अश-शुआरा · 151/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَلَا تُطِيعُوا أَمْرَ الْمُسْرِفِينَ ۝١٥١
Wa laa tutee`ooo amral musrifeen
📖 हिंदी अर्थ
और ज्यादती करने वालों का कहा न मानों

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अम्र (आदेश) — किसी का हुक्म या बात मानना।
  • मुसरिफ़ीन (हद से गुज़रने वाले) — वे लोग जो अल्लाह की अवज्ञा में हद से आगे बढ़ गए, ज़ुल्म और फ़साद पर आमादा हों।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की क़ौम (समूद) से कह रहे हैं कि उन बड़े-बड़े सरदारों और ठेकेदारों की बात मानने से बचो, जो हद से गुज़र चुके हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की नाफ़रमानी को आदत बना लिया, ज़मीन में फ़साद फैलाया, और इबादत व सुधार के बजाय तबाही और बिगाड़ पर उतर आए। उनका हर काम इसराफ़ (हद से बढ़ना) पर आधारित है — चाहे वह अल्लाह की आयतों को झुठलाना हो, नबी का मज़ाक उड़ाना हो, या लोगों को गुमराह करना हो।

इस आयत में अल्लाह तआला हर ज़माने के मोमिनों को नसीहत दे रहे हैं कि कभी भी उन लोगों की इताअत न करें जो दीन की हदों को तोड़ते हैं, जिनकी ज़िंदगी का नारा सिर्फ़ खुदग़र्ज़ी, ज़ुल्म और फ़साद है। ऐसे लोगों का अंजाम हमेशा बर्बादी होता है, और उनके पीछे चलने वाले भी उसी बर्बादी में शामिल हो जाते हैं।

याद रखिए, अल्लाह की इताअत ही सच्ची कामयाबी है। जो लोग अपने नफ्स की ख्वाहिशों को अपना रब बना लेते हैं और दूसरों को भी उसी रास्ते पर चलने के लिए उकसाते हैं, उनसे दूर रहना ही अक्लमंदी है। क़ुरआन हमें सिखाता है कि सच्चे मोमिन की पहचान यह है कि वह सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल की सुनता है, और बातिल की तरफ़ बुलाने वालों के सामने सीना चौड़ा करके खड़ा हो जाता है।

यह आयत हमारे लिए एक रहनुमा सबक़ है कि ज़िंदगी में हर क़दम पर हमें यह फ़ैसला करना है कि किसकी बात माननी है — अल्लाह की या उन लोगों की जो उसकी नाफ़रमानी पर मुसर्र हैं। अल्लाह तआला हमें सीधे रास्ते पर चलने और मुसरिफ़ीन की इताअत से बचने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 149-153 — सूरा अश-शुआरा

149وَتَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا فَارِهِينَ
और (इस वजह से) पूरी महारत और तकलीफ के साथ पहाड़ों को काट काट कर घर बनाते हो
150فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो
151وَلَا تُطِيعُوا أَمْرَ الْمُسْرِفِينَ
और ज्यादती करने वालों का कहा न मानों
152الَّذِينَ يُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ
जो रुए ज़मीन पर फ़साद फैलाया करते हैं और (ख़राबियों की) इसलाह नहीं करते
153قَالُوا إِنَّمَا أَنتَ مِنَ الْمُسَحَّرِينَ
वह लोग बोले कि तुम पर तो बस जादू कर दिया गया है (कि ऐसी बातें करते हो)
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
151आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 151

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Wednesday, September 30, 2026

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