अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُوتِيتُهُ – मुझे यह (धन) दिया गया।
- عَلَى عِلْمٍ – ज्ञान के आधार पर।
- الْقُرُونِ – पिछली उम्मतें (समुदाय)।
- أَشَدُّ مِنْهُ قُوَّةً – उससे अधिक शक्तिशाली।
- أَكْثَرُ جَمْعًا – धन और साधनों में अधिक संपन्न।
- لَا يُسْأَلُ عَن ذُنُوبِهِمُ الْمُجْرِمُونَ – अपराधियों से उनके गुनाहों के बारे में (सामान्य प्रश्न) नहीं पूछा जाएगा।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब क़ारून के अपने लोगों ने उसे नसीहत की कि वह अपने धन पर इतना घमंड न करे और अल्लाह का शुक्र अदा करे, तो उसने घमंड और अहंकार के साथ जवाब दिया: "यह धन मुझे मेरे अपने ज्ञान और योग्यता के कारण मिला है। मैं इसे अपनी समझ, अपनी काबिलियत और अपने हुनर से कमाया हूँ, इसलिए यह मेरा हक़ है।" उसका यह कहना पूरी तरह ग़लत और अहंकार से भरा था, क्योंकि असल में सारा धन और ताकत अल्लाह ही की ओर से है, और वही जिसे चाहता है, देता है और जिससे चाहता है, छीन लेता है।
अल्लाह तआला ने उसकी इस बात का जवाब देते हुए फ़रमाया: "क्या उसने यह नहीं जाना कि अल्लाह ने उससे पहले बहुत सी उम्मतों को हलाक (नष्ट) कर दिया, जो उससे कहीं अधिक ताकतवर थीं और धन-दौलत में उससे कहीं ज़्यादा संपन्न थीं?" यानी क़ारून से पहले फ़िरऔन, आद, समूद और दूसरी कई क़ौमें गुज़र चुकी थीं, जिनके पास उससे कहीं ज़्यादा ताकत, फ़ौजें, महल और खज़ाने थे। लेकिन जब उन्होंने अल्लाह की नाफ़रमानी की और घमंड किया, तो अल्लाह ने उन्हें ऐसा तबाह किया कि कोई निशान भी बाक़ी न रहा। उनकी ताकत और दौलत उनके किसी काम न आई।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और अपराधियों से उनके गुनाहों के बारे में पूछा नहीं जाएगा।" यानी क़यामत के दिन जब अपराधी अपने गुनाहों के साथ हाज़िर होंगे, तो अल्लाह उनसे पूछताछ नहीं करेगा, क्योंकि उसे उनके सारे कर्मों का पूरा इल्म है। वह उन्हें बिना किसी पूछ-ताछ के जहन्नम में डाल देगा। हाँ, कुछ लोगों से पूछताछ होगी, लेकिन वह भी डाँट-फटकार और तौबीख़ (फटकार) के रूप में होगी, न कि जानकारी हासिल करने के लिए, क्योंकि अल्लाह को सब कुछ पहले से मालूम है।
दावती पहलू (नसीहत):
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी सीख है। यह हमें सिखाती है कि धन, ताकत, ज्ञान और हैसियत — ये सब अल्लाह की देन हैं, हमारी अपनी कमाई नहीं। जब अल्लाह किसी को ये नेअमतें देता है, तो उसे चाहिए कि वह घमंड न करे, बल्कि शुक्र अदा करे और इन नेअमतों को अल्लाह की राह में खर्च करे। क़ारून का अंजाम देखिए — उसका धन, उसकी ताकत और उसका ज्ञान — कुछ भी उसके काम न आया, और वह धरती में धँस गया। यह हर उस इंसान के लिए चेतावनी है जो अपनी दौलत या इल्म पर इतराता है और अल्लाह को भूल जाता है। याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह घमंडियों को कभी पसंद नहीं करता। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह के सामने झुकना चाहिए, उसका शुक्र अदा करना चाहिए, और अपनी हर नेअमत को उसकी राह में खर्च करके अपनी आख़िरत को संवारना चाहिए।
📜 आयत 76-80 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 78
सूरा अल-क़सस आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क़ारुन कहने लगा कि ये (माल व दौलत) तो…सूरा आयत 78/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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