अल-फुरकान · 77/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
قُلْ مَا يَعْبَأُ بِكُمْ رَبِّي لَوْلَا دُعَاؤُكُمْ ۖ فَقَدْ كَذَّبْتُمْ فَسَوْفَ يَكُونُ لِزَامًا ۝٧٧
Qul maa ya`ba`u bikum Rabbee law laa du`aaa`ukum faqad kazzabtum fasawfa yakoonu lizaamaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर दुआ नही किया करते तो मेरा परवरदिगार भी तुम्हारी कुछ परवाह नही करता तुमने तो (उसके रसूल को) झुठलाया तो अन क़रीब ही (उसका वबाल) तुम्हारे सर पडेग़ा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا يَعْبَأُ بِكُمْ – तुम्हारी कोई परवाह नहीं करता
  • لَوْلَا دُعَاؤُكُمْ – अगर तुम्हारी दुआ (पुकार) न होती
  • لِزَامًا – लाज़िमी, चिपकने वाला, जो छूटे नहीं

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप काफ़िरों से कह दीजिए कि मेरा रब तुम्हारी कोई परवाह नहीं करता, न ही उसे तुमसे कोई लेना-देना है, अगर तुम उसे पुकारते न हो। यानी अल्लाह तआला को तुम्हारी ज़रूरत नहीं, बल्कि तुम्हें उसकी ज़रूरत है। उसकी इबादत और दुआ ही तुम्हारी असली पहचान है, क्योंकि दुआ ही इबादत है। अगर तुम उसे न पुकारो, उसकी इबादत न करो, तो तुम्हारी कोई अहमियत नहीं, तुम्हारा कोई वज़न नहीं।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: “तुमने तो झुठला दिया” यानी तुमने मेरे रसूल को, मेरी किताब को और मेरे दीन को झुठला दिया। तुमने दुआ और इबादत से मुँह मोड़ लिया, और हक़ को नकार दिया। इसलिए अब तुम्हारा अंजाम यह होगा कि तुम पर अज़ाब लाज़िम हो जाएगा, ऐसा अज़ाब जो तुम्हें हर तरफ से घेर लेगा, जो तुम्हारे साथ चिपक जाएगा और कभी अलग न होगा। यह अज़ाब दुनिया में भी होगा और आख़िरत में भी।

यह एक बहुत बड़ी चेतावनी है उन लोगों के लिए जो अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ते हैं, दुआ करना छोड़ देते हैं, और अपने रब के सामने झुकना गवारा नहीं करते। अल्लाह तआला उन्हें बता रहा है कि उसे तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं, बल्कि तुम्हीं उसके मोहताज हो। जो उससे कट गया, वह दरअसल अपनी ही भलाई से कट गया।

और ऐ इंसान! तू अपने रब से दुआ करना कभी न छोड़। दुआ तेरी कमज़ोरी का इज़हार है, और अल्लाह तआला अपने बंदों को पसंद करता है जो उसके सामने हाथ फैलाते हैं, उससे माँगते हैं, उस पर भरोसा करते हैं। दुआ ही वह रिश्ता है जो बंदे को उसके रब से जोड़ता है। जिसने दुआ छोड़ी, उसने अपने रब से रिश्ता तोड़ लिया। और जिसने दुआ पकड़ी, उसने सबसे मज़बूत रस्सी थाम ली। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, वह दुआ सुनता है, क़बूल करता है, और अपने बंदे को कभी निराश नहीं करता। तो आओ, हम सब अपने रब की तरफ रुजू करें, उससे माँगें, उसी से उम्मीद रखें, और उसी की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। यही हमारी कामयाबी है, यही हमारी नजात है।



📜 आयत 75-77 — सूरा अल-फुरकान

75أُولَٰئِكَ يُجْزَوْنَ الْغُرْفَةَ بِمَا صَبَرُوا وَيُلَقَّوْنَ فِيهَا تَحِيَّةً وَسَلَامًا
ये वह लोग हैं जिन्हें उनकी जज़ा में (बेहश्त के) बाला ख़ाने अता किए जाएँगें और वहाँ उन्हें ताज़ीम व सलाम (का बदला) पेश किया जाएगा
76خَالِدِينَ فِيهَا ۚ حَسُنَتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا
ये लोग उसी में हमेशा रहेंगें और वह रहने और ठहरने की अच्छी जगह है
77قُلْ مَا يَعْبَأُ بِكُمْ رَبِّي لَوْلَا دُعَاؤُكُمْ ۖ فَقَدْ كَذَّبْتُمْ فَسَوْفَ يَكُونُ لِزَامًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर दुआ नही किया करते तो मेरा परवरदिगार भी तुम्हारी कुछ परवाह नही करता तुमने तो (उसके रसूल को) झुठलाया तो अन क़रीब ही (उसका वबाल) तुम्हारे सर पडेग़ा
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
77आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 77

सूरा अल-फुरकान आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर दुआ नही किया…

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Thursday, October 1, 2026

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