अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ثَمُودَ (समूद): यह एक प्राचीन क़ौम (जाति) थी जो हिज्र (वर्तमान सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र) में रहती थी। ये लोग पहाड़ों को काटकर घर बनाते थे और अत्यधिक ताकतवर थे।
- أَخَاهُمْ (उनका भाई): यहाँ "भाई" से तात्पर्य नस्ल (वंश) में भाई होना है, क्योंकि हज़रत सालिह अलैहिस्सलाम उसी क़ौम से ताल्लुक़ रखते थे।
- يَخْتَصِمُونَ (झगड़ा करना): आपस में विवाद करना, हर एक यह दावा करना कि सच्चाई मेरे साथ है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने रसूल हज़रत सालिह अलैहिस्सलाम को क़ौम-ए-समूद की ओर भेजा। यह वही क़ौम थी जो अपनी ताकत और भव्य इमारतों पर घमंड करती थी। अल्लाह ने उन्हें उन्हीं में से एक सच्चा और भरोसेमंद इंसान बनाकर भेजा ताकि वह उन्हें सीधा रास्ता दिखाएँ। उनका मूल संदेश यही था: "अल्लाह की इबादत करो, उसे अकेला मानो, उसके साथ किसी को साझी न बनाओ।" यही तौहीद (एकेश्वरवाद) का पैग़ाम है जो हर नबी लेकर आया।
लेकिन जब हज़रत सालिह अलैहिस्सलाम ने उन्हें यह सच्चाई पेश की, तो उस क़ौम के लोग दो फ़िर्कों (समूहों) में बंट गए: एक समूह वह था जिसने ईमान लाया और सच्चाई को क़बूल किया, और दूसरा समूह वह था जिसने इनकार किया और अपनी ज़िद पर अड़ा रहा। फिर ये दोनों समूह आपस में झगड़ने लगे — हर एक यह दावा करता कि सच्चाई उसके साथ है। मोमिनीन कहते कि सालिह अलैहिस्सलाम सच्चे नबी हैं, जबकि काफ़िर कहते कि वह झूठे हैं और अपनी पुरानी परंपराओं पर अड़े रहना चाहते थे।
यह झगड़ा सिर्फ़ उस वक़्त का नहीं था, बल्कि हर ज़माने में सच्चाई और बातिल (झूठ) के बीच यही टकराव होता रहा है। अल्लाह तआला ने इस क़िस्से में हमारे लिए एक बड़ी सीख रखी है: जब सच्चाई पेश की जाए, तो इंसान को अपने घमंड, अपनी रस्मों और अपनी ज़िद को छोड़कर सच्चाई को क़बूल करना चाहिए। क़ौम-ए-समूद ने अपनी ज़िद और घमंड की वजह से अल्लाह के नबी को झुठलाया, और अंजाम यह हुआ कि उन पर अल्लाह का अज़ाब आया।
आज भी हर इंसान के सामने यही दो रास्ते हैं: एक रास्ता अल्लाह की इबादत और उसके रसूल की पैरवी का है, और दूसरा रास्ता अपनी ख्वाहिशों और बातिल की पैरवी का। जो लोग सच्चाई को क़बूल करते हैं, वे कामयाब होते हैं, और जो ज़िद और घमंड पर अड़े रहते हैं, वे नुक़सान उठाते हैं। अल्लाह तआला हमें सच्चाई को क़बूल करने और उस पर साबित क़दम रहने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 43-47 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 45
सूरा अन-नमल आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अब मैं सुलेमान के साथ सारे जहाँ के पालने…सूरा आयत 45/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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