अल-क़सस · 79/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِ فِي زِينَتِهِ ۖ قَالَ الَّذِينَ يُرِيدُونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا يَا لَيْتَ لَنَا مِثْلَ مَا أُوتِيَ قَارُونُ إِنَّهُ لَذُو حَظٍّ عَظِيمٍ ۝٧٩
Fakharaja `alaa qawmihee fee zeenatih; qaalal lazeena yureedoonal hayaatad dunyaa yaalaita lanaa misla maaa ootiya Qaaroonu innahoo lazoo hazzin `azeem
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ (एक दिन क़ारुन) अपनी क़ौम के सामने बड़ी आराइश और ठाठ के साथ निकला तो जो लोग दुनिया को (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी के तालिब थे (इस शान से देख कर) कहने लगे जो माल व दौलत क़ारुन को अता हुई है काश मेरे लिए भी होती इसमें शक नहीं कि क़ारुन बड़ा नसीब वर था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ज़ीनत: ठाठ-बाठ, सजावट, वैभव और शान-शौकत।
  • हज़्ज़: भाग्य, हिस्सा, सौभाग्य और दुनियावी लाभ।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब क़ारून को अपने धन और दौलत पर अत्यधिक घमंड हो गया, और उसने अल्लाह के नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) की नसीहत को ठुकरा दिया, तो एक दिन वह अपनी पूरी शान-ओ-शौकत के साथ अपनी क़ौम के सामने निकला। उसने जान-बूझकर यह प्रदर्शन किया ताकि लोग उसकी दौलत और ठाठ-बाठ देखकर उसकी तारीफ करें और उसकी अज़मत को क़बूल करें। उसके साथ उसका पूरा ठाट-बाट था—सोने-चाँदी के ज़ेवर, शानदार कपड़े, ऊँट और घोड़े, और नौकर-चाकर—यह सब कुछ उसने लोगों को दिखाने के लिए इकट्ठा किया था।

जब उसकी क़ौम के वे लोग, जिनके दिल दुनिया की चमक-दमक की तरफ झुके हुए थे और जो आख़िरत को भूल चुके थे, ने यह नज़ारा देखा, तो उनकी आँखें चौंधिया गईं और उनके दिल तरस गए। उन्होंने अफ़सोस और हसरत के साथ कहा: "काश! हमें भी वह कुछ मिलता जो क़ारून को मिला है! बेशक वह बड़े भाग्यशाली और दुनियावी नसीबों वाला है।" उन्होंने यह सोचकर उसकी तारीफ की कि यही सच्ची कामयाबी है, और वे यह भूल गए कि असली कामयाबी तो अल्लाह की रज़ा और आख़िरत की भलाई में है।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक सिखाती है। यह दुनिया की चमक-दमक और दौलत का जुनून इंसान को कितना अंधा कर सकता है, इसका यह एक ज़िंदा सबूत है। क़ारून के पास जो कुछ था, वह अल्लाह की देन थी, लेकिन उसने उसका सही इस्तेमाल नहीं किया और न ही अल्लाह का शुक्र अदा किया। और जिन लोगों ने उसकी दौलत देखकर उसकी तारीफ की, उन्होंने भी सिर्फ दुनिया की चीज़ों को ही असली खुशी समझ लिया।

एक मोमिन के लिए यह ज़रूरी है कि वह दुनिया की चमक-दमक से धोखा न खाए। अल्लाह तआला ने क़ुरआन में जगह-जगह हमें बताया है कि दुनिया की यह ज़िंदगी तो एक अस्थायी ठहराव है, और असली ज़िंदगी आख़िरत की है। जो लोग सिर्फ दुनिया की दौलत और शोहरत को ही सब कुछ समझ लेते हैं, वे उसी तरह धोखे में रहते हैं जैसे उस क़ौम के लोग थे। लेकिन अल्लाह वालों की नज़र में असली कामयाबी अल्लाह की रज़ा, नेक अमल और आख़िरत की कामयाबी है। हमें चाहिए कि हम दुनिया की दौलत को अल्लाह की तरफ से एक ज़िम्मेदारी समझें, उसका सही इस्तेमाल करें, और कभी भी उस पर घमंड न करें। याद रखें, दौलत और शोहरत का घमंड ही क़ारून को तबाही की तरफ ले गया, जबकि अल्लाह ने उसे और उसके घर को ज़मीन में धँसा दिया।



