अल-अंकबूत · 35/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
وَلَقَد تَّرَكْنَا مِنْهَا آيَةً بَيِّنَةً لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ ۝٣٥
Wa laqat taraknaa min haaa aayatam baiyinatal liqawminy ya`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
और हमने यक़ीनी उस (उलटी हुई बस्ती) में से समझदार लोगों के वास्ते (इबरत की) एक वाज़ेए व रौशन निशानी बाक़ी रखी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَرَكْنَا: हमने छोड़ दिया
  • آيَةً بَيِّنَةً: स्पष्ट निशानी (खुला सबूत)
  • يَعْقِلُونَ: समझने-बूझने वाले, अक्लमंद लोग

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फरमाता है कि हमने क़ौमे-लूत (हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम) के उस बस्ती से, जिसे हमने उनके कुकर्मों की वजह से तबाह कर दिया था, एक स्पष्ट और खुली निशानी छोड़ दी। यानी उनके खंडहर, उनके घरों के मलबे और वो तबाही के निशान आज भी मौजूद हैं, ताकि आने वाली नस्लें उन्हें देखकर सबक हासिल करें।

ये निशानियाँ सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए फायदेमंद हैं जो अक्ल से काम लेते हैं, जो देखकर सोचते हैं, और सोचकर सबक लेते हैं। अल्लाह ने ये निशानियाँ इसलिए छोड़ी ताकि लोग समझें कि अल्लाह की नाफरमानी और बदकारी का अंजाम कितना भयानक होता है। जो लोग अक्लमंद हैं, वो इन खंडहरों को देखकर अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं और अपनी ज़िंदगी को सुधार लेते हैं।

ये आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने इतिहास में पिछली उम्मतों के साथ जो कुछ किया, उसे सिर्फ कहानी बनाकर नहीं छोड़ दिया, बल्कि उसके निशानात बाकी रखे ताकि हर दौर के लोग उनसे इबरत हासिल करें। हमें चाहिए कि हम इन निशानियों पर गौर करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढालें।

याद रखिए, अल्लाह तआला की ये निशानियाँ हमारे लिए रहमत हैं, क्योंकि इन्हें देखकर हम गुमराही से बच सकते हैं। जो लोग इनसे आँखें बंद कर लेते हैं, वो खुद अपने नुकसान का सामान करते हैं। अल्लाह हमें अक्लमंद बनाए और उसकी निशानियों से सबक हासिल करने की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 33-37 — सूरा अल-अंकबूत

33وَلَمَّا أَن جَاءَتْ رُسُلُنَا لُوطًا سِيءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا وَقَالُوا لَا تَخَفْ وَلَا تَحْزَنْ ۖ إِنَّا مُنَجُّوكَ وَأَهْلَكَ إِلَّا امْرَأَتَكَ كَانَتْ مِنَ الْغَابِرِينَ
और जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते लूत के पास आए लूत उनके आने से ग़मग़ीन हुए और उन (की मेहमानी) से दिल तंग हुए (क्योंकि वह नौजवान खूबसूरत मर्दों की सरूत में आए थे) फरिश्तों ने कहा आप ख़ौफ न करें और कुढ़े नही हम आपको और आपके लड़के बालों को बचा लेगें मगर आपकी बीबी (क्योंकि वह पीछे रह जाने वालो से होगी)
34إِنَّا مُنزِلُونَ عَلَىٰ أَهْلِ هَٰذِهِ الْقَرْيَةِ رِجْزًا مِّنَ السَّمَاءِ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ
हम यक़ीनन इसी बस्ती के रहने वालों पर चूँकि ये लोग बदकारियाँ करते रहे एक आसमानी अज़ाब नाज़िल करने वाले हैं
35وَلَقَد تَّرَكْنَا مِنْهَا آيَةً بَيِّنَةً لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और हमने यक़ीनी उस (उलटी हुई बस्ती) में से समझदार लोगों के वास्ते (इबरत की) एक वाज़ेए व रौशन निशानी बाक़ी रखी है
36وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَارْجُوا الْيَوْمَ الْآخِرَ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
और (हमने) मदियन के रहने वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बनाकर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो और रोज़े आखेरत की उम्मीद रखो और रुए ज़मीन में फ़साद न फैलाते फिरो
37فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دَارِهِمْ جَاثِمِينَ
तो उन लोगों ने शुऐब को झुठलाया पस ज़लज़ले (भूचाल) ने उन्हें ले डाला- तो वह लोग अपने घरों में औंधे ज़ानू के बल पड़े रह गए
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीअवतरण स्थान
35आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 35

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Thursday, October 1, 2026

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