अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تُلَقَّى: तुम्हें पहुँचाया जाता है, सिखाया जाता है, प्रदान किया जाता है।
- مِن لَّدُنْ: की ओर से, के पास से।
- حَكِيمٍ: अत्यंत तत्वदर्शी, जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और दूरदर्शिता से काम करता है।
- عَلِيمٍ: सब कुछ जानने वाला, जिसके ज्ञान से कोई चीज़ छिपी नहीं है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! यह बात पूरे यक़ीन के साथ जान लो कि यह क़ुरआन जो तुम्हें पहुँचाया जा रहा है, वह किसी इंसान की रचना नहीं, बल्कि अल्लाह की ओर से उतरा हुआ वह्य है। यह वही अल्लाह है जो हकीम है—अपनी हर मख़लूक़ की पैदाइश में, अपने हर हुक्म में और अपनी तदबीर में पूर्ण दानाई और हिकमत रखता है। वह अलीम है—उसके इल्म में ज़मीन और आसमान की हर चीज़, छुपी और खुली, सब शामिल है। वह जानता है कि उसके बंदों के लिए किसमें भलाई है और किसमें बुराई।
यह आयत उन कुफ़्फ़ारे मक्का का जवाब है जो कहते थे कि मुहम्मद (ﷺ) ने यह क़ुरआन खुद बना लिया है। अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि यह क़ुरआन किसी इंसान का कलाम नहीं, बल्कि उस ज़ात की तरफ़ से है जो हर चीज़ का हकीम और अलीम है। जिस किताब में इतनी गहराई, इतनी हिकमत और इतना इल्म हो, वह किसी अनपढ़ नबी की अपनी रचना कैसे हो सकती है?
इस आयत में नबी करीम (ﷺ) के लिए बड़ी तसल्ली और इत्मिनान है कि आप जो कुछ भी पेश कर रहे हैं, वह अल्लाह की तरफ़ से है, और अल्लाह ही आपका हाफ़िज़ और मददगार है। यही वह ज़ात है जिसने आपको यह क़ुरआन सिखाया, और यही वह ज़ात है जो आपकी हिफ़ाज़त भी करेगी।
दावती पहलू:
यह आयत हर मुसलमान के दिल में यह यक़ीन पैदा करती है कि क़ुरआन कोई आम किताब नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है। जिस इंसान ने इस किताब को थाम लिया, उसने उस ज़ात का सहारा थाम लिया जो सबसे ज़्यादा हकीम और सबसे ज़्यादा अलीम है। जब हम क़ुरआन पढ़ते हैं, तो हम उस ख़ुदा से बात कर रहे होते हैं जो हमें सबसे बेहतर जानता है। यह किताब हमारी ज़िंदगी के हर मोड़ पर रहनुमाई करती है—चाहे वह इबादत का मामला हो, मुआमलात का, या अख़लाक़ का। इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि वह क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ने तक ही सीमित न रखे, बल्कि उस पर अमल करे और उसे अपनी ज़िंदगी का नक्शा बनाए। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।
📜 आयत 4-8 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 6
सूरा अन-नमल आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुमको तो क़ुरान एक बडे वाक़िफकार हकीम…सूरा आयत 6/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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