Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को जवाब देते हुए कहा: मेरा रब उस व्यक्ति को सबसे अच्छी तरह जानता है जो उसके पास से सीधा मार्ग (हिदायत) लेकर आया है, और वह उसे भी जानता है जिसके लिए आख़िरत का अच्छा अंजाम है। बेशक, ज़ालिम (अत्याचारी और काफ़िर) लोग कभी सफल नहीं होते।
शब्दों के अर्थ:
- الْهُدَى: सीधा मार्ग, हिदायत, वह सत्य जो अल्लाह की ओर से आए।
- عَاقِبَةُ الدَّارِ: आख़िरत का अच्छा परिणाम, यानी जन्नत और अल्लाह की खुशी।
- لَا يُفْلِحُ: सफल नहीं होते, कामयाबी नहीं पाते।
- الظَّالِمُونَ: वे लोग जो अल्लाह पर झूठ बाँधते हैं, उसकी आयतों को झुठलाते हैं और हक़ को छिपाते हैं।
विस्तृत तफ़सीर:
जब फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को धमकी दी और उन पर जादूगर होने का आरोप लगाया, तो मूसा (अलैहिस्सलाम) ने बड़े ही सधे हुए अंदाज़ में उसे जवाब दिया। उन्होंने कहा: "मेरा रब उस व्यक्ति को खूब जानता है जो उसके पास से हिदायत लेकर आया है।" यानी सच्चाई का फ़ैसला अल्लाह के पास है, न कि आपकी ज़बरदस्ती या धमकियों से होगा। अल्लाह जानता है कि मैं सच्चा हूँ और अपने रब की तरफ़ से भेजा गया हूँ, और वह यह भी जानता है कि आप झूठे और ज़ालिम हैं।
फिर मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा: "और वह जानता है कि किसके लिए आख़िरत का अच्छा अंजाम है।" यानी असली कामयाबी दुनिया के ऐशो-आराम या ताक़त से नहीं, बल्कि आख़िरत की भलाई से है। जिसे अल्लाह की तरफ़ से जन्नत और उसकी रज़ा मिले, वही सच्चा कामयाब है। फ़िरऔन की सल्तनत, सेना और ऐशो-आराम की ज़िंदगी उसे आख़िरत के अज़ाब से नहीं बचा सकती।
आख़िर में मूसा (अलैहिस्सलाम) ने एक अटल सत्य बयान किया: "बेशक, ज़ालिम लोग सफल नहीं होते।" यह एक सार्वभौमिक सत्य है जो हर ज़माने पर लागू होता है। जो लोग अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं, उसके रसूलों का विरोध करते हैं और ज़मीन पर ज़ुल्म फैलाते हैं, उनका अंजाम हमेशा बुरा होता है। चाहे वे दुनिया में कितनी ही देर तक रहें, आख़िरकार उन्हें अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकते।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को कभी डरना नहीं चाहिए, चाहे सामने कितनी भी बड़ी ताक़त क्यों न हो। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अकेले फ़िरऔन के सामने सच बोलने में कोई संकोच नहीं किया, क्योंकि उन्हें यक़ीन था कि अल्लाह ही असली फ़ैसला करने वाला है। हमें भी चाहिए कि हम अपने जीवन में सच्चाई और नेकी के रास्ते पर चलें, और यह विश्वास रखें कि अल्लाह हमारे साथ है। जो लोग ज़ुल्म करते हैं, वे चाहे दुनिया में कुछ भी हासिल कर लें, आख़िरत में उनका ठिकाना जहन्नम है। और जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, उनके लिए जन्नत और अल्लाह की रज़ा है — यही सबसे बड़ी सफलता है।
📜 आयत 35-39 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 37
सूरा अल-क़सस आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मूसा ने कहा मेरा परवरदिगार उस शख्स से ख़ूब…सूरा आयत 37/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
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Saturday, October 3, 2026
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