अल-क़सस · 39/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
وَاسْتَكْبَرَ هُوَ وَجُنُودُهُ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَظَنُّوا أَنَّهُمْ إِلَيْنَا لَا يُرْجَعُونَ ۝٣٩
Wastakbara huwa wa junooduhoo fil ardi bighairil haqqi wa zannooo annahum ilainaa laa yurja`oon
📖 हिंदी अर्थ
और फिरऔन और उसके लश्कर ने रुए ज़मीन में नाहक़ सर उठाया था और उन लोगों ने समझ लिया था कि हमारी बारगाह मे वह कभी पलट कर नही आएँगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَاسْتَكْبَرَ: अत्यधिक घमंड किया, अहंकार किया
  • بِغَيْرِ الْحَقِّ: बिना किसी उचित आधार के, नाहक
  • وَظَنُّوا: उन्होंने समझा, उन्हें विश्वास था
  • لَا يُرْجَعُونَ: वे लौटाए नहीं जाएँगे (दोबारा जीवित नहीं किए जाएँगे)

तफ़सीर:

फ़िरऔन और उसके सैनिकों ने धरती पर अत्यधिक घमंड और अहंकार का परिचय दिया। उन्होंने मिस्र की धरती पर बिना किसी उचित आधार के अपनी बड़ाई जताई और हक़ को नकार दिया। उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) की दावत को स्वीकार करने से इनकार किया और अपने आप को सबसे श्रेष्ठ समझा। उनका घमंड इतना बढ़ गया था कि उन्होंने अल्लाह की निशानियों को देखने के बावजूद उन्हें झुठलाया और सच्चाई के आगे झुकने से इनकार कर दिया।

सबसे बड़ी भूल यह थी कि उन्होंने यह समझ लिया कि उन्हें अल्लाह की ओर लौटकर नहीं जाना है। उन्होंने आख़िरत और हिसाब-किताब को भुला दिया। उन्हें यक़ीन था कि मरने के बाद कोई जीवन नहीं है, कोई पुनरुत्थान नहीं है, और न ही उन्हें अपने कर्मों का हिसाब देना होगा। यही सोच उनके घमंड और अत्याचार की जड़ बनी।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है। घमंड और अहंकार इंसान को अंधा बना देता है। जब इंसान यह भूल जाता है कि उसे एक दिन अल्लाह के सामने हाज़िर होना है और अपने हर कर्म का हिसाब देना है, तो वह सीमाएँ तोड़ देता है। वह हक़ को नकारता है, नबियों को झुठलाता है और ज़ुल्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ता।

लेकिन अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसके सैनिकों का अंजाम बहुत भयानक बनाया — उन्हें समुद्र में डुबोकर हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया। यह इस बात का सबूत है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। चाहे इंसान कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अल्लाह की कुदरत के आगे उसकी कोई हक़ीक़त नहीं।

हमें इस आयत से यह सीखना चाहिए कि हम कभी घमंड न करें, चाहे हमारे पास कितनी भी दौलत, ताकत या इल्म क्यों न हो। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हम अल्लाह के बंदे हैं और एक दिन उसी की ओर लौटकर जाना है। यह याद हमें सीधे रास्ते पर चलने में मदद करती है और हमें ज़ुल्म, अत्याचार और सरकशी से बचाती है। अल्लाह तआला हमें घमंड से बचाए और हमें अपनी इबादत में झुकने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — अल-क़सस

37وَقَالَ مُوسَىٰ رَبِّي أَعْلَمُ بِمَن جَاءَ بِالْهُدَىٰ مِنْ عِندِهِ وَمَن تَكُونُ لَهُ عَاقِبَةُ الدَّارِ ۖ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ
और मूसा ने कहा मेरा परवरदिगार उस शख्स से ख़ूब वाक़िफ़ है जो उसकी बारगाह से हिदायत लेकर आया है और उस शख्स से भी जिसके लिए आख़िरत का घर है इसमें तो शक ही नहीं कि ज़ालिम लोग कामयाब नहीं होते
38وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ مَا عَلِمْتُ لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرِي فَأَوْقِدْ لِي يَا هَامَانُ عَلَى الطِّينِ فَاجْعَل لِّي صَرْحًا لَّعَلِّي أَطَّلِعُ إِلَىٰ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُ مِنَ الْكَاذِبِينَ
और (ये सुनकर) फिरऔन ने कहा ऐ मेरे दरबार के सरदारों मुझ को तो अपने सिवा तुम्हारा कोई परवरदिगार मालूम नही होता (और मूसा दूसरे को ख़ुदा बताता है) तो ऐ हामान (वज़ीर फिरऔन) तुम मेरे वास्ते मिट्टी (की ईटों) का पजावा सुलगाओ फिर मेरे वास्ते एक पुख्ता महल तैयार कराओ ताकि मै (उस पर चढ़ कर) मूसा के ख़ुदा को देंखू और मै तो यक़ीनन मूसा को झूठा समझता हूँ
39وَاسْتَكْبَرَ هُوَ وَجُنُودُهُ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَظَنُّوا أَنَّهُمْ إِلَيْنَا لَا يُرْجَعُونَ
और फिरऔन और उसके लश्कर ने रुए ज़मीन में नाहक़ सर उठाया था और उन लोगों ने समझ लिया था कि हमारी बारगाह मे वह कभी पलट कर नही आएँगे
40فَأَخَذْنَاهُ وَجُنُودَهُ فَنَبَذْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ
तो हमने उसको और उसके लश्कर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में डाल दिया तो (ऐ रसूल) ज़रा देखों तो कि ज़ालिमों का कैसा बुरा अन्जाम हुआ
41وَجَعَلْنَاهُمْ أَئِمَّةً يَدْعُونَ إِلَى النَّارِ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ لَا يُنصَرُونَ
और हमने उनको (गुमराहों का) पेशवा बनाया कि (लोगों को) जहन्नुम की तरफ बुलाते है और क़यामत के दिन (ऐसे बेकस होगें कि) उनको किसी तरह की मदद न दी जाएगी
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अनुवाद — अल-क़सस 39

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Tuesday, August 18, 2026

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