अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَنُبَوِّئَنَّهُمْ – हम उन्हें अवश्य बसाएँगे / ठिकाना देंगे।
- غُرَفًا – ऊँचे महल / ऊपरी कक्ष (जन्नत के ऊँचे दर्जे)।
- تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ – जिनके नीचे नदियाँ बहती होंगी।
- خَالِدِينَ – हमेशा रहने वाले (अमर)।
- نِعْمَ أَجْرُ الْعَامِلِينَ – कितना अच्छा बदला है नेक काम करने वालों के लिए।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की खुशखबरी सुना रहा है जो ईमान लाए और उन्होंने अपने ईमान के साथ अच्छे कर्म भी किए। यह सिर्फ़ ज़ुबानी ईमान नहीं है, बल्कि ईमान के साथ अमल-ए-सालिहा (नेक काम) भी शामिल है। अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे लोगों को हम जन्नत के ऊँचे-ऊँचे महलों में जगह देंगे, जो इतने ऊँचे और खूबसूरत होंगे कि उनके नीचे से नदियाँ बहती होंगी। यह महल सिर्फ़ ऊँचाई में नहीं होंगे, बल्कि हर तरह की राहत और खुशी से भरे होंगे।
इन लोगों को इन महलों में हमेशा हमेशा रहना है — कोई मौत नहीं, कोई दर्द नहीं, कोई ग़म नहीं, कोई थकान नहीं। यह वह जगह है जहाँ से वे कभी निकाले नहीं जाएँगे और न ही उन पर कोई बुराई आएगी। अल्लाह ने इसके बाद फ़रमाया: "कितना अच्छा बदला है नेक काम करने वालों के लिए!" यानी जिन लोगों ने दुनिया में अल्लाह की इबादत की, उसके हुक्मों पर चले, और लोगों के साथ भलाई की, उनके लिए यह बदला कितना शानदार है।
यह आयत हमें बताती है कि ईमान और अच्छे कर्म साथ-साथ चलते हैं। सिर्फ़ ईमान का दावा काफ़ी नहीं, बल्कि उस ईमान को अपने अमल से साबित करना ज़रूरी है। और जो लोग इस रास्ते पर चलते हैं, उनके लिए अल्लाह ने ऐसा इनाम तैयार किया है जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सबसे बड़ी खुशखबरी देती है — जन्नत के ऊँचे महल, जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, और वहाँ हमेशा की ज़िंदगी। यह कोई दूर की कल्पना नहीं, बल्कि अल्लाह का सच्चा वादा है। अल्लाह ने यह वादा उन लोगों से किया है जो ईमान लाते हैं और नेक काम करते हैं।
आज हम अपनी ज़िंदगी में देखें — क्या हम सिर्फ़ ईमान का दावा करते हैं या उस पर अमल भी करते हैं? अल्लाह हमें मौका दे रहा है कि हम अपने अमल को सुधारें, अपनी नमाज़, रोज़ा, ज़कात, अच्छे अख़लाक़ और लोगों की मदद को अपनी आदत बनाएँ। यह छोटी-छोटी कोशिशें ही हमें उन ऊँचे महलों तक पहुँचाएँगी।
याद रखिए — जन्नत के महल सस्ते नहीं मिलते, लेकिन अल्लाह की रहमत के आगे हमारे अमल कुछ भी नहीं हैं। अल्लाह अपनी रहमत से हमें वह दर्जा देना चाहता है जो हमारी कल्पना से भी परे है। तो आइए, हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने अमल को सुधारें, ताकि हम उन लोगों में शामिल हों जिनके लिए अल्लाह ने यह शानदार इनाम तैयार किया है। अल्लाह हम सबको इस तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 56-60 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 58
सूरा अल-अंकबूत आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे…सूरा आयत 58/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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