📜 आयत 77-81 — अल-क़सस

77وَابْتَغِ فِيمَا آتَاكَ اللَّهُ الدَّارَ الْآخِرَةَ ۖ وَلَا تَنسَ نَصِيبَكَ مِنَ الدُّنْيَا ۖ وَأَحْسِن كَمَا أَحْسَنَ اللَّهُ إِلَيْكَ ۖ وَلَا تَبْغِ الْفَسَادَ فِي الْأَرْضِ ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ الْمُفْسِدِينَ
और जो कुछ ख़ुदा ने तूझे दे रखा है उसमें आख़िरत के घर की भी जुस्तजू कर और दुनिया से जिस क़दर तेरा हिस्सा है मत भूल जा और जिस तरह ख़ुदा ने तेरे साथ एहसान किया है तू भी औरों के साथ एहसान कर और रुए ज़मीन में फसाद का ख्वाहा न हो-इसमें शक नहीं कि ख़ुदा फ़साद करने वालों को दोस्त नहीं रखता
78قَالَ إِنَّمَا أُوتِيتُهُ عَلَىٰ عِلْمٍ عِندِي ۚ أَوَلَمْ يَعْلَمْ أَنَّ اللَّهَ قَدْ أَهْلَكَ مِن قَبْلِهِ مِنَ الْقُرُونِ مَنْ هُوَ أَشَدُّ مِنْهُ قُوَّةً وَأَكْثَرُ جَمْعًا ۚ وَلَا يُسْأَلُ عَن ذُنُوبِهِمُ الْمُجْرِمُونَ
तो क़ारुन कहने लगा कि ये (माल व दौलत) तो मुझे अपने इल्म (कीमिया) की वजह से हासिल होता है क्या क़ारुन ने ये भी न ख्याल किया कि अल्लाह उसके पहले उन लोगों को हलाक़ कर चुका है जो उससे क़ूवत और हैसियत में कहीं बढ़ बढ़ के थे और गुनाहगारों से (उनकी सज़ा के वक्त) उनके गुनाहों की पूछताछ नहीं हुआ करती
79فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِ فِي زِينَتِهِ ۖ قَالَ الَّذِينَ يُرِيدُونَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا يَا لَيْتَ لَنَا مِثْلَ مَا أُوتِيَ قَارُونُ إِنَّهُ لَذُو حَظٍّ عَظِيمٍ
ग़रज़ (एक दिन क़ारुन) अपनी क़ौम के सामने बड़ी आराइश और ठाठ के साथ निकला तो जो लोग दुनिया को (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी के तालिब थे (इस शान से देख कर) कहने लगे जो माल व दौलत क़ारुन को अता हुई है काश मेरे लिए भी होती इसमें शक नहीं कि क़ारुन बड़ा नसीब वर था
80وَقَالَ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ وَيْلَكُمْ ثَوَابُ اللَّهِ خَيْرٌ لِّمَنْ آمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا وَلَا يُلَقَّاهَا إِلَّا الصَّابِرُونَ
और जिन लोगों को (हमारी बारगाह में) इल्म अता हुआ था कहनें लगे तुम्हारा नास हो जाए (अरे) जो शख्स ईमान लाए और अच्छे काम करे उसके लिए तो ख़ुदा का सवाब इससे कही बेहतर है और वह तो अब सब्र करने वालों के सिवा दूसरे नहीं पा सकते
81فَخَسَفْنَا بِهِ وَبِدَارِهِ الْأَرْضَ فَمَا كَانَ لَهُ مِن فِئَةٍ يَنصُرُونَهُ مِن دُونِ اللَّهِ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُنتَصِرِينَ
और हमने क़ारुन और उसके घर बार को ज़मीन में धंसा दिया फिर ख़ुदा के सिवा कोई जमाअत ऐसी न थी कि उसकी मदद करती और न खुद आप अपनी मदद आप कर सका
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अनुवाद — अल-क़सस 79

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Tuesday, August 18, 2026

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