Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آنَسْتُ: मैंने देखा / मैंने भाँप लिया
- شِهَابٍ: चमकती हुई लौ / प्रकाशमान ज्वाला
- قَبَسٍ: लकड़ी का वह टुकड़ा जिसके एक सिरे पर आग लगी हो
- تَصْطَلُونَ: आग से ठंडक दूर करना, सेकना (गर्मी पाना)
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला हमें हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की वह यादगार घटना सुनाते हैं, जब वे मदयन से मिस्र की ओर जा रहे थे। रात का अंधेरा था, सर्दी की तीव्रता थी और वे रास्ता भटक चुके थे। उन्होंने अपने परिवार वालों से कहा: "मैंने दूर से एक आग देखी है। मैं उसके पास जाता हूँ, या तो मैं तुम्हारे लिए रास्ते की जानकारी लेकर आऊँगा, या फिर उस आग से एक जलती हुई लौ ले आऊँगा ताकि तुम उससे सेक सको और ठंड से राहत पा सको।"
यह वही पवित्र क्षण था जब अल्लाह ने अपने नबी को अपनी पहली नबूवत का शुभ समाचार देने वाला था। यह आग कोई साधारण आग नहीं थी, बल्कि यह अल्लाह का नूर था जो मूसा (अलैहिस्सलाम) के जीवन की दिशा बदलने वाला था। इस घटना में हमारे लिए कई सबक हैं:
पहला सबक: हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने मुश्किल हालात में भी अपने परिवार की देखभाल का ख्याल रखा। उन्होंने आग देखी तो सबसे पहले अपने अहल (परिवार) को इसकी खबर दी और उनकी ज़रूरतों का ध्यान रखा। यह हमें सिखाता है कि एक अच्छा इंसान वही है जो अपने परिवार के प्रति ज़िम्मेदार हो।
दूसरा सबक: जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है और अपने काम में सच्ची नीयत रखता है, तो अल्लाह उसे ऐसे रास्ते दिखाता है जिनका उसे अंदाज़ा भी नहीं होता। मूसा (अलैहिस्सलाम) सिर्फ़ आग की तलाश में गए थे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें नबूवत जैसी महान नेमत अता कर दी।
तीसरा सबक: यह घटना हमें बताती है कि अल्लाह हर मुश्किल में राहत देता है। जब बंदा अल्लाह की राह में निकलता है, तो अल्लाह उसके रास्ते की मुश्किलें आसान कर देता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) अंधेरी रात में रास्ता भटके हुए थे, लेकिन अल्लाह ने उन्हें नूर (रोशनी) अता की।
चौथा सबक: इस आयत में हमें यह भी सिखाया गया है कि हमें अपने परिवार और अपने साथियों की ज़रूरतों का ख्याल रखना चाहिए। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा कि मैं या तो खबर लाऊँगा या आग लाऊँगा - यानी वे अपने परिवार को बेफिक्र नहीं छोड़ना चाहते थे।
पाँचवाँ सबक: यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के नबी भी इंसान ही थे, उन्हें भी ठंड लगती थी, उन्हें भी रास्ते की जानकारी की ज़रूरत होती थी। लेकिन अल्लाह ने उन्हें इसी इंसानी हालत में नबूवत से नवाज़ा। यह हमारे लिए इस बात की तसल्ली है कि अल्लाह हर इंसान को उसकी हालत में ही हिदायत दे सकता है।
आज भी जब हम किसी मुश्किल में होते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि अल्लाह हर मुश्किल का हल करने वाला है। जिस तरह उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) की आग को नूर बना दिया, उसी तरह वह हमारी मुश्किलों को भी आसानी में बदल सकता है। बस ज़रूरत है उस पर भरोसा करने की और उसकी राह में चलने की।
📜 आयत 5-9 — सूरा अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 7
सूरा अन-नमल आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (वह वाक़िया याद दिलाओ) जब मूसा ने अपने लड़के बालों…सूरा आयत 7/93 — सूरा अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नमल सुनें, सूरा अन-नमल अनुवाद, सूरा अन-नमल mp3, सूरा अन-नमल pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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