अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- रिज़्ज़न (رجزًا): अज़ाब, यातना या आसमानी सज़ा।
- यफ़्सुक़ून (يفسقون): अल्लाह की आज्ञा से निकल जाना, गुनाह में डूब जाना, ख़ासतौर पर अश्लील काम (लौटी समुदाय का व्यभिचार) करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने नबी लूत (अलैहिस्सलाम) की ज़ुबान से अपनी क़ौम को आगाह किया था कि वे अपनी बुराइयों से बाज़ आएँ, लेकिन उन्होंने नुस्ख़त (नसीहत) को ठुकरा दिया और अपनी शरारतों पर अड़े रहे। जब हद से गुज़र गए, तो अल्लाह का फ़ैसला आ गया कि इस बस्ती (सदूम) के लोगों पर आसमान से अज़ाब नाज़िल किया जाए। यह अज़ाब सिर्फ़ एक आम सज़ा नहीं थी, बल्कि पत्थरों की बारिश थी जो उनके कुकर्मों की वजह से आई।
यहाँ अल्लाह फ़रमा रहा है: "हम उस बस्ती के रहने वालों पर आसमान से अज़ाब उतारने वाले हैं, क्योंकि वे लगातार गुनाह और बदकारी में मुब्तिला थे।" यानी उनका फ़िस्क़ (गुनाह) इतना बढ़ गया था कि उन्होंने अल्लाह की हर निशानी को झुठला दिया, और अपनी हरकतों से अल्लाह के ग़ज़ब को दावत दे दी। यह अज़ाब उनके लिए उनके किए का नतीजा था, क्योंकि अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि लोग ख़ुद अपने कर्मों से अपनी तबाही बुलाते हैं।
इस आयत में एक बड़ी सीख है कि गुनाह पर अड़े रहना, ख़ासकर अश्लीलता और बेशर्मी जैसे काम, अल्लाह की रहमत को दूर कर देते हैं और उसके अज़ाब को नज़दीक ला देते हैं। जब कोई समाज हया (शर्म) खो देता है और अल्लाह की हदों को तोड़ने में मशगूल हो जाता है, तो उस पर अल्लाह की पकड़ आती है।
लेकिन इसी के साथ यह भी याद रखिए कि अल्लाह बड़ा रहम फ़रमाने वाला है। वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है और अपनी रहमत से नवाज़ता है। जो लोग अपने गुनाहों से बाज़ आ जाएँ, उनके लिए अल्लाह की मग़फ़िरत (क्षमा) हमेशा मौजूद है। यह आयत हमें सचेत करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें, और अगर कभी कोई गुनाह हो जाए, तो फ़ौरन तौबा करें, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बेहद वसीअ (व्यापक) है।
इस क़िस्से से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की नाफ़रमानी पर अड़े रहना इंसान को हलाकत की तरफ़ ले जाता है, जबकि अल्लाह की तरफ़ रुजू करना और उसकी राह पर चलना ही नजात (मुक्ति) का ज़रिया है। हमें चाहिए कि हम अपने अंदर हया और पाकीज़गी पैदा करें, और समाज में भी अच्छाई को रोاج दें, ताकि अल्लाह की रहमत हम पर बरसती रहे और उसका अज़ाब हमसे दूर रहे।
📜 आयत 32-36 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 34
सूरा अल-अंकबूत आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हम यक़ीनन इसी बस्ती के रहने वालों पर चूँकि ये…सूरा आयत 34/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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