अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ज़ीनत: ठाठ-बाठ, सजावट, वैभव और शान-शौकत।
- हज़्ज़: भाग्य, हिस्सा, सौभाग्य और दुनियावी लाभ।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब क़ारून को अपने धन और दौलत पर अत्यधिक घमंड हो गया, और उसने अल्लाह के नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) की नसीहत को ठुकरा दिया, तो एक दिन वह अपनी पूरी शान-ओ-शौकत के साथ अपनी क़ौम के सामने निकला। उसने जान-बूझकर यह प्रदर्शन किया ताकि लोग उसकी दौलत और ठाठ-बाठ देखकर उसकी तारीफ करें और उसकी अज़मत को क़बूल करें। उसके साथ उसका पूरा ठाट-बाट था—सोने-चाँदी के ज़ेवर, शानदार कपड़े, ऊँट और घोड़े, और नौकर-चाकर—यह सब कुछ उसने लोगों को दिखाने के लिए इकट्ठा किया था।
जब उसकी क़ौम के वे लोग, जिनके दिल दुनिया की चमक-दमक की तरफ झुके हुए थे और जो आख़िरत को भूल चुके थे, ने यह नज़ारा देखा, तो उनकी आँखें चौंधिया गईं और उनके दिल तरस गए। उन्होंने अफ़सोस और हसरत के साथ कहा: "काश! हमें भी वह कुछ मिलता जो क़ारून को मिला है! बेशक वह बड़े भाग्यशाली और दुनियावी नसीबों वाला है।" उन्होंने यह सोचकर उसकी तारीफ की कि यही सच्ची कामयाबी है, और वे यह भूल गए कि असली कामयाबी तो अल्लाह की रज़ा और आख़िरत की भलाई में है।
यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक सिखाती है। यह दुनिया की चमक-दमक और दौलत का जुनून इंसान को कितना अंधा कर सकता है, इसका यह एक ज़िंदा सबूत है। क़ारून के पास जो कुछ था, वह अल्लाह की देन थी, लेकिन उसने उसका सही इस्तेमाल नहीं किया और न ही अल्लाह का शुक्र अदा किया। और जिन लोगों ने उसकी दौलत देखकर उसकी तारीफ की, उन्होंने भी सिर्फ दुनिया की चीज़ों को ही असली खुशी समझ लिया।
एक मोमिन के लिए यह ज़रूरी है कि वह दुनिया की चमक-दमक से धोखा न खाए। अल्लाह तआला ने क़ुरआन में जगह-जगह हमें बताया है कि दुनिया की यह ज़िंदगी तो एक अस्थायी ठहराव है, और असली ज़िंदगी आख़िरत की है। जो लोग सिर्फ दुनिया की दौलत और शोहरत को ही सब कुछ समझ लेते हैं, वे उसी तरह धोखे में रहते हैं जैसे उस क़ौम के लोग थे। लेकिन अल्लाह वालों की नज़र में असली कामयाबी अल्लाह की रज़ा, नेक अमल और आख़िरत की कामयाबी है। हमें चाहिए कि हम दुनिया की दौलत को अल्लाह की तरफ से एक ज़िम्मेदारी समझें, उसका सही इस्तेमाल करें, और कभी भी उस पर घमंड न करें। याद रखें, दौलत और शोहरत का घमंड ही क़ारून को तबाही की तरफ ले गया, जबकि अल्लाह ने उसे और उसके घर को ज़मीन में धँसा दिया।
📜 आयत 77-81 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 79
सूरा अल-क़सस आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ (एक दिन क़ारुन) अपनी क़ौम के सामने बड़ी आराइश…सूरा आयत 79/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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