अन-नमल · 44/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
قِيلَ لَهَا ادْخُلِي الصَّرْحَ ۖ فَلَمَّا رَأَتْهُ حَسِبَتْهُ لُجَّةً وَكَشَفَتْ عَن سَاقَيْهَا ۚ قَالَ إِنَّهُ صَرْحٌ مُّمَرَّدٌ مِّن قَوَارِيرَ ۗ قَالَتْ رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي وَأَسْلَمْتُ مَعَ سُلَيْمَانَ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ۝٤٤
Qeela lahad khulis sarha falammaa ra at hu hasibat hu lujjatanw wa khashafat `an saaqaihaa; qaala innahoo sarhum mumarradum min qawaareer; qaalat Rabbi innee zalamtu nafsee wa aslamtu ma`a Sulaimaana lillaahi Rabbil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
फिर उससे कहा गया कि आप अब महल मे चलिए तो जब उसने महल (में शीशे के फर्श) को देखा तो उसको गहरा पानी समझी (और गुज़रने के लिए इस तरह अपने पाएचे उठा लिए कि) अपनी दोनों पिन्डलियाँ खोल दी सुलेमान ने कहा (तुम डरो नहीं) ये (पानी नहीं है) महल है जो शीशे से मढ़ा हुआ है (उस वक्त तम्बीह हुई और) अर्ज़ की परवरदिगार मैने (आफताब को पूजा कर) यक़ीनन अपने ऊपर ज़ुल्म किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصَّرْحَ: महल या किला, जिसका फर्श शीशे (काँच) का बना हो।
  • لُجَّةً: पानी का गहरा और बड़ा हिस्सा, यानी गहरा पानी।
  • مُمَرَّدٌ: चिकना और समतल, जिसमें कोई ऊँच-नीच न हो।
  • قَوَارِيرَ: शीशा (काँच), जो पारदर्शी हो।

तफसीर (व्याख्या):

जब बिल्क़ीस (सबा की रानी) सुलैमान अलैहिस्सलाम के दरबार में पहुँची, तो उन्होंने उसे महल में दाखिल होने के लिए कहा। यह महल ऐसा बनाया गया था कि उसका फर्श शीशे का था और उसके नीचे पानी बह रहा था। जब रानी ने उस फर्श को देखा, तो उसे लगा कि यह गहरा पानी है, इसलिए उसने अपने पैरों की पिंडलियाँ खोल दीं ताकि वह पानी पार कर सके। यह देखकर सुलैमान अलैहिस्सलाम ने फरमाया: "यह पानी नहीं है, बल्कि यह एक चिकना महल है जो शीशे से बना है, और पानी उसके नीचे बह रहा है।"

यह दृश्य देखकर बिल्क़ीस को सुलैमान अलैहिस्सलाम की महानता और उनके राज्य की अद्भुत ताकत का एहसास हुआ। उसने महसूस किया कि यह सब किसी इंसान का कमाल नहीं, बल्कि अल्लाह की देन है। यहीं उसके दिल में सच्चाई का नूर उतरा और उसने अपनी गलती को स्वीकार किया। उसने कहा: "मेरे रब! मैंने अपनी जान पर ज़ुल्म किया, क्योंकि मैं तुझे छोड़कर सूरज की पूजा करती रही। अब मैं सुलैमान के साथ मिलकर अल्लाह के आगे सर झुकाती हूँ, जो सारे जहान का पालनहार है।"

यह घटना हमें सिखाती है कि सच्चाई जब सामने आती है, तो इंसान को उसे कबूल करने में देर नहीं करनी चाहिए। बिल्क़ीस ने अपनी गलती मानी और तुरंत ईमान ले आई। यही अक्लमंदी है कि इंसान हक़ के सामने झुक जाए, चाहे उसे अपनी पुरानी रस्मों और रिवाजों को छोड़ना पड़े। अल्लाह की रहमत और हिदायत हर उस दिल को मिलती है जो सच्चाई की तलाश में हो और अपने गुनाहों से तौबा कर ले। यह कहानी हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के नबी और उनकी दावत का असर दिलों को बदल सकता है, बशर्ते दिल में खुद को सही करने की नीयत हो।



📜 आयत 42-46 — अन-नमल

42فَلَمَّا جَاءَتْ قِيلَ أَهَٰكَذَا عَرْشُكِ ۖ قَالَتْ كَأَنَّهُ هُوَ ۚ وَأُوتِينَا الْعِلْمَ مِن قَبْلِهَا وَكُنَّا مُسْلِمِينَ
(चुनान्चे ऐसा ही किया गया) फिर जब बिलक़ीस (सुलेमान के पास) आयी तो पूछा गया कि तुम्हारा तख्त भी ऐसा ही है वह बोली गोया ये वही है (फिर कहने लगी) हमको तो उससे पहले ही (आपकी नुबूवत) मालूम हो गयी थी और हम तो आपके फ़रमाबरदार थे ही
43وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعْبُدُ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ إِنَّهَا كَانَتْ مِن قَوْمٍ كَافِرِينَ
और ख़ुदा के सिवा जिसे वह पूजती थी सुलेमान ने उससे उसे रोक दिया क्योंकि वह काफिर क़ौम की थी (और आफताब को पूजती थी)
44قِيلَ لَهَا ادْخُلِي الصَّرْحَ ۖ فَلَمَّا رَأَتْهُ حَسِبَتْهُ لُجَّةً وَكَشَفَتْ عَن سَاقَيْهَا ۚ قَالَ إِنَّهُ صَرْحٌ مُّمَرَّدٌ مِّن قَوَارِيرَ ۗ قَالَتْ رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي وَأَسْلَمْتُ مَعَ سُلَيْمَانَ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
फिर उससे कहा गया कि आप अब महल मे चलिए तो जब उसने महल (में शीशे के फर्श) को देखा तो उसको गहरा पानी समझी (और गुज़रने के लिए इस तरह अपने पाएचे उठा लिए कि) अपनी दोनों पिन्डलियाँ खोल दी सुलेमान ने कहा (तुम डरो नहीं) ये (पानी नहीं है) महल है जो शीशे से मढ़ा हुआ है (उस वक्त तम्बीह हुई और) अर्ज़ की परवरदिगार मैने (आफताब को पूजा कर) यक़ीनन अपने ऊपर ज़ुल्म किया
45وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَالِحًا أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ فَإِذَا هُمْ فَرِيقَانِ يَخْتَصِمُونَ
और अब मैं सुलेमान के साथ सारे जहाँ के पालने वाले खुदा पर ईमान लाती हूँ और हम ही ने क़ौम समूद के पास उनके भाई सालेह को पैग़म्बर बनाकर भेजा कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो तो वह सालेह के आते ही (मोमिन व काफिर) दो फरीक़ बनकर बाहम झगड़ने लगे
46قَالَ يَا قَوْمِ لِمَ تَسْتَعْجِلُونَ بِالسَّيِّئَةِ قَبْلَ الْحَسَنَةِ ۖ لَوْلَا تَسْتَغْفِرُونَ اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
सालेह ने कहा ऐ मेरी क़ौम (आख़िर) तुम लोग भलाई से पहल बुराई के वास्ते जल्दी क्यों कर रहे हो तुम लोग ख़ुदा की बारगाह में तौबा व अस्तग़फार क्यों नही करते ताकि तुम पर रहम किया जाए
अन-नमलकुरान सूची
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मक्कीRevelation
44आयत

अनुवाद — अन-नमल 44

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सूरा आयत 44/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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