अल-अंकबूत · 34/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
إِنَّا مُنزِلُونَ عَلَىٰ أَهْلِ هَٰذِهِ الْقَرْيَةِ رِجْزًا مِّنَ السَّمَاءِ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ ۝٣٤
Innaa munziloona `alaaa ahli haazihil qaryati rijzam minas samaaa`i bimaa kaanoo yafsuqoon
📖 हिंदी अर्थ
हम यक़ीनन इसी बस्ती के रहने वालों पर चूँकि ये लोग बदकारियाँ करते रहे एक आसमानी अज़ाब नाज़िल करने वाले हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रिज़्ज़न (رجزًا): अज़ाब, यातना या आसमानी सज़ा।
  • यफ़्सुक़ून (يفسقون): अल्लाह की आज्ञा से निकल जाना, गुनाह में डूब जाना, ख़ासतौर पर अश्लील काम (लौटी समुदाय का व्यभिचार) करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी लूत (अलैहिस्सलाम) की ज़ुबान से अपनी क़ौम को आगाह किया था कि वे अपनी बुराइयों से बाज़ आएँ, लेकिन उन्होंने नुस्ख़त (नसीहत) को ठुकरा दिया और अपनी शरारतों पर अड़े रहे। जब हद से गुज़र गए, तो अल्लाह का फ़ैसला आ गया कि इस बस्ती (सदूम) के लोगों पर आसमान से अज़ाब नाज़िल किया जाए। यह अज़ाब सिर्फ़ एक आम सज़ा नहीं थी, बल्कि पत्थरों की बारिश थी जो उनके कुकर्मों की वजह से आई।

यहाँ अल्लाह फ़रमा रहा है: "हम उस बस्ती के रहने वालों पर आसमान से अज़ाब उतारने वाले हैं, क्योंकि वे लगातार गुनाह और बदकारी में मुब्तिला थे।" यानी उनका फ़िस्क़ (गुनाह) इतना बढ़ गया था कि उन्होंने अल्लाह की हर निशानी को झुठला दिया, और अपनी हरकतों से अल्लाह के ग़ज़ब को दावत दे दी। यह अज़ाब उनके लिए उनके किए का नतीजा था, क्योंकि अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि लोग ख़ुद अपने कर्मों से अपनी तबाही बुलाते हैं।

इस आयत में एक बड़ी सीख है कि गुनाह पर अड़े रहना, ख़ासकर अश्लीलता और बेशर्मी जैसे काम, अल्लाह की रहमत को दूर कर देते हैं और उसके अज़ाब को नज़दीक ला देते हैं। जब कोई समाज हया (शर्म) खो देता है और अल्लाह की हदों को तोड़ने में मशगूल हो जाता है, तो उस पर अल्लाह की पकड़ आती है।

लेकिन इसी के साथ यह भी याद रखिए कि अल्लाह बड़ा रहम फ़रमाने वाला है। वह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है और अपनी रहमत से नवाज़ता है। जो लोग अपने गुनाहों से बाज़ आ जाएँ, उनके लिए अल्लाह की मग़फ़िरत (क्षमा) हमेशा मौजूद है। यह आयत हमें सचेत करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें, और अगर कभी कोई गुनाह हो जाए, तो फ़ौरन तौबा करें, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बेहद वसीअ (व्यापक) है।

इस क़िस्से से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की नाफ़रमानी पर अड़े रहना इंसान को हलाकत की तरफ़ ले जाता है, जबकि अल्लाह की तरफ़ रुजू करना और उसकी राह पर चलना ही नजात (मुक्ति) का ज़रिया है। हमें चाहिए कि हम अपने अंदर हया और पाकीज़गी पैदा करें, और समाज में भी अच्छाई को रोاج दें, ताकि अल्लाह की रहमत हम पर बरसती रहे और उसका अज़ाब हमसे दूर रहे।

🎧 सुनें

📜 आयत 32-36 — अल-अंकबूत

32قَالَ إِنَّ فِيهَا لُوطًا ۚ قَالُوا نَحْنُ أَعْلَمُ بِمَن فِيهَا ۖ لَنُنَجِّيَنَّهُ وَأَهْلَهُ إِلَّا امْرَأَتَهُ كَانَتْ مِنَ الْغَابِرِينَ
(ये सुन कर) इबराहीम ने कहा कि इस बस्ती में तो लूत भी है वह फरिश्ते बोले जो लोग इस बस्ती में हैं हम लोग उनसे खूब वाक़िफ़ हैं हम तो उनको और उनके लड़के बालों को यक़ीनी बचा लेंगे मगर उनकी बीबी को वह (अलबता) पीछे रह जाने वालों में होगीं
33وَلَمَّا أَن جَاءَتْ رُسُلُنَا لُوطًا سِيءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا وَقَالُوا لَا تَخَفْ وَلَا تَحْزَنْ ۖ إِنَّا مُنَجُّوكَ وَأَهْلَكَ إِلَّا امْرَأَتَكَ كَانَتْ مِنَ الْغَابِرِينَ
और जब हमारे भेजे हुए फरिश्ते लूत के पास आए लूत उनके आने से ग़मग़ीन हुए और उन (की मेहमानी) से दिल तंग हुए (क्योंकि वह नौजवान खूबसूरत मर्दों की सरूत में आए थे) फरिश्तों ने कहा आप ख़ौफ न करें और कुढ़े नही हम आपको और आपके लड़के बालों को बचा लेगें मगर आपकी बीबी (क्योंकि वह पीछे रह जाने वालो से होगी)
34إِنَّا مُنزِلُونَ عَلَىٰ أَهْلِ هَٰذِهِ الْقَرْيَةِ رِجْزًا مِّنَ السَّمَاءِ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ
हम यक़ीनन इसी बस्ती के रहने वालों पर चूँकि ये लोग बदकारियाँ करते रहे एक आसमानी अज़ाब नाज़िल करने वाले हैं
35وَلَقَد تَّرَكْنَا مِنْهَا آيَةً بَيِّنَةً لِّقَوْمٍ يَعْقِلُونَ
और हमने यक़ीनी उस (उलटी हुई बस्ती) में से समझदार लोगों के वास्ते (इबरत की) एक वाज़ेए व रौशन निशानी बाक़ी रखी है
36وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَارْجُوا الْيَوْمَ الْآخِرَ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
और (हमने) मदियन के रहने वालों के पास उनके भाई शुएब को पैग़म्बर बनाकर भेजा उन्होंने (अपनी क़ौम से) कहा ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की इबादत करो और रोज़े आखेरत की उम्मीद रखो और रुए ज़मीन में फ़साद न फैलाते फिरो
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीRevelation
34आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 34

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Tuesday, August 18, 2026

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