अश-शुआरा · 31/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
قَالَ فَأْتِ بِهِ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ ۝٣١
Qaala faati biheee in kunta minas saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
फिरऔन ने कहा (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो ला दिखाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَأْتِ بِهِ — उसे लेकर आओ (अर्थात् वह चीज़ लाओ जिसका तुमने वादा किया है)
  • الصَّادِقِينَ — सच्चे लोगों में से

व्याख्या:

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को सच्चाई की ओर बुलाया और उसे बताया कि वे अल्लाह के रसूल हैं, तो फ़िरऔन ने उन्हें झुठलाया और कहा कि यदि तुम सच्चे हो तो कोई निशानी या चमत्कार पेश करो। फ़िरऔन ने कहा: "अच्छा, अगर तुम सच्चे हो तो वह चीज़ लेकर आओ जिसका तुमने दावा किया है।" उसका यह कहना वास्तव में एक चुनौती थी, लेकिन साथ ही उसके दिल में यह भी था कि यदि मूसा सच्चे हैं तो उन्हें कैद नहीं किया जाएगा, बल्कि उनकी बात मानी जाएगी।

यहाँ पर फ़िरऔन की बातचीत से हमें यह सबक मिलता है कि सत्य के पक्ष में खड़े होने वालों को अपने दावे के लिए सबूत पेश करने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने बिना किसी भय के फ़िरऔन की चुनौती को स्वीकार किया, क्योंकि उन्हें अपने रब पर पूरा भरोसा था। यह हमारे लिए भी एक प्रेरणा है कि जब हम सत्य पर हों, तो हमें किसी से डरना नहीं चाहिए, चाहे सामने कितना ही बड़ा शक्तिशाली व्यक्ति क्यों न हो।

इस आयत से हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि अल्लाह के रसूल हमेशा स्पष्ट प्रमाणों के साथ आते हैं। उनकी सच्चाई को समझने के लिए खुला दिल और सच्ची नीयत चाहिए। फ़िरऔन ने यह चुनौती दी, लेकिन जब सच्चा चमत्कार सामने आया, तो उसने फिर भी ईमान नहीं लाया, क्योंकि उसका उद्देश्य सत्य की खोज नहीं था, बल्कि अपनी बादशाहत को बनाए रखना था।

हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में सत्य को स्वीकार करने के लिए हमेशा तैयार रहें और जब सच्चाई सामने आए, तो उसे गर्व से स्वीकार करें। यही वह गुण है जो हमें फ़िरऔन जैसे लोगों से अलग करता है। अल्लाह हमें सत्य को देखने और स्वीकार करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 29-33 — अश-शुआरा

29قَالَ لَئِنِ اتَّخَذْتَ إِلَٰهًا غَيْرِي لَأَجْعَلَنَّكَ مِنَ الْمَسْجُونِينَ
फिरऔन ने कहा अगर तुम मेरे सिवा किसी और को (अपना) ख़ुदा बनाया है तो मै ज़रुर तुम्हे कैदी बनाऊँगा
30قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَيْءٍ مُّبِينٍ
मूसा ने कहा अगरचे मैं आपको एक वाजेए व रौशन मौजिज़ा भी दिखाऊ (तो भी)
31قَالَ فَأْتِ بِهِ إِن كُنتَ مِنَ الصَّادِقِينَ
फिरऔन ने कहा (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो ला दिखाओ
32فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُّبِينٌ
बस (ये सुनते ही) मूसा ने अपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दी फिर तो यकायक वह एक सरीही अज़दहा बन गया
33وَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذَا هِيَ بَيْضَاءُ لِلنَّاظِرِينَ
और (जेब से) अपना हाथ बाहर निकाला तो यकायक देखने वालों के वास्ते बहुत सफेद चमकदार था
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अनुवाद — अश-शुआरा 31

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Tuesday, August 18, 2026

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