अन-नमल · 60/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
أَمَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَنبَتْنَا بِهِ حَدَائِقَ ذَاتَ بَهْجَةٍ مَّا كَانَ لَكُمْ أَن تُنبِتُوا شَجَرَهَا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ يَعْدِلُونَ ۝٦٠
Amman khalaqas samaawaati wal arda wa anzala lakum minas samaaa`i maaa`an fa ambatnaa bihee hadaaa`iqa zaata bahjjah; maa kanna lakum an tumbitoo shajarahaa; `a-ilaahum ma`al laah; bal hum qawmuny ya`diloon
📖 हिंदी अर्थ
भला वह कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पैदा किया और तुम्हारे वास्ते आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने पानी से दिल चस्प (ख़ुशनुमा) बाग़ उठाए तुम्हारे तो ये बस की बात न थी कि तुम उनके दरख्तों को उगा सकते तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि ये लोग खुद अपने जी से गढ़ के बुतो को उसके बराबर बनाते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • حَدَائِقَ: बाग़ात (बग़ीचे)
  • ذَاتَ بَهْجَةٍ: ख़ूबसूरत और रौनक़दार, जिसे देखकर दिल ख़ुश हो जाए
  • مَا كَانَ لَكُمْ: तुम्हारे लिए मुमकिन नहीं था
  • يَعْدِلُونَ: (यहाँ) शिर्क करते हैं, अल्लाह के साथ दूसरों को बराबर ठहराते हैं

तफ़सीर:

ऐ नबी! इन मुशरिकीन से पूछो, वह कौन है जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया? किसने यह विशाल ब्रह्मांड, ये ऊँचे आसमान, ये फैली हुई ज़मीन, ये पहाड़, ये समुद्र — सब कुछ बनाया? क्या तुम्हारे ये बुत, जिन्हें तुम पूजते हो, इनमें से कुछ भी पैदा कर सकते हैं?

और वही है जिसने तुम्हारे लिए आसमान से पानी बरसाया — वह बारिश जो ज़िंदगी का ज़रिया है। उसी पानी के ज़रिए हमने तुम्हारे लिए ऐसे बाग़ात उगाए जो देखने में इतने ख़ूबसूरत और दिलकश होते हैं कि उन्हें देखकर इंसान का दिल ख़ुशी से भर जाता है। हर तरफ़ हरियाली, फूल, फल, सुंदर पेड़ — यह सब उसी पानी से निकलता है।

अब सोचो — क्या तुममें से कोई अपने बूते पर इन पेड़ों को उगा सकता है? क्या तुम उन्हें पानी देकर, मिट्टी तैयार करके, बीज बोकर भी उन्हें उगा सकते हो? हरगिज़ नहीं! यह सब अल्लाह की क़ुदरत है। वही बीज से पेड़ बनाता है, वही सूखी ज़मीन से हरियाली निकालता है।

तो क्या अल्लाह के साथ कोई और माबूद (पूज्य) है जिसने ये सब किया हो? क्या कोई और इन कामों में अल्लाह का शरीक है? हरगिज़ नहीं! लेकिन ये लोग — ये मुशरिकीन — सच्चाई से भटककर अल्लाह के साथ दूसरों को बराबर ठहरा रहे हैं। वे जानते हुए भी, या भूलकर, ख़ालिक़ (रचने वाले) की इबादत छोड़कर मख़लूक़ (पैदा किए गए) की इबादत कर रहे हैं।

यह कितनी बड़ी नाइंसाफ़ी है! जिसने ये सब नेअमतें दीं, उसे छोड़ दिया, और उन चीज़ों को पूजने लगे जो न कुछ दे सकती हैं और न कुछ छीन सकती हैं। अल्लाह की याद करो, उसकी नेअमतों पर शुक्र करो, और सिर्फ़ उसी की इबादत करो। वही अकेला इस काबिल है कि उसे पूजा जाए। उसकी रहमत और क़ुदरत के आगे सर झुकाओ, और उससे दुआ करो कि वह हमें सीधे रास्ते पर चलाए और शिर्क से बचाए।



📜 आयत 58-62 — अन-नमल

58وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ
और (फिर तो) हमने उन लोगों पर (पत्थर का) मेंह बरसाया तो जो लोग डराए जा चुके थे उन पर क्या बुरा मेंह बरसा
59قُلِ الْحَمْدُ لِلَّهِ وَسَلَامٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ الَّذِينَ اصْطَفَىٰ ۗ آللَّهُ خَيْرٌ أَمَّا يُشْرِكُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो (उनके हलाक़ होने पर) खुदा का शुक्र और उसके बरगुज़ीदा बन्दों पर सलाम भला ख़ुदा बेहतर है या वह चीज़ जिसे ये लोग शरीके ख़ुदा कहते हैं
60أَمَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَنبَتْنَا بِهِ حَدَائِقَ ذَاتَ بَهْجَةٍ مَّا كَانَ لَكُمْ أَن تُنبِتُوا شَجَرَهَا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ يَعْدِلُونَ
भला वह कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पैदा किया और तुम्हारे वास्ते आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने पानी से दिल चस्प (ख़ुशनुमा) बाग़ उठाए तुम्हारे तो ये बस की बात न थी कि तुम उनके दरख्तों को उगा सकते तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि ये लोग खुद अपने जी से गढ़ के बुतो को उसके बराबर बनाते हैं
61أَمَّن جَعَلَ الْأَرْضَ قَرَارًا وَجَعَلَ خِلَالَهَا أَنْهَارًا وَجَعَلَ لَهَا رَوَاسِيَ وَجَعَلَ بَيْنَ الْبَحْرَيْنِ حَاجِزًا ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
भला वह कौन है जिसने ज़मीन को (लोगों के) ठहरने की जगह बनाया और उसके दरमियान जा बजा नहरें दौड़ायी और उसकी मज़बूती के वास्ते पहाड़ बनाए और (मीठे खारी) दरियाओं के दरमियान हदे फासिल बनाया तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि उनमें के अकसर कुछ जानते ही नहीं
62أَمَّن يُجِيبُ الْمُضْطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكْشِفُ السُّوءَ وَيَجْعَلُكُمْ خُلَفَاءَ الْأَرْضِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
भला वह कौन है कि जब मुज़तर उसे पुकारे तो दुआ क़ुबूल करता है और मुसीबत को दूर करता है और तुम लोगों को ज़मीन में (अपना) नायब बनाता है तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद है (हरगिज़ नहीं) उस पर भी तुम लोग बहुत कम नसीहत व इबरत हासिल करते हो
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अनुवाद — अन-नमल 60

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Tuesday, August 18, 2026

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