अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ذَائِقَةُ الْمَوْتِ: मृत्यु का स्वाद चखने वाली। यहाँ "ज़ौक" (स्वाद चखना) से आशय है कि हर प्राणी को मृत्यु की कड़वाहट या वास्तविकता का अनुभव अवश्य करना है, जैसे कोई चीज़ खाने वाला उसका स्वाद महसूस करता है।
- تُرْجَعُونَ: तुम लौटाए जाओगे। अर्थात् पुनरुत्थान के दिन सब कुछ अल्लाह की ओर लौटकर जाना है।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत एक सार्वभौमिक सत्य को बयान करती है जो किसी विशेष समय, स्थान या व्यक्ति तक सीमित नहीं है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हर जीवित प्राणी — चाहे वह ईमानवाला हो या काफ़िर, अमीर हो या ग़रीब, बादशाह हो या ग़ुलाम — को मृत्यु का स्वाद चखना ही है। यह जीवन की एक अपरिहार्य वास्तविकता है जिससे कोई नहीं बच सकता।
इस आयत का विशेष संदर्भ यह है कि जब मुसलमानों को मक्का से हिजरत (प्रवास) करने का आदेश दिया गया, