा में (बेहश्त के) बाला ख़ाने अता किए जाएँगें और वहाँ उन्हें ताज़ीम व सलाम (का बदला) पेश किया जाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْغُرْفَةَ (अल-ग़ुर्फ़ा): ऊँचा महल या ऊँचा स्थान, यहाँ अर्थ है जन्नत के सबसे ऊँचे और उत्तम दर्जे।
  • يُلَقَّوْنَ (युलक़्क़ौन): उनका स्वागत किया जाता है, उन्हें प्राप्त होता है।
  • تَحِيَّةً (तहिय्यतन): सम्मान और आदर के साथ दुआएँ, यानी स्थायी जीवन की बधाई।
  • سَلَامًا (सलामन): हर आफत और बुराई से सुरक्षा और शांति।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन खुशनसीब लोगों का ज़िक्र कर रही है जिन्हें अल्लाह तआला ने अपने ख़ास बंदों (इबादुर-रहमान) की सिफ़ात से नवाज़ा है। ये वो लोग हैं जिन्होंने दुनिया में सब्र किया—सब्र इबादत पर, सब्र गुनाहों से बचने पर, और सब्र मुश्किलों और तकलीफों पर। उन्हीं के लिए अल्लाह ने जन्नत की सबसे ऊँची मंज़िलें तैयार की हैं।

जब ये लोग जन्नत में दाखिल होंगे, तो उन्हें वो मक़ाम (स्थान) अता किया जाएगा जो हर ऊँचे महल से बुलंद है—यानी फ़िरदौस का आला दर्जा। यह सब कुछ उनके सब्र की बदौलत होगा, क्योंकि उन्होंने दुनिया की चंद रोज़ की ख्वाहिशों और आराम को अल्लाह की रज़ा पर क़ुर्बान कर दिया। उन्होंने मुश्किलों में भी अल्लाह का हुक्म माना, और जब लोग उन्हें सताते थे या उनका मज़ाक उड़ाते थे, तब भी उन्होंने सब्र किया और अल्लाह की राह पर जमे रहे।

जब वे जन्नत के उन ऊँचे महलों में पहुँचेंगे, तो फ़रिश्ते उनका स्वागत करेंगे। उन्हें "तहिय्यत" दी जाएगी—यानी हमेशा रहने की खुशखबरी और सम्मान की दुआएँ। साथ ही उन्हें "सलाम" दिया जाएगा—यानी हर तरह की बुराई, बीमारी, ग़म, थकान और मौत से पूरी सुरक्षा। वहाँ वे हमेशा रहेंगे, कभी नहीं मरेंगे, और न ही उन्हें कभी वहाँ से जाने की इच्छा होगी। वह ठिकाना कितना प्यारा है, और वह क़यामगाह कितनी उत्तम है!


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें बताती है कि दुनिया में सब्र करने वालों का अंजाम कितना प्यारा है। अगर आज हम किसी मुश्किल, बीमारी, या परेशानी में हैं, या किसी गुनाह से दूर रहने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, तो यह सब्र अल्लाह के यहाँ ज़ाइया नहीं जाएगा। अल्लाह उन लोगों को सबसे ऊँचा मक़ाम देगा जो उसकी राह में सब्र करते हैं। यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है—हर मुश्किल के बदले में हमें जन्नत का ऊँचा महल मिलेगा, जहाँ फ़रिश्ते हमारा स्वागत करेंगे और हमें हमेशा की शांति और सलामती मिलेगी। तो आओ, हम भी अल्लाह की राह में सब्र करें, उसकी इबादत पर जमे रहें, और उससे इस ऊँचे दर्जे की दुआ करें।



📜 आयत 73-77 — सूरा अल-फुरकान

73وَالَّذِينَ إِذَا ذُكِّرُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ لَمْ يَخِرُّوا عَلَيْهَا صُمًّا وَعُمْيَانًا
और वह लोग कि जब उन्हें उनके परवरदिगार की आयतें याद दिलाई जाती हैं तो बहरे अन्धें होकर गिर नहीं पड़ते बल्कि जी लगाकर सुनते हैं
74وَالَّذِينَ يَقُولُونَ رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
और वह लोग जो (हमसे) अर्ज़ करते हैं कि परवरदिगार हमें हमारी बीबियों और औलादों की तरफ से ऑंखों की ठन्डक अता फरमा और हमको परहेज़गारों का पेशवा बना
75أُولَٰئِكَ يُجْزَوْنَ الْغُرْفَةَ بِمَا صَبَرُوا وَيُلَقَّوْنَ فِيهَا تَحِيَّةً وَسَلَامًا
ये वह लोग हैं जिन्हें उनकी जज़ा में (बेहश्त के) बाला ख़ाने अता किए जाएँगें और वहाँ उन्हें ताज़ीम व सलाम (का बदला) पेश किया जाएगा
76خَالِدِينَ فِيهَا ۚ حَسُنَتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا
ये लोग उसी में हमेशा रहेंगें और वह रहने और ठहरने की अच्छी जगह है
77قُلْ مَا يَعْبَأُ بِكُمْ رَبِّي لَوْلَا دُعَاؤُكُمْ ۖ فَقَدْ كَذَّبْتُمْ فَسَوْفَ يَكُونُ لِزَامًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर दुआ नही किया करते तो मेरा परवरदिगार भी तुम्हारी कुछ परवाह नही करता तुमने तो (उसके रसूल को) झुठलाया तो अन क़रीब ही (उसका वबाल) तुम्हारे सर पडेग़ा
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75आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 75

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Tuesday, September 29, 2026

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