अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْمَلَأُ: क़ौम के बड़े-बड़े सरदार और रईस लोग।
- فَأَوْقِدْ: आग जलाओ, भट्टी में आग लगाओ।
- الطِّينِ: मिट्टी (जिससे ईंटें बनाई जाती हैं)।
- صَرْحًا: ऊँची इमारत, महल या बुर्ज।
- أَطَّلِعُ: ऊपर चढ़कर देखूँ, जासूसी करूँ।
तफ़सीर:
फ़िरऔन ने अपनी क़ौम के सरदारों और रईसों को इकट्ठा करके घमंड और अहंकार के साथ कहा: "ऐ मेरी क़ौम के बड़े लोगो! मैं तो तुम्हारे लिए अपने सिवा किसी और को इबादत के लायक़ नहीं जानता। मैं ही तुम्हारा रब और मालिक हूँ।" यह कहकर उसने अपने वज़ीर हामान को हुक्म दिया: "ऐ हामान! मिट्टी पर आग जलाओ, उसे पकाकर ईंटें बनाओ, फिर मेरे लिए एक बहुत ऊँची इमारत खड़ी करो, ताकि मैं उस पर चढ़कर मूसा के उस इलाह (पूज्य) को देख सकूँ जिसकी वह बात करता है। मुझे तो पूरा यक़ीन है कि मूसा अपने दावे में झूठा है।"
फ़िरऔन की यह बातें उसकी नादानी, जहालत और अहंकार की चरम सीमा को दिखाती हैं। वह यह भूल गया कि जो ख़ुद मिट्टी से बना है, वह मिट्टी से ईंटें बनाकर आसमान तक कैसे पहुँच सकता है? उसका यह क़दम सिर्फ़ अपनी क़ौम को धोखा देने और उन्हें यह बताने के लिए था कि मूसा का दावा बेबुनियाद है। वह जानता था कि आसमान पर चढ़कर अल्लाह को देखना नामुमकिन है, लेकिन वह अपने लोगों को अपने झूठे रुतबे का यक़ीन दिलाना चाहता था।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के दुश्मन चाहे कितनी भी ऊँची इमारतें बना लें, चाहे कितना भी दिखावा कर लें, उनकी सारी कोशिशें बेकार हैं। अल्लाह की क़ुदरत के आगे उनकी तमाम तदबीरें नाकाम रहती हैं। फ़िरऔन ने जो ऊँची इमारत बनवाई, वह उसे अल्लाह के करीब नहीं ले जा सकी, बल्कि उसकी सारी साज़िशें उसी के ख़िलाफ़ गवाह बन गईं। यह हर उस इंसान के लिए सबक़ है जो अल्लाह की नाफ़रमानी में अपनी ताक़त और सामान पर इतराता है। अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता है कि फ़िरऔन और उसके लश्करों को हमने पकड़ लिया और उन्हें समंदर में डुबो दिया। तो देखो, ज़ालिमों का अंजाम कैसा बुरा हुआ!
हमें इससे यह सबक़ लेना चाहिए कि सच्चाई और ईमान ही सबसे बड़ी ताक़त है। चाहे दुनिया की तमाम ताक़तें और साज़िशें इकट्ठी हो जाएँ, अल्लाह की मदद सच्चे मोमिनों के साथ होती है। मूसा अलैहिस्सलाम अकेले थे, लेकिन उनके साथ अल्लाह की ताक़त थी, जिसने फ़िरऔन की पूरी सल्तनत को तबाह कर दिया। इसलिए हमें भी हर हाल में सच्चाई पर क़ायम रहना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे बड़ा मददगार है।
📜 आयत 36-40 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 38
सूरा अल-क़सस आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ये सुनकर) फिरऔन ने कहा ऐ मेरे दरबार के…सूरा आयत 38/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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