अन-नमल · 43/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعْبُدُ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ إِنَّهَا كَانَتْ مِن قَوْمٍ كَافِرِينَ ۝٤٣
Wa saddahaa maa kaanat ta`budu min doonil laahi innahaa kaanat min qawmin kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा के सिवा जिसे वह पूजती थी सुलेमान ने उससे उसे रोक दिया क्योंकि वह काफिर क़ौम की थी (और आफताब को पूजती थी)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَصَدَّهَا: और उसे रोका / उसे रोक दिया
  • مَا كَانَت تَّعْبُدُ مِن دُونِ اللَّهِ: जिसे वह अल्लाह के सिवा पूजती थी (अर्थात सूर्य)
  • إِنَّهَا كَانَتْ مِن قَوْمٍ كَافِرِينَ: वह एक काफिर क़ौम से थी

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला हमें मलिका बिल्क़ीस के उस हाल से आगाह कर रहे हैं, जब उसने सच्चाई को पहचान लिया और हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम के सामने अपना ईमान ला दिया। अल्लाह फ़रमाता है कि उसे सच्चे दीन (इस्लाम) पर आने से पहले जो चीज़ रोके हुए थी, वह उसकी वह पुरानी पूजा थी जो वह अल्लाह के सिवा करती थी। वह सूरज की पूजा करती थी और अपनी क़ौम की परंपराओं पर अंधी तक़लीद करती रही। उसकी क़ौम के लोग काफ़िर थे, सूरज को पूजते थे, और वह उन्हीं में पली-बढ़ी थी, इसलिए उसे सिवा उस पूजा के कुछ और पता ही नहीं था।

ग़ौरतलब बात यह है कि मलिका बिल्क़ीस के पास अक़्ल और समझ की कमी नहीं थी, बल्कि वह बड़ी समझदार और होशियार औरत थी। लेकिन झूठे अक़ीदों और बातिल रस्मों ने उसके दिल की आँखों को अंधा कर दिया था। यही हाल आज के उन लोगों का है जो अपने बुज़ुर्गों की राह पर चलते हुए सच्चाई को देखने के बावजूद उसे क़बूल नहीं करते। जब अल्लाह की तौफ़ीक़ उसे नसीब हुई और उसने हक़ को पहचान लिया, तो उसने फ़ौरन ईमान ला दिया और अपनी पुरानी ग़लतियों से तौबा कर ली।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इंसान को चाहिए कि वह हक़ और सच्चाई को क़बूल करने में देर न करे, चाहे उसे अपनी क़ौम के रिवाजों और परंपराओं के ख़िलाफ़ ही क्यों न जाना पड़े। अल्लाह तआला हर उस शख्स को हिदायत देता है जो सच्चाई की तलाश में सच्चे दिल से निकलता है। मलिका बिल्क़ीस ने जैसे ही सच्चाई देखी, उसने फ़ौरन उसे क़बूल कर लिया — यही अक़्लमंदी है। अल्लाह हम सबको हक़ को पहचानने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 41-45 — सूरा अन-नमल

41قَالَ نَكِّرُوا لَهَا عَرْشَهَا نَنظُرْ أَتَهْتَدِي أَمْ تَكُونُ مِنَ الَّذِينَ لَا يَهْتَدُونَ
(उसके बाद) सुलेमान ने कहा कि उसके तख्त में (उसकी अक्ल के इम्तिहान के लिए) तग़य्युर तबददुल कर दो ताकि हम देखें कि फिर भी वह समझ रखती है या उन लोगों में है जो कुछ समझ नहीं रखते
42فَلَمَّا جَاءَتْ قِيلَ أَهَٰكَذَا عَرْشُكِ ۖ قَالَتْ كَأَنَّهُ هُوَ ۚ وَأُوتِينَا الْعِلْمَ مِن قَبْلِهَا وَكُنَّا مُسْلِمِينَ
(चुनान्चे ऐसा ही किया गया) फिर जब बिलक़ीस (सुलेमान के पास) आयी तो पूछा गया कि तुम्हारा तख्त भी ऐसा ही है वह बोली गोया ये वही है (फिर कहने लगी) हमको तो उससे पहले ही (आपकी नुबूवत) मालूम हो गयी थी और हम तो आपके फ़रमाबरदार थे ही
43وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعْبُدُ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ إِنَّهَا كَانَتْ مِن قَوْمٍ كَافِرِينَ
और ख़ुदा के सिवा जिसे वह पूजती थी सुलेमान ने उससे उसे रोक दिया क्योंकि वह काफिर क़ौम की थी (और आफताब को पूजती थी)
44قِيلَ لَهَا ادْخُلِي الصَّرْحَ ۖ فَلَمَّا رَأَتْهُ حَسِبَتْهُ لُجَّةً وَكَشَفَتْ عَن سَاقَيْهَا ۚ قَالَ إِنَّهُ صَرْحٌ مُّمَرَّدٌ مِّن قَوَارِيرَ ۗ قَالَتْ رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي وَأَسْلَمْتُ مَعَ سُلَيْمَانَ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
फिर उससे कहा गया कि आप अब महल मे चलिए तो जब उसने महल (में शीशे के फर्श) को देखा तो उसको गहरा पानी समझी (और गुज़रने के लिए इस तरह अपने पाएचे उठा लिए कि) अपनी दोनों पिन्डलियाँ खोल दी सुलेमान ने कहा (तुम डरो नहीं) ये (पानी नहीं है) महल है जो शीशे से मढ़ा हुआ है (उस वक्त तम्बीह हुई और) अर्ज़ की परवरदिगार मैने (आफताब को पूजा कर) यक़ीनन अपने ऊपर ज़ुल्म किया
45وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَالِحًا أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ فَإِذَا هُمْ فَرِيقَانِ يَخْتَصِمُونَ
और अब मैं सुलेमान के साथ सारे जहाँ के पालने वाले खुदा पर ईमान लाती हूँ और हम ही ने क़ौम समूद के पास उनके भाई सालेह को पैग़म्बर बनाकर भेजा कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो तो वह सालेह के आते ही (मोमिन व काफिर) दो फरीक़ बनकर बाहम झगड़ने लगे
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
43आयत

अनुवाद — अन-नमल 43

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Saturday, October 3, 2026

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