अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَصَدَّهَا: और उसे रोका / उसे रोक दिया
- مَا كَانَت تَّعْبُدُ مِن دُونِ اللَّهِ: जिसे वह अल्लाह के सिवा पूजती थी (अर्थात सूर्य)
- إِنَّهَا كَانَتْ مِن قَوْمٍ كَافِرِينَ: वह एक काफिर क़ौम से थी
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला हमें मलिका बिल्क़ीस के उस हाल से आगाह कर रहे हैं, जब उसने सच्चाई को पहचान लिया और हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम के सामने अपना ईमान ला दिया। अल्लाह फ़रमाता है कि उसे सच्चे दीन (इस्लाम) पर आने से पहले जो चीज़ रोके हुए थी, वह उसकी वह पुरानी पूजा थी जो वह अल्लाह के सिवा करती थी। वह सूरज की पूजा करती थी और अपनी क़ौम की परंपराओं पर अंधी तक़लीद करती रही। उसकी क़ौम के लोग काफ़िर थे, सूरज को पूजते थे, और वह उन्हीं में पली-बढ़ी थी, इसलिए उसे सिवा उस पूजा के कुछ और पता ही नहीं था।
ग़ौरतलब बात यह है कि मलिका बिल्क़ीस के पास अक़्ल और समझ की कमी नहीं थी, बल्कि वह बड़ी समझदार और होशियार औरत थी। लेकिन झूठे अक़ीदों और बातिल रस्मों ने उसके दिल की आँखों को अंधा कर दिया था। यही हाल आज के उन लोगों का है जो अपने बुज़ुर्गों की राह पर चलते हुए सच्चाई को देखने के बावजूद उसे क़बूल नहीं करते। जब अल्लाह की तौफ़ीक़ उसे नसीब हुई और उसने हक़ को पहचान लिया, तो उसने फ़ौरन ईमान ला दिया और अपनी पुरानी ग़लतियों से तौबा कर ली।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि इंसान को चाहिए कि वह हक़ और सच्चाई को क़बूल करने में देर न करे, चाहे उसे अपनी क़ौम के रिवाजों और परंपराओं के ख़िलाफ़ ही क्यों न जाना पड़े। अल्लाह तआला हर उस शख्स को हिदायत देता है जो सच्चाई की तलाश में सच्चे दिल से निकलता है। मलिका बिल्क़ीस ने जैसे ही सच्चाई देखी, उसने फ़ौरन उसे क़बूल कर लिया — यही अक़्लमंदी है। अल्लाह हम सबको हक़ को पहचानने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 41-45 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 43
सूरा अन-नमल आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा के सिवा जिसे वह पूजती थी सुलेमान ने…सूरा आयत 43/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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