अश-शुआरा · 152/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
الَّذِينَ يُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ ۝١٥٢
Allazeena yufsidoona fil ardi wa laa yuslihoon
📖 हिंदी अर्थ
जो रुए ज़मीन पर फ़साद फैलाया करते हैं और (ख़राबियों की) इसलाह नहीं करते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُفْسِدُونَ: वे लोग जो ज़मीन में फ़साद (बिगाड़) फैलाते हैं।
  • لَا يُصْلِحُونَ: वे सुधार का काम नहीं करते।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों का वर्णन करती है जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं और सुधार का काम नहीं करते। ये वे लोग हैं जो अल्लाह की नाफ़रमानी में मशगूल रहते हैं, गुनाहों को फैलाते हैं, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) से दूर रखते हैं। वे न केवल खुद गुनाह करते हैं, बल्कि दूसरों को भी बुराई की तरफ ले जाते हैं। उनका काम सिर्फ़ तबाही और बिगाड़ है, और वे कभी सुधार और भलाई के रास्ते पर नहीं चलते।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के नबी (हज़रत शुएब अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम को सीधे रास्ते की दावत दे रहे थे और उन्हें उन सरकश लोगों की पैरवी करने से डरा रहे थे जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं। ये फ़सादी लोग हमेशा अल्लाह की हदों को तोड़ते हैं, लोगों के हक़ मारते हैं, और समाज में बुराई को बढ़ावा देते हैं।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक बड़ी सीख देती है कि हमें हमेशा सुधार (इस्लाह) का काम करना चाहिए, न कि फ़साद का। अल्लाह ने हमें इस दुनिया में भेजा है ताकि हम नेकी करें, अच्छाई फैलाएँ, और समाज में भलाई का पैग़ाम पहुँचाएँ। जो लोग फ़साद फैलाते हैं, वे अल्लाह की रहमत से दूर हो जाते हैं, और उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। आइए हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में गुज़ारें, अपने अंदर सुधार लाएँ, और दूसरों को भी नेकी की तरफ बुलाएँ। याद रखिए, अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो सुधार करते हैं, और वह फ़साद फैलाने वालों को पसंद नहीं करता। हमें चाहिए कि हम अपने किरदार को अच्छा बनाएँ, अपने घर, अपने समाज और अपने मुल्क में अमन और भलाई फैलाएँ, ताकि हम अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नत के हक़दार बन सकें।



📜 आयत 150-154 — अश-शुआरा

150فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो
151وَلَا تُطِيعُوا أَمْرَ الْمُسْرِفِينَ
और ज्यादती करने वालों का कहा न मानों
152الَّذِينَ يُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ
जो रुए ज़मीन पर फ़साद फैलाया करते हैं और (ख़राबियों की) इसलाह नहीं करते
153قَالُوا إِنَّمَا أَنتَ مِنَ الْمُسَحَّرِينَ
वह लोग बोले कि तुम पर तो बस जादू कर दिया गया है (कि ऐसी बातें करते हो)
154مَا أَنتَ إِلَّا بَشَرٌ مِّثْلُنَا فَأْتِ بِآيَةٍ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
तुम भी तो आख़िर हमारे ही ऐसे आदमी हो पस अगर तुम सच्चे हो तो कोई मौजिज़ा हमारे पास ला (दिखाओ)
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अनुवाद — अश-शुआरा 152

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Tuesday, August 18, 2026

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