अल-क़सस · 37/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़सस
وَقَالَ مُوسَىٰ رَبِّي أَعْلَمُ بِمَن جَاءَ بِالْهُدَىٰ مِنْ عِندِهِ وَمَن تَكُونُ لَهُ عَاقِبَةُ الدَّارِ ۖ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ ۝٣٧
Wa qaala Moosaa Rabbeee a`alamu biman jaaa`a bilhudaa min `indihee wa man takoonu lahoo `aaqibatud daari innahoo laa yuflihuz zaalimoon
📖 हिंदी अर्थ
और मूसा ने कहा मेरा परवरदिगार उस शख्स से ख़ूब वाक़िफ़ है जो उसकी बारगाह से हिदायत लेकर आया है और उस शख्स से भी जिसके लिए आख़िरत का घर है इसमें तो शक ही नहीं कि ज़ालिम लोग कामयाब नहीं होते

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अनुवाद — Tafsir

मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन को जवाब देते हुए कहा: मेरा रब उस व्यक्ति को सबसे अच्छी तरह जानता है जो उसके पास से सीधा मार्ग (हिदायत) लेकर आया है, और वह उसे भी जानता है जिसके लिए आख़िरत का अच्छा अंजाम है। बेशक, ज़ालिम (अत्याचारी और काफ़िर) लोग कभी सफल नहीं होते।

शब्दों के अर्थ:

  • الْهُدَى: सीधा मार्ग, हिदायत, वह सत्य जो अल्लाह की ओर से आए।
  • عَاقِبَةُ الدَّارِ: आख़िरत का अच्छा परिणाम, यानी जन्नत और अल्लाह की खुशी।
  • لَا يُفْلِحُ: सफल नहीं होते, कामयाबी नहीं पाते।
  • الظَّالِمُونَ: वे लोग जो अल्लाह पर झूठ बाँधते हैं, उसकी आयतों को झुठलाते हैं और हक़ को छिपाते हैं।

विस्तृत तफ़सीर:

जब फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को धमकी दी और उन पर जादूगर होने का आरोप लगाया, तो मूसा (अलैहिस्सलाम) ने बड़े ही सधे हुए अंदाज़ में उसे जवाब दिया। उन्होंने कहा: "मेरा रब उस व्यक्ति को खूब जानता है जो उसके पास से हिदायत लेकर आया है।" यानी सच्चाई का फ़ैसला अल्लाह के पास है, न कि आपकी ज़बरदस्ती या धमकियों से होगा। अल्लाह जानता है कि मैं सच्चा हूँ और अपने रब की तरफ़ से भेजा गया हूँ, और वह यह भी जानता है कि आप झूठे और ज़ालिम हैं।

फिर मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा: "और वह जानता है कि किसके लिए आख़िरत का अच्छा अंजाम है।" यानी असली कामयाबी दुनिया के ऐशो-आराम या ताक़त से नहीं, बल्कि आख़िरत की भलाई से है। जिसे अल्लाह की तरफ़ से जन्नत और उसकी रज़ा मिले, वही सच्चा कामयाब है। फ़िरऔन की सल्तनत, सेना और ऐशो-आराम की ज़िंदगी उसे आख़िरत के अज़ाब से नहीं बचा सकती।

आख़िर में मूसा (अलैहिस्सलाम) ने एक अटल सत्य बयान किया: "बेशक, ज़ालिम लोग सफल नहीं होते।" यह एक सार्वभौमिक सत्य है जो हर ज़माने पर लागू होता है। जो लोग अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं, उसके रसूलों का विरोध करते हैं और ज़मीन पर ज़ुल्म फैलाते हैं, उनका अंजाम हमेशा बुरा होता है। चाहे वे दुनिया में कितनी ही देर तक रहें, आख़िरकार उन्हें अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकते।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों को कभी डरना नहीं चाहिए, चाहे सामने कितनी भी बड़ी ताक़त क्यों न हो। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अकेले फ़िरऔन के सामने सच बोलने में कोई संकोच नहीं किया, क्योंकि उन्हें यक़ीन था कि अल्लाह ही असली फ़ैसला करने वाला है। हमें भी चाहिए कि हम अपने जीवन में सच्चाई और नेकी के रास्ते पर चलें, और यह विश्वास रखें कि अल्लाह हमारे साथ है। जो लोग ज़ुल्म करते हैं, वे चाहे दुनिया में कुछ भी हासिल कर लें, आख़िरत में उनका ठिकाना जहन्नम है। और जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, उनके लिए जन्नत और अल्लाह की रज़ा है — यही सबसे बड़ी सफलता है।



