अश-शुआरा · 30/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَيْءٍ مُّبِينٍ ۝٣٠
Qaala awalw ji`tuka bishai`im mubeen
📖 हिंदी अर्थ
मूसा ने कहा अगरचे मैं आपको एक वाजेए व रौशन मौजिज़ा भी दिखाऊ (तो भी)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَوَلَوْ – "और अगर" (क्या तब भी?)
  • جِئْتُكَ – "मैं तुम्हारे पास लाऊँ"
  • بِشَيْءٍ مُبِينٍ – "ऐसी चीज़ जो स्पष्ट और प्रत्यक्ष हो" (यानी एक खुला हुआ प्रमाण, जो सच्चाई को रोशन कर दे)

तफ़सीर:

इस आयत में हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का फ़िरऔन को जवाब दिया गया है। फ़िरऔन ने धमकी दी थी कि अगर तूने कोई और मो'जिज़ा दिखाया तो मैं तुझे क़ैद कर दूँगा। इस पर हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अदब और हिम्मत के साथ फ़रमाया: "क्या तू मुझे क़ैद करेगा, चाहे मैं तेरे पास एक ऐसा स्पष्ट और खुला हुआ प्रमाण लेकर आऊँ जो मेरी सच्चाई को बिल्कुल ज़ाहिर कर दे?"

यानी मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को समझाया कि सच्चाई के सामने किसी भी तरह की रुकावट या डर नहीं होना चाहिए। अगर मेरे पास कोई साफ़ और ठोस सबूत है, तो उसे देखने के बाद भी क्या तू मुझे क़ैद करेगा? यह एक इंसाफ़-पसंदाना सवाल था, जो दिखाता है कि हक़ के पैरोकार कभी डरते नहीं, बल्कि सच्चाई को पेश करने के लिए हर हाल में तैयार रहते हैं।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि सच्चाई को पेश करने में हमें किसी भी तरह की धमकी या डर से पीछे नहीं हटना चाहिए। अल्लाह के नबियों का तरीक़ा यही रहा है कि वे हक़ को बयान करते थे, चाहे सामने कितना ही बड़ा ज़ालिम क्यों न हो। और जब इंसान के पास सच्चाई होती है, तो उसे पूरे भरोसे के साथ उसे पेश करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने ईमान और यक़ीन में मज़बूत रहना चाहिए। जब हमारे पास अल्लाह की तरफ़ से रहनुमाई हो, तो दुनिया की कोई ताक़त हमें रोक नहीं सकती। मूसा (अलैहिस्सलाम) का यह जवाब हर उस इंसान के लिए एक नमूना है जो हक़ की राह पर चलता है — कि सच्चाई बोलो, भले ही सामने कितनी ही बड़ी मुश्किलें क्यों न हों। अल्लाह अपने सच्चे बंदों की हिफ़ाज़त करता है और उन्हें कामयाबी अता करता है।



📜 आयत 28-32 — सूरा अश-शुआरा

28قَالَ رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِن كُنتُمْ تَعْقِلُونَ
मूसा ने कहा (वह ख़ुदा जो) पूरब पश्चिम और जो कुछ इन दोनों के दरमियान (सबका) मालिक है अगर तुम समझते हो (तो यही काफी है)
29قَالَ لَئِنِ اتَّخَذْتَ إِلَٰهًا غَيْرِي لَأَجْعَلَنَّكَ مِنَ الْمَسْجُونِينَ
फिरऔन ने कहा अगर तुम मेरे सिवा किसी और को (अपना) ख़ुदा बनाया है तो मै ज़रुर तुम्हे कैदी बनाऊँगा
30قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَيْءٍ مُّبِينٍ
मूसा ने कहा अगरचे मैं आपको एक वाजेए व रौशन मौजिज़ा भी दिखाऊ (तो भी)
31قَالَ فَأْتِ بِهِ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
फिरऔन ने कहा (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो ला दिखाओ
32فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ
बस (ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी फिर तो यकायक वह एक सरीही अज़दहा बन गया
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
30आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 30

सूरा अश-शुआरा आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मूसा ने कहा अगरचे मैं आपको एक वाजेए व रौशन…

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Friday, October 2, 2026

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