अल-क़सस · 68/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
وَرَبُّكَ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ وَيَخْتَارُ ۗ مَا كَانَ لَهُمُ الْخِيَرَةُ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ ۝٦٨
Wa Rabbuka yakhuluqu maa yashaaa`u wa yakhtaar; maa kaana lahumul khiyarah; Subhannal laahi wa Ta`aalaa `ammmaa yushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हारा परवरदिगार जो चाहता है पैदा करता है और (जिसे चाहता है) मुन्तख़िब करता है और ये इन्तिख़ाब लोगों के एख्तियार में नहीं है और जिस चीज़ को ये लोग ख़ुदा का शरीक बनाते हैं उससे ख़ुदा पाक और (कहीं) बरतर है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ: जो चाहता है पैदा करता है।
  • وَيَخْتَارُ: और चुनता है (जिसे चाहता है अपनी विशेष रहमत और नुबुव्वत के लिए चुन लेता है)।
  • الْخِيَرَةُ: चुनाव का अधिकार, इख्तियार।
  • سُبْحَانَ اللَّهِ: अल्लाह पाक है (हर कमी और ऐब से)।
  • تَعَالَىٰ: वह बुलंद और बरतर है।
  • يُشْرِكُونَ: वे (मुशरिकीन) अल्लाह के साथ शिर्क करते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपका रब जो चाहता है पैदा करता है, और जिसे चाहता है चुन लेता है। यह चुनाव उसकी अपनी मर्ज़ी और हिकमत से होता है, किसी के दबाव या सिफारिश से नहीं। जब मुशरिकीन ने यह कहा था कि "यह क़ुरआन मक्का या ताइफ़ के किसी बड़े आदमी पर क्यों नहीं उतारा गया?" तो अल्लाह ने उन्हें जवाब दिया कि नुबुव्वत और रिसालत का चुनाव पूरी तरह अल्लाह के इख्तियार में है। वह जिसे चाहता है अपने पैग़ाम के लिए चुन लेता है। किसी बंदे को यह हक़ नहीं कि वह अल्लाह की तदबीर में दखल दे या उस पर एतराज़ करे। अल्लाह ने अपनी हिकमत से मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को चुना, क्योंकि वह इसके सबसे ज़्यादा लायक़ थे।

फिर अल्लाह ने अपनी पाकी बयान की: "सुब्हानल्लाह" यानी अल्लाह हर उस चीज़ से पाक है जो उसके शान के खिलाफ़ है। वह उन सब चीज़ों से बुलंद और बरतर है जिन्हें लोग उसका शरीक बनाते हैं। यह एक तनज़ीह (पाकी की घोषणा) है कि अल्लाह उन सब झूठे माबूदों से पाक है जिन्हें मुशरिकीन उसके साथ जोड़ते हैं।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि हमें अपने जीवन के हर मामले में अल्लाह के फैसले पर राज़ी रहना चाहिए। जब अल्लाह किसी को चुनता है, तो उसकी चुनाव में ही भलाई होती है। हमें अपनी अक़्ल को अल्लाह के हुक्म से ऊपर नहीं रखना चाहिए। यही ईमान की असली रूह है कि बंदा अल्लाह के हर फैसले को सिर झुकाकर क़बूल करे। जो लोग अल्लाह के चुनाव पर एतराज़ करते हैं, वह दरअसल अपनी जाहिली की वजह से अल्लाह की हिकमत को समझ नहीं पाते। अल्लाह की रहमत और हिकमत पर भरोसा रखने वालों के लिए ही दुनिया और आख़िरत की भलाई है।

🎧 सुनें

📜 आयत 66-70 — अल-क़सस

66فَعَمِيَتْ عَلَيْهِمُ الْأَنبَاءُ يَوْمَئِذٍ فَهُمْ لَا يَتَسَاءَلُونَ
तब उस दिन उन्हें बातें न सूझ पडेग़ी (और) फिर बाहम एक दूसरे से पूछ भी न सकेगें
67فَأَمَّا مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَعَسَىٰ أَن يَكُونَ مِنَ الْمُفْلِحِينَ
मगर हाँ जिस शख्स ने तौबा कर ली और ईमान लाया और अच्छे अच्छे काम किए तो क़रीब है कि ये लोग अपनी मुरादें पाने वालों से होंगे
68وَرَبُّكَ يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ وَيَخْتَارُ ۗ مَا كَانَ لَهُمُ الْخِيَرَةُ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
और तुम्हारा परवरदिगार जो चाहता है पैदा करता है और (जिसे चाहता है) मुन्तख़िब करता है और ये इन्तिख़ाब लोगों के एख्तियार में नहीं है और जिस चीज़ को ये लोग ख़ुदा का शरीक बनाते हैं उससे ख़ुदा पाक और (कहीं) बरतर है
69وَرَبُّكَ يَعْلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمْ وَمَا يُعْلِنُونَ
और (ऐ रसूल) ये लोग जो बातें अपने दिलों में छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं तुम्हारा परवरदिगार खूब जानता है
70وَهُوَ اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ لَهُ الْحَمْدُ فِي الْأُولَىٰ وَالْآخِرَةِ ۖ وَلَهُ الْحُكْمُ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ
और वही ख़ुदा है उसके सिवा कोई क़ाबिले परसतिश नहीं दुनिया और आख़िरत में उस की तारीफ़ है और उसकी हुकूमत है और तुम लोग (मरने के बाद) उसकी तरफ लौटाए जाओगे
अल-क़ससकुरान सूची
88आयत
मक्कीRevelation
68आयत

अनुवाद — अल-क़सस 68

सूरा अल-क़सस आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारा परवरदिगार जो चाहता है पैदा करता है और…

सूरा आयत 68/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए