अश-शुआरा · 141/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
كَذَّبَتْ ثَمُودُ الْمُرْسَلِينَ ۝١٤١
Kazzabat Samoodul mursaleen
📖 हिंदी अर्थ
(इसी तरह क़ौम) समूद ने पैग़म्बरों को झुठलाया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثَمُودُ (समूद): यह एक प्राचीन अरब क़बीला था जो हिज्र (वर्तमान सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिम) की घाटियों में रहता था। उन्हें अल्लाह ने अपना नबी हज़रत सालिह (अलैहिस्सलाम) भेजा था।
  • الْمُرْسَلِينَ (मुरसलीन): अर्थात अल्लाह के भेजे हुए रसूल (पैगंबर)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हमें क़ौमे समूद के हाल से आगाह कर रहे हैं। समूद एक बहुत ताक़तवर और खुशहाल क़ौम थी, जो पहाड़ों को काटकर अपने लिए शानदार घर बनाती थी। उन्हें अल्लाह ने ढेरों नेअमतें (आशीर्वाद) दी थीं, लेकिन जब उनके पास अल्लाह के नबी हज़रत सालिह (अलैहिस्सलाम) आए, तो उन्होंने उन्हें झुठला दिया।

यहाँ अल्लाह फ़रमा रहे हैं कि समूद ने "रसूलों" को झुठलाया। ज़ाहिर है कि उनके पास सिर्फ़ एक ही रसूल आए थे, लेकिन उन्होंने जब अपने नबी को झुठलाया, तो गोया उन्होंने सभी रसूलों को झुठला दिया। इसकी वजह यह है कि सभी नबी और रसूल एक ही पैग़ाम लेकर आए थे — यानी अल्लाह की इबादत करो और उसके साथ किसी को शरीक न करो। जिसने एक नबी को झुठलाया, उसने असल में उस पूरे पैग़ाम को झुठला दिया जो सभी रसूल लेकर आए थे।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक़ सिखाती है। अल्लाह के रसूलों का सिलसिला हज़रत आदम से लेकर हमारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक जारी रहा। सभी ने एक ही सच्चाई की तरफ़ बुलाया — तौहीद (अल्लाह की एकता) और उसकी इबादत। इसलिए जो कोई भी इस पैग़ाम को नकारता है, वह सभी रसूलों को नकारता है।

आज हमारे पास आख़िरी रसूल हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का पैग़ाम है — क़ुरआन और सुन्नत। जो इसे अपनाता है, उसने सभी नबियों की बात मानी, और जो इसे ठुकराता है, उसने सभी को ठुकराया। यह आयत हमें चेतावनी देती है कि क़ौमे समूद की तरह हम भी अपनी ताक़त, दौलत या हैसियत पर ग़रूर न करें, क्योंकि अल्लाह के सामने यह सब कुछ नहीं है। सच्ची कामयाबी उसी में है कि हम अल्लाह के रसूल की बात मानें और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें।

अल्लाह हमें समूद की तरह सच्चाई को झुठलाने से बचाए और हमें अपने रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 139-143 — अश-शुआरा

139فَكَذَّبُوهُ فَأَهْلَكْنَاهُمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
ग़रज़ उन लोगों ने हूद को झुठला दिया तो हमने भी उनको हलाक कर डाला बेशक इस वाक़िये में यक़ीनी एक बड़ी इबरत है आर उनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले भी न थे
140وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमें शक नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन (सब पर) ग़ालिब (और) बड़ा मेहरबान है
141كَذَّبَتْ ثَمُودُ الْمُرْسَلِينَ
(इसी तरह क़ौम) समूद ने पैग़म्बरों को झुठलाया
142إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ صَالِحٌ أَلَا تَتَّقُونَ
जब उनके भाई सालेह ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यो नहीं डरते
143إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
मैं तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ
अश-शुआराकुरान सूची
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141आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 141

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Tuesday, August 18, 2026

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