Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अख़ूहुम (उनका भाई) — यहाँ "भाई" से अभिप्राय नसब (खून का रिश्ता) वाला भाई है, क्योंकि हज़रत सालिह अलैहिस्सलाम क़ौमे-समूद ही से ताल्लुक़ रखते थे।
- सालिह — यह नबी सालिह अलैहिस्सलाम का नाम है, जो क़ौमे-समूद की तरफ भेजे गए।
- अला तत्तक़ून — क्या तुम (अल्लाह से) डरते नहीं? यानी क्या तुम अल्लाह के अज़ाब से बचने की कोशिश नहीं करते?
तफ़सीर:
यह आयत हज़रत सालिह अलैहिस्सलाम की दावत का ज़िक्र करती है, जो उन्होंने अपनी क़ौम को दी। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब उनके भाई सालिह ने उनसे कहा: "क्या तुम अल्लाह से नहीं डरते?" यानी क्या तुम उस अल्लाह का ख़ौफ़ नहीं करते जिसने तुम्हें पैदा किया, तुम्हें रिज़्क़ दिया, और तुम्हें ज़मीन पर आबाद किया? क्या तुम उसकी इबादत के बजाय बुतों की पूजा करते हुए नहीं शर्माते?
हज़रत सालिह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को तीन बड़ी बातें समझाईं:
- अल्लाह का ख़ौफ़ — कि वे उसके अज़ाब से डरें और उसकी नाफ़रमानी से बचें।
- तौहीद — कि सिर्फ अल्लाह ही की इबादत करें, किसी और को उसका शरीक न बनाएं।
- रिसालत — कि वे उनकी दावत को क़बूल करें, क्योंकि वे अल्लाह के भेजे हुए रसूल हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि दावत का पहला नुक़्ता "तक़वा" है — यानी अल्लाह का डर और उसकी नाराज़गी से बचना। जब इंसान के दिल में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा हो जाता है, तो वह अपने आप ही गुनाहों से दूर हो जाता है और नेकियों की तरफ रग़बत करता है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों! देखिए, हज़रत सालिह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को जो पहली बात कही, वह थी "अल्लाह से डरो।" यही दावत हमें भी देनी चाहिए — पहले लोगों के दिलों में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा करें, उन्हें बताएँ कि अल्लाह हमें देख रहा है, हमारे हर अमल का हिसाब होगा। जब यह ख़ौफ़ दिल में आ जाएगा, तो इंसान अपने आप ही बुराइयों से बचेगा और अच्छाइयों की तरफ बढ़ेगा।
आज के ज़माने में भी हमें चाहिए कि हम अपने घर, अपने समाज और अपने दोस्तों को अल्लाह की याद दिलाएँ, उन्हें तक़वा की तरफ बुलाएँ, और उन्हें बताएँ कि अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उससे डरते हैं और उसकी इबादत करते हैं। यही सबसे बड़ी भलाई है जो हम किसी को दे सकते हैं।
📜 आयत 140-144 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 142
सूरा अश-शुआरा आयत 142 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब उनके भाई सालेह ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा…सूरा आयत 142/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 140–144. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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