Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَابْتَغِ: तलाश करो, चाहो
- آتَاكَ: तुम्हें दिया
- الدَّارَ الْآخِرَةَ: आख़िरत का घर (जन्नत)
- نَصِيبَكَ: तुम्हारा हिस्सा
- الْفَسَادَ: बिगाड़, बुराई
- الْمُفْسِدِينَ: बिगाड़ पैदा करने वाले
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला हज़रत क़ारून को नसीहत करते हुए फ़रमाता है कि ऐ वह शख्स जिसे अल्लाह ने बहुत सारा माल और दौलत दे रखी है! तू उस माल का इस्तेमाल आख़िरत की भलाई हासिल करने के लिए कर। यानी अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च कर, ग़रीबों और मोहताजों की मदद कर, और अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा कर। इस तरह तू दुनिया में रहते हुए भी आख़िरत का सामान कर सकता है।
लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि तू दुनिया को बिल्कुल छोड़ दे। अल्लाह ने तुझे जो हलाल रिज़्क दिया है, उसमें से अपना हिस्सा भी ले — खाना, पीना, पहनना — लेकिन हद से ज़्यादा नहीं, इसराफ़ और दिखावे से बचते हुए। दीन और दुनिया दोनों का ख़याल रखना इस्लाम की खूबसूरत तालीम है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: जिस तरह अल्लाह ने तुझ पर एहसान किया है और तुझे यह दौलत दी है, तू भी लोगों पर एहसान कर। अल्लाह के बंदों के साथ भलाई कर, उनकी मदद कर, उनके साथ नर्मी और मुहब्बत से पेश आ। यही शुक्र का असली तरीका है — जब अल्लाह तुझ पर मेहरबान हुआ, तो तू भी उसकी मख़लूक़ पर मेहरबान हो।
और ज़मीन में फ़साद मत फैलाओ — यानी अल्लाह की नाफ़रमानी मत करो, ज़ुल्म और बुराई से बचो। जो लोग ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं, अल्लाह उनसे मुहब्बत नहीं करता। अल्लाह की नफ़रत और नाराज़गी से बचना चाहिए, क्योंकि जो अल्लाह को प्यारा नहीं, उसका अंजाम बहुत बुरा है।
यह आयत हम सबके लिए एक बेहतरीन नसीहत है — कि दौलत को अपना मालिक न बनने दें, बल्कि उसे आख़िरत की राह में खर्च करके अपनी कामयाबी का ज़रिया बनाएं। इस्लाम हमें सिखाता है कि दुनिया और आख़िरत में संतुलन रखो, लोगों के साथ भलाई करो, और फ़साद से दूर रहो। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत और जन्नत तक पहुंचाता है।
📜 आयत 75-79 — सूरा अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 77
सूरा अल-क़सस आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो कुछ ख़ुदा ने तूझे दे रखा है उसमें…सूरा आयत 77/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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