अश-शुआरा · 29/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
قَالَ لَئِنِ اتَّخَذْتَ إِلَٰهًا غَيْرِي لَأَجْعَلَنَّكَ مِنَ الْمَسْجُونِينَ ۝٢٩
Qaala la`init takhazta ilaahan ghairee la aj`alannaka minal masjooneen
📖 हिंदी अर्थ
फिरऔन ने कहा अगर तुम मेरे सिवा किसी और को (अपना) ख़ुदा बनाया है तो मै ज़रुर तुम्हे कैदी बनाऊँगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَئِنِ اتَّخَذْتَ إِلٰهًا غَيْرِي: यदि तूने मेरे अलावा किसी और को पूज्य/माबूद बनाया।
  • لَأَجْعَلَنَّكَ مِنَ الْمَسْجُونِينَ: मैं तुझे अवश्य क़ैदियों में शामिल कर दूँगा।

तफ़सीर:

जब फ़िरऔन मूसा (अलैहिस्सलाम) के सामने तर्क-प्रमाणों से पराजित हो गया और उसके पास कोई जवाब नहीं बचा, तो उसने घमंड और अकड़ में आकर तर्क को छोड़कर धमकी का सहारा लिया। उसने कहा: "यदि तूने मेरे अलावा किसी और को पूज्य बनाया, तो मैं तुझे अवश्य क़ैदियों में डाल दूँगा।" यह उसकी मजबूरी और सत्य से दूर होने की स्पष्ट निशानी थी। जब सच्चाई सामने आ गई और उसके पास कोई उत्तर नहीं था, तो उसने ज़ुल्म और ताकत का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। यही हाल हर उस ज़ालिम का होता है जो सत्य से मुँह मोड़ता है और अपनी गलत बात पर अड़ा रहता है।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सत्य का रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो, हमें उस पर डटे रहना चाहिए। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन की धमकियों की परवाह नहीं की और सच्चाई पर साबित क़दम रहे। अल्लाह तआला अपने नबियों और सच्चे बंदों की हमेशा मदद करता है। आज भी जो लोग अल्लाह के दीन की खातिर ज़ुल्म और धमकियों का सामना करते हैं, अल्लाह उन्हें इज़्ज़त और कामयाबी अता करता है। याद रखिए, फ़िरऔन की क़ैद और ज़ुल्म की सज़ा अल्लाह की तरफ से उसके लिए ज़िल्लत बनी, जबकि मूसा (अलैहिस्सलाम) की सच्चाई ने उन्हें ऊँचा किया। यही अल्लाह का क़ानून है — सत्य की जीत और बातिल की हार।



📜 आयत 27-31 — अश-शुआरा

27قَالَ إِنَّ رَسُولَكُمُ الَّذِي أُرْسِلَ إِلَيْكُمْ لَمَجْنُونٌ
फिरऔन ने कहा (लोगों) ये रसूल जो तुम्हारे पास भेजा गया है हो न हो दीवाना है
28قَالَ رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِن كُنتُمْ تَعْقِلُونَ
मूसा ने कहा (वह ख़ुदा जो) पूरब पश्चिम और जो कुछ इन दोनों के दरमियान (सबका) मालिक है अगर तुम समझते हो (तो यही काफी है)
29قَالَ لَئِنِ اتَّخَذْتَ إِلَٰهًا غَيْرِي لَأَجْعَلَنَّكَ مِنَ الْمَسْجُونِينَ
फिरऔन ने कहा अगर तुम मेरे सिवा किसी और को (अपना) ख़ुदा बनाया है तो मै ज़रुर तुम्हे कैदी बनाऊँगा
30قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَيْءٍ مُّبِينٍ
मूसा ने कहा अगरचे मैं आपको एक वाजेए व रौशन मौजिज़ा भी दिखाऊ (तो भी)
31قَالَ فَأْتِ بِهِ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
फिरऔन ने कहा (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो ला दिखाओ
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अनुवाद — अश-शुआरा 29

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Tuesday, August 18, 2026

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