Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَابَ: तौबा की, अपने कुफ़्र और गुनाहों से लौट आया।
- آمَنَ: ईमान लाया, अल्लाह और उसके रसूल पर विश्वास किया।
- عَمِلَ صَالِحًا: नेक और अच्छे काम किए, जो अल्लाह और उसके रसूल को पसंद हैं।
- الْمُفْلِحِينَ: कामयाब लोग, जिन्हें दुनिया और आख़िरत में सफलता मिली।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों के बारे में बता रहे हैं जो पहले शिर्क और कुफ़्र में डूबे हुए थे, लेकिन फिर उन्होंने तौबा कर ली। यहाँ तौबा का मतलब सिर्फ ज़ुबान से "माफ़ी माँग ली" नहीं है, बल्कि दिल से कुफ़्र और शिर्क को छोड़कर अल्लाह की तरफ पूरी तरह लौट आना है। फिर उन्होंने सच्चा ईमान लाया—अल्लाह की वहदानियत (एकता) पर, उसके रसूलों पर, और उसकी सारी शिक्षाओं पर। और फिर उन्होंने अपने ईमान को सिर्फ दिल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अमल में बदल दिया—नेक काम किए, अल्लाह के हुक्मों पर चले और उसकी मनाही से बचे।
अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे लोग "عَسَى" (उम्मीद है) कि कामयाब लोगों में से होंगे। यहाँ "عَسَى" का लफ़्ज़ अल्लाह की तरफ से है, और जब अल्लाह किसी के लिए उम्मीद ज़ाहिर करे, तो यह उसकी तरफ से वादा बन जाता है—यानी यह कामयाबी पक्की है। यह कामयाबी दो जहान की है: दुनिया में इज़्ज़त, सुकून और रहमत, और आख़िरत में जन्नत और अल्लाह की रज़ा।
यह आयत अल्लाह की रहमत का सबसे बड़ा पैग़ाम है। यह हमें सिखाती है कि इंसान चाहे कितना भी गुनाहगार हो, चाहे उसने कितने ही बड़े कुफ़्र और शिर्क के काम किए हों, अल्लाह का दरवाज़ा तौबा के लिए हमेशा खुला है। जैसे ही वह सच्चे दिल से लौटता है, अल्लाह उसे अपनी रहमत से भर देता है और उसके सारे गुनाह माफ़ कर देता है। यही तो इस्लाम की खूबसूरती है—निराशा की कोई गुंजाइश नहीं, उम्मीद का दामन हमेशा थामा जा सकता है।
इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि हम कभी भी अल्लाह की रहमत से मायूस न हों। चाहे हमसे कितनी भी गलतियाँ हुई हों, अल्लाह तौबा करने वालों से बेहद प्यार करता है। आओ, हम सब अपने गुनाहों से तौबा करें, अपने ईमान को मज़बूत करें, और अपने अमल को सुधारें—ताकि हम भी उन कामयाब लोगों में शामिल हो सकें जिन्हें अल्लाह की जन्नत और उसकी रज़ा नसीब होगी। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 65-69 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 67
सूरा अल-क़सस आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर हाँ जिस शख्स ने तौबा कर ली और ईमान…सूरा आयत 67/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


