अन-नमल · 45/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَالِحًا أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ فَإِذَا هُمْ فَرِيقَانِ يَخْتَصِمُونَ ۝٤٥
Wa laqad arsalnaaa ilaa Samoda akhaahum Saalihan ani`budul lahha fa izaa hum fareeqaani yakhtasimoon
📖 हिंदी अर्थ
और अब मैं सुलेमान के साथ सारे जहाँ के पालने वाले खुदा पर ईमान लाती हूँ और हम ही ने क़ौम समूद के पास उनके भाई सालेह को पैग़म्बर बनाकर भेजा कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो तो वह सालेह के आते ही (मोमिन व काफिर) दो फरीक़ बनकर बाहम झगड़ने लगे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثَمُودَ (समूद): यह एक प्राचीन क़ौम (जाति) थी जो हिज्र (वर्तमान सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र) में रहती थी। ये लोग पहाड़ों को काटकर घर बनाते थे और अत्यधिक ताकतवर थे।
  • أَخَاهُمْ (उनका भाई): यहाँ "भाई" से तात्पर्य नस्ल (वंश) में भाई होना है, क्योंकि हज़रत सालिह अलैहिस्सलाम उसी क़ौम से ताल्लुक़ रखते थे।
  • يَخْتَصِمُونَ (झगड़ा करना): आपस में विवाद करना, हर एक यह दावा करना कि सच्चाई मेरे साथ है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने रसूल हज़रत सालिह अलैहिस्सलाम को क़ौम-ए-समूद की ओर भेजा। यह वही क़ौम थी जो अपनी ताकत और भव्य इमारतों पर घमंड करती थी। अल्लाह ने उन्हें उन्हीं में से एक सच्चा और भरोसेमंद इंसान बनाकर भेजा ताकि वह उन्हें सीधा रास्ता दिखाएँ। उनका मूल संदेश यही था: "अल्लाह की इबादत करो, उसे अकेला मानो, उसके साथ किसी को साझी न बनाओ।" यही तौहीद (एकेश्वरवाद) का पैग़ाम है जो हर नबी लेकर आया।

लेकिन जब हज़रत सालिह अलैहिस्सलाम ने उन्हें यह सच्चाई पेश की, तो उस क़ौम के लोग दो फ़िर्कों (समूहों) में बंट गए: एक समूह वह था जिसने ईमान लाया और सच्चाई को क़बूल किया, और दूसरा समूह वह था जिसने इनकार किया और अपनी ज़िद पर अड़ा रहा। फिर ये दोनों समूह आपस में झगड़ने लगे — हर एक यह दावा करता कि सच्चाई उसके साथ है। मोमिनीन कहते कि सालिह अलैहिस्सलाम सच्चे नबी हैं, जबकि काफ़िर कहते कि वह झूठे हैं और अपनी पुरानी परंपराओं पर अड़े रहना चाहते थे।

यह झगड़ा सिर्फ़ उस वक़्त का नहीं था, बल्कि हर ज़माने में सच्चाई और बातिल (झूठ) के बीच यही टकराव होता रहा है। अल्लाह तआला ने इस क़िस्से में हमारे लिए एक बड़ी सीख रखी है: जब सच्चाई पेश की जाए, तो इंसान को अपने घमंड, अपनी रस्मों और अपनी ज़िद को छोड़कर सच्चाई को क़बूल करना चाहिए। क़ौम-ए-समूद ने अपनी ज़िद और घमंड की वजह से अल्लाह के नबी को झुठलाया, और अंजाम यह हुआ कि उन पर अल्लाह का अज़ाब आया।

आज भी हर इंसान के सामने यही दो रास्ते हैं: एक रास्ता अल्लाह की इबादत और उसके रसूल की पैरवी का है, और दूसरा रास्ता अपनी ख्वाहिशों और बातिल की पैरवी का। जो लोग सच्चाई को क़बूल करते हैं, वे कामयाब होते हैं, और जो ज़िद और घमंड पर अड़े रहते हैं, वे नुक़सान उठाते हैं। अल्लाह तआला हमें सच्चाई को क़बूल करने और उस पर साबित क़दम रहने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 43-47 — अन-नमल

43وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعْبُدُ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ إِنَّهَا كَانَتْ مِن قَوْمٍ كَافِرِينَ
और ख़ुदा के सिवा जिसे वह पूजती थी सुलेमान ने उससे उसे रोक दिया क्योंकि वह काफिर क़ौम की थी (और आफताब को पूजती थी)
44قِيلَ لَهَا ادْخُلِي الصَّرْحَ ۖ فَلَمَّا رَأَتْهُ حَسِبَتْهُ لُجَّةً وَكَشَفَتْ عَن سَاقَيْهَا ۚ قَالَ إِنَّهُ صَرْحٌ مُّمَرَّدٌ مِّن قَوَارِيرَ ۗ قَالَتْ رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي وَأَسْلَمْتُ مَعَ سُلَيْمَانَ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
फिर उससे कहा गया कि आप अब महल मे चलिए तो जब उसने महल (में शीशे के फर्श) को देखा तो उसको गहरा पानी समझी (और गुज़रने के लिए इस तरह अपने पाएचे उठा लिए कि) अपनी दोनों पिन्डलियाँ खोल दी सुलेमान ने कहा (तुम डरो नहीं) ये (पानी नहीं है) महल है जो शीशे से मढ़ा हुआ है (उस वक्त तम्बीह हुई और) अर्ज़ की परवरदिगार मैने (आफताब को पूजा कर) यक़ीनन अपने ऊपर ज़ुल्म किया
45وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَالِحًا أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ فَإِذَا هُمْ فَرِيقَانِ يَخْتَصِمُونَ
और अब मैं सुलेमान के साथ सारे जहाँ के पालने वाले खुदा पर ईमान लाती हूँ और हम ही ने क़ौम समूद के पास उनके भाई सालेह को पैग़म्बर बनाकर भेजा कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो तो वह सालेह के आते ही (मोमिन व काफिर) दो फरीक़ बनकर बाहम झगड़ने लगे
46قَالَ يَا قَوْمِ لِمَ تَسْتَعْجِلُونَ بِالسَّيِّئَةِ قَبْلَ الْحَسَنَةِ ۖ لَوْلَا تَسْتَغْفِرُونَ اللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
सालेह ने कहा ऐ मेरी क़ौम (आख़िर) तुम लोग भलाई से पहल बुराई के वास्ते जल्दी क्यों कर रहे हो तुम लोग ख़ुदा की बारगाह में तौबा व अस्तग़फार क्यों नही करते ताकि तुम पर रहम किया जाए
47قَالُوا اطَّيَّرْنَا بِكَ وَبِمَن مَّعَكَ ۚ قَالَ طَائِرُكُمْ عِندَ اللَّهِ ۖ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ تُفْتَنُونَ
वह लोग बोले हमने तो तुम से और तुम्हारे साथियों से बुरा शगुन पाया सालेह ने कहा तुम्हारी बदकिस्मती ख़ुदा के पास है (ये सब कुछ नहीं) बल्कि तुम लोगों की आज़माइश की जा रही है
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अनुवाद — अन-नमल 45

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Tuesday, August 18, 2026

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