अन-नमल · 33/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
قَالُوا نَحْنُ أُولُو قُوَّةٍ وَأُولُو بَأْسٍ شَدِيدٍ وَالْأَمْرُ إِلَيْكِ فَانظُرِي مَاذَا تَأْمُرِينَ ۝٣٣
Qaaloo nahnu uloo quwwatinw wa uloo baasin shadeed; wal amru ilaiki fanzuree maazaa taamureen
📖 हिंदी अर्थ
उन लोगों ने अर्ज़ की हम बड़े ज़ोरावर बडे लड़ने वाले हैं और (आइन्दा) हर अम्र का आप को एख्तियार है तो जो हुक्म दे आप (खुद अच्छी) तरह इसके अन्जाम पर ग़ौर कर ले
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أُولُو قُوَّةٍ — बल एवं शक्ति के स्वामी
  • بَأْسٍ شَدِيدٍ — अत्यंत भीषण युद्ध-कौशल एवं वीरता
  • وَالْأَمْرُ إِلَيْكِ — निर्णय का अधिकार आपके हाथ में है
  • فَانظُرِي مَاذَا تَأْمُرِينَ — आप विचार करें कि क्या आदेश देना चाहती हैं

तफ़सीर:

जब रानी बिल्क़ीस ने अपने दरबार के प्रमुख सरदारों और सलाहकारों को पैग़ंबर सुलेमान अलैहिस्सलाम का पत्र पढ़कर सुनाया और उनसे इस मामले में परामर्श मांगा, तो उन सरदारों ने, जो अपनी क़ौम के नेता और युद्ध-कौशल में माहिर थे, पूरे आत्मविश्वास और वफ़ादारी के साथ उत्तर दिया।

उन्होंने कहा: "हम शारीरिक शक्ति, हथियारों और सैन्य साज़ो-सामान में पूर्ण रूप से सक्षम हैं, और युद्ध के मैदान में हमारी वीरता और साहस की कोई मिसाल नहीं। हम किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। लेकिन हमारा निर्णय आपके अधिकार में है — आप जो भी आदेश दें, हम उसका पालन करने के लिए तैयार हैं। आप स्वयं विचार करें और जो उचित समझें, वही आदेश दें।"

यह उत्तर उनकी बहादुरी और रानी के प्रति उनकी निष्ठा दोनों को दर्शाता है। उन्होंने एक ओर अपनी सैन्य ताक़त का एहसास कराया कि यदि युद्ध की आवश्यकता पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे, और दूसरी ओर मामले का अंतिम फ़ैसला रानी पर छोड़ दिया, क्योंकि वे उसकी बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता पर भरोसा करते थे।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी मामले में आपसी परामर्श और सही निर्णय लेना कितना महत्वपूर्ण है। शक्ति और साहस के साथ-साथ बुद्धिमत्ता और विवेक का होना भी आवश्यक है। एक अच्छा नेता वही है जो अपनी क़ौम की ताक़त को पहचाने और सही समय पर सही फ़ैसला करे। यह भी सीख मिलती है कि जब कोई बड़ा मामला आए, तो घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखते हुए अक्लमंदी से काम लेना चाहिए। अल्लाह तआला इंसान को सही निर्णय की तौफ़ीक़ देता है जब वह उसकी ओर रुजू करता है और अपने मामलों में उससे मदद मांगता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 31-35 — अन-नमल

31أَلَّا تَعْلُوا عَلَيَّ وَأْتُونِي مُسْلِمِينَ
(और मज़मून) यह है कि मुझ से सरकशी न करो और मेरे सामने फरमाबरदार बन कर हाज़िर हो
32قَالَتْ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ أَفْتُونِي فِي أَمْرِي مَا كُنتُ قَاطِعَةً أَمْرًا حَتَّىٰ تَشْهَدُونِ
तब मलका (विलक़ीस) बोली ऐ मेरे दरबार के सरदारों तुम मेरे इस मामले में मुझे राय दो (क्योंकि मेरा तो ये क़ायदा है कि) जब तक तुम लोग मेरे सामने मौजूद न हो (मशवरा न दे दो) मैं किसी अम्र में क़तई फैसला न किया करती
33قَالُوا نَحْنُ أُولُو قُوَّةٍ وَأُولُو بَأْسٍ شَدِيدٍ وَالْأَمْرُ إِلَيْكِ فَانظُرِي مَاذَا تَأْمُرِينَ
उन लोगों ने अर्ज़ की हम बड़े ज़ोरावर बडे लड़ने वाले हैं और (आइन्दा) हर अम्र का आप को एख्तियार है तो जो हुक्म दे आप (खुद अच्छी) तरह इसके अन्जाम पर ग़ौर कर ले
34قَالَتْ إِنَّ الْمُلُوكَ إِذَا دَخَلُوا قَرْيَةً أَفْسَدُوهَا وَجَعَلُوا أَعِزَّةَ أَهْلِهَا أَذِلَّةً ۖ وَكَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ
मलका ने कहा बादशाहों का क़ायदा है कि जब किसी बस्ती में (बज़ोरे फ़तेह) दाख़िल हो जाते हैं तो उसको उजाड़ देते हैं और वहाँ के मुअज़िज़ लोगों को ज़लील व रुसवा कर देते हैं और ये लोग भी ऐसा ही करेंगे
35وَإِنِّي مُرْسِلَةٌ إِلَيْهِم بِهَدِيَّةٍ فَنَاظِرَةٌ بِمَ يَرْجِعُ الْمُرْسَلُونَ
और मैं उनके पास (एलचियों की माअरफ़त कुछ तोहफा भेजकर देखती हूँ कि एलची लोग क्या जवाब लाते हैं) ग़रज़ जब बिलक़ीस का एलची (तोहफा लेकर) सुलेमान के पास आया
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अनुवाद — अन-नमल 33

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Tuesday, August 18, 2026

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