अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُفْسِدُونَ: वे लोग जो ज़मीन में फ़साद (बिगाड़) फैलाते हैं।
- لَا يُصْلِحُونَ: वे सुधार का काम नहीं करते।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों का वर्णन करती है जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं और सुधार का काम नहीं करते। ये वे लोग हैं जो अल्लाह की नाफ़रमानी में मशगूल रहते हैं, गुनाहों को फैलाते हैं, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) से दूर रखते हैं। वे न केवल खुद गुनाह करते हैं, बल्कि दूसरों को भी बुराई की तरफ ले जाते हैं। उनका काम सिर्फ़ तबाही और बिगाड़ है, और वे कभी सुधार और भलाई के रास्ते पर नहीं चलते।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के नबी (हज़रत शुएब अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम को सीधे रास्ते की दावत दे रहे थे और उन्हें उन सरकश लोगों की पैरवी करने से डरा रहे थे जो ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं। ये फ़सादी लोग हमेशा अल्लाह की हदों को तोड़ते हैं, लोगों के हक़ मारते हैं, और समाज में बुराई को बढ़ावा देते हैं।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक बड़ी सीख देती है कि हमें हमेशा सुधार (इस्लाह) का काम करना चाहिए, न कि फ़साद का। अल्लाह ने हमें इस दुनिया में भेजा है ताकि हम नेकी करें, अच्छाई फैलाएँ, और समाज में भलाई का पैग़ाम पहुँचाएँ। जो लोग फ़साद फैलाते हैं, वे अल्लाह की रहमत से दूर हो जाते हैं, और उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। आइए हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में गुज़ारें, अपने अंदर सुधार लाएँ, और दूसरों को भी नेकी की तरफ बुलाएँ। याद रखिए, अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो सुधार करते हैं, और वह फ़साद फैलाने वालों को पसंद नहीं करता। हमें चाहिए कि हम अपने किरदार को अच्छा बनाएँ, अपने घर, अपने समाज और अपने मुल्क में अमन और भलाई फैलाएँ, ताकि हम अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नत के हक़दार बन सकें।
📜 आयत 150-154 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 152
सूरा अश-शुआरा आयत 152 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो रुए ज़मीन पर फ़साद फैलाया करते हैं और (ख़राबियों…सूरा आयत 152/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 150–154. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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