📜 आयत 35-39 — सूरा अल-क़सस

35قَالَ سَنَشُدُّ عَضُدَكَ بِأَخِيكَ وَنَجْعَلُ لَكُمَا سُلْطَانًا فَلَا يَصِلُونَ إِلَيْكُمَا ۚ بِآيَاتِنَا أَنتُمَا وَمَنِ اتَّبَعَكُمَا الْغَالِبُونَ
फ़रमाया अच्छा हम अनक़रीब तुम्हारे भाई की वजह से तुम्हारे बाज़ू क़वी कर देगें और तुम दोनों को ऐसा ग़लबा अता करेंगें कि फिरऔनी लोग तुम दोनों तक हमारे मौजिज़े की वजह से पहुँच भी न सकेंगे लो जाओ तुम दोनो और तुम्हारे पैरवी करने वाले गालिब रहेंगे
36فَلَمَّا جَاءَهُم مُّوسَىٰ بِآيَاتِنَا بَيِّنَاتٍ قَالُوا مَا هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّفْتَرًى وَمَا سَمِعْنَا بِهَٰذَا فِي آبَائِنَا الْأَوَّلِينَ
ग़रज़ जब मूसा हमारे वाजेए व रौशन मौजिज़े लेकर उनके पास आए तो वह लोग कहने लगे कि ये तो बस अपने दिल का गढ़ा हुआ जादू है और हमने तो अपने अगले बाप दादाओं (के ज़माने) में ऐसी बात सुनी भी नहीें
37وَقَالَ مُوسَىٰ رَبِّي أَعْلَمُ بِمَن جَاءَ بِالْهُدَىٰ مِنْ عِندِهِ وَمَن تَكُونُ لَهُ عَاقِبَةُ الدَّارِ ۖ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ
और मूसा ने कहा मेरा परवरदिगार उस शख्स से ख़ूब वाक़िफ़ है जो उसकी बारगाह से हिदायत लेकर आया है और उस शख्स से भी जिसके लिए आख़िरत का घर है इसमें तो शक ही नहीं कि ज़ालिम लोग कामयाब नहीं होते
38وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ مَا عَلِمْتُ لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرِي فَأَوْقِدْ لِي يَا هَامَانُ عَلَى الطِّينِ فَاجْعَل لِّي صَرْحًا لَّعَلِّي أَطَّلِعُ إِلَىٰ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُ مِنَ الْكَاذِبِينَ
और (ये सुनकर) फिरऔन ने कहा ऐ मेरे दरबार के सरदारों मुझ को तो अपने सिवा तुम्हारा कोई परवरदिगार मालूम नही होता (और मूसा दूसरे को ख़ुदा बताता है) तो ऐ हामान (वज़ीर फिरऔन) तुम मेरे वास्ते मिट्टी (की ईटों) का पजावा सुलगाओ फिर मेरे वास्ते एक पुख्ता महल तैयार कराओ ताकि मै (उस पर चढ़ कर) मूसा के ख़ुदा को देंखू और मै तो यक़ीनन मूसा को झूठा समझता हूँ
39وَاسْتَكْبَرَ هُوَ وَجُنُودُهُ فِي الْأَرْضِ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَظَنُّوا أَنَّهُمْ إِلَيْنَا لَا يُرْجَعُونَ
और फिरऔन और उसके लश्कर ने रुए ज़मीन में नाहक़ सर उठाया था और उन लोगों ने समझ लिया था कि हमारी बारगाह मे वह कभी पलट कर नही आएँगे
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अनुवाद — अल-क़सस 37

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Saturday, October 3, 2026

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