Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَاسْتَكْبَرَ: अत्यधिक घमंड किया, अहंकार किया
- بِغَيْرِ الْحَقِّ: बिना किसी उचित आधार के, नाहक
- وَظَنُّوا: उन्होंने समझा, उन्हें विश्वास था
- لَا يُرْجَعُونَ: वे लौटाए नहीं जाएँगे (दोबारा जीवित नहीं किए जाएँगे)
तफ़सीर:
फ़िरऔन और उसके सैनिकों ने धरती पर अत्यधिक घमंड और अहंकार का परिचय दिया। उन्होंने मिस्र की धरती पर बिना किसी उचित आधार के अपनी बड़ाई जताई और हक़ को नकार दिया। उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) की दावत को स्वीकार करने से इनकार किया और अपने आप को सबसे श्रेष्ठ समझा। उनका घमंड इतना बढ़ गया था कि उन्होंने अल्लाह की निशानियों को देखने के बावजूद उन्हें झुठलाया और सच्चाई के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
सबसे बड़ी भूल यह थी कि उन्होंने यह समझ लिया कि उन्हें अल्लाह की ओर लौटकर नहीं जाना है। उन्होंने आख़िरत और हिसाब-किताब को भुला दिया। उन्हें यक़ीन था कि मरने के बाद कोई जीवन नहीं है, कोई पुनरुत्थान नहीं है, और न ही उन्हें अपने कर्मों का हिसाब देना होगा। यही सोच उनके घमंड और अत्याचार की जड़ बनी।
यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है। घमंड और अहंकार इंसान को अंधा बना देता है। जब इंसान यह भूल जाता है कि उसे एक दिन अल्लाह के सामने हाज़िर होना है और अपने हर कर्म का हिसाब देना है, तो वह सीमाएँ तोड़ देता है। वह हक़ को नकारता है, नबियों को झुठलाता है और ज़ुल्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ता।
लेकिन अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसके सैनिकों का अंजाम बहुत भयानक बनाया — उन्हें समुद्र में डुबोकर हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया। यह इस बात का सबूत है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। चाहे इंसान कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अल्लाह की कुदरत के आगे उसकी कोई हक़ीक़त नहीं।
हमें इस आयत से यह सीखना चाहिए कि हम कभी घमंड न करें, चाहे हमारे पास कितनी भी दौलत, ताकत या इल्म क्यों न हो। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हम अल्लाह के बंदे हैं और एक दिन उसी की ओर लौटकर जाना है। यह याद हमें सीधे रास्ते पर चलने में मदद करती है और हमें ज़ुल्म, अत्याचार और सरकशी से बचाती है। अल्लाह तआला हमें घमंड से बचाए और हमें अपनी इबादत में झुकने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 37-41 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 39
सूरा अल-क़सस आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और फिरऔन और उसके लश्कर ने रुए ज़मीन में नाहक़…सूरा आयत 39/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
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Saturday, October 3, 2026
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