अल-अंकबूत · 58/69
अनुवाद उच्चारण — अल-अंकबूत
وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُبَوِّئَنَّهُم مِّنَ الْجَنَّةِ غُرَفًا تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ نِعْمَ أَجْرُ الْعَامِلِينَ ۝٥٨
Wallazeena aamanoo wa `amilus saalihaati la nubawwi `annahum minal Jannati ghurafan tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa; ni`ma ajrul `aamileen
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको हम बेहश्त के झरोखों में जगह देगें जिनके नीचे नहरें जारी हैं जिनमें वह हमेशा रहेंगे (अच्छे चलन वालो की भी क्या ख़ूब ख़री मज़दूरी है)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَنُبَوِّئَنَّهُمْ – हम उन्हें अवश्य बसाएँगे / ठिकाना देंगे।
  • غُرَفًا – ऊँचे महल / ऊपरी कक्ष (जन्नत के ऊँचे दर्जे)।
  • تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ – जिनके नीचे नदियाँ बहती होंगी।
  • خَالِدِينَ – हमेशा रहने वाले (अमर)।
  • نِعْمَ أَجْرُ الْعَامِلِينَ – कितना अच्छा बदला है नेक काम करने वालों के लिए।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की खुशखबरी सुना रहा है जो ईमान लाए और उन्होंने अपने ईमान के साथ अच्छे कर्म भी किए। यह सिर्फ़ ज़ुबानी ईमान नहीं है, बल्कि ईमान के साथ अमल-ए-सालिहा (नेक काम) भी शामिल है। अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे लोगों को हम जन्नत के ऊँचे-ऊँचे महलों में जगह देंगे, जो इतने ऊँचे और खूबसूरत होंगे कि उनके नीचे से नदियाँ बहती होंगी। यह महल सिर्फ़ ऊँचाई में नहीं होंगे, बल्कि हर तरह की राहत और खुशी से भरे होंगे।

इन लोगों को इन महलों में हमेशा हमेशा रहना है — कोई मौत नहीं, कोई दर्द नहीं, कोई ग़म नहीं, कोई थकान नहीं। यह वह जगह है जहाँ से वे कभी निकाले नहीं जाएँगे और न ही उन पर कोई बुराई आएगी। अल्लाह ने इसके बाद फ़रमाया: "कितना अच्छा बदला है नेक काम करने वालों के लिए!" यानी जिन लोगों ने दुनिया में अल्लाह की इबादत की, उसके हुक्मों पर चले, और लोगों के साथ भलाई की, उनके लिए यह बदला कितना शानदार है।

यह आयत हमें बताती है कि ईमान और अच्छे कर्म साथ-साथ चलते हैं। सिर्फ़ ईमान का दावा काफ़ी नहीं, बल्कि उस ईमान को अपने अमल से साबित करना ज़रूरी है। और जो लोग इस रास्ते पर चलते हैं, उनके लिए अल्लाह ने ऐसा इनाम तैयार किया है जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सबसे बड़ी खुशखबरी देती है — जन्नत के ऊँचे महल, जिनके नीचे नदियाँ बहती हैं, और वहाँ हमेशा की ज़िंदगी। यह कोई दूर की कल्पना नहीं, बल्कि अल्लाह का सच्चा वादा है। अल्लाह ने यह वादा उन लोगों से किया है जो ईमान लाते हैं और नेक काम करते हैं।

आज हम अपनी ज़िंदगी में देखें — क्या हम सिर्फ़ ईमान का दावा करते हैं या उस पर अमल भी करते हैं? अल्लाह हमें मौका दे रहा है कि हम अपने अमल को सुधारें, अपनी नमाज़, रोज़ा, ज़कात, अच्छे अख़लाक़ और लोगों की मदद को अपनी आदत बनाएँ। यह छोटी-छोटी कोशिशें ही हमें उन ऊँचे महलों तक पहुँचाएँगी।

याद रखिए — जन्नत के महल सस्ते नहीं मिलते, लेकिन अल्लाह की रहमत के आगे हमारे अमल कुछ भी नहीं हैं। अल्लाह अपनी रहमत से हमें वह दर्जा देना चाहता है जो हमारी कल्पना से भी परे है। तो आइए, हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने अमल को सुधारें, ताकि हम उन लोगों में शामिल हों जिनके लिए अल्लाह ने यह शानदार इनाम तैयार किया है। अल्लाह हम सबको इस तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 56-60 — अल-अंकबूत

56يَا عِبَادِيَ الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّ أَرْضِي وَاسِعَةٌ فَإِيَّايَ فَاعْبُدُونِ
ऐ मेरे ईमानदार बन्दों मेरी ज़मीन तो यक़ीनन कुशादा है तो तुम मेरी ही इबादत करो
57كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ ۖ ثُمَّ إِلَيْنَا تُرْجَعُونَ
हर शख्स (एक न एक दिन) मौत का मज़ा चखने वाला है फिर तुम सब आख़िर हमारी ही तरफ लौटए जाओंगे
58وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُبَوِّئَنَّهُم مِّنَ الْجَنَّةِ غُرَفًا تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ نِعْمَ أَجْرُ الْعَامِلِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको हम बेहश्त के झरोखों में जगह देगें जिनके नीचे नहरें जारी हैं जिनमें वह हमेशा रहेंगे (अच्छे चलन वालो की भी क्या ख़ूब ख़री मज़दूरी है)
59الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
जिन्होंने (दुनिया में मुसिबतों पर) सब्र किया और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं
60وَكَأَيِّن مِّن دَابَّةٍ لَّا تَحْمِلُ رِزْقَهَا اللَّهُ يَرْزُقُهَا وَإِيَّاكُمْ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
और ज़मीन पर चलने वालों में बहुतेरे ऐसे हैं जो अपनी रोज़ी अपने ऊपर लादे नहीं फिरते ख़ुदा ही उनको भी रोज़ी देता है और तुम को भी और वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
अल-अंकबूतकुरान सूची
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मक्कीRevelation
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अनुवाद — अल-अंकबूत 58

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Tuesday, August 18, 2026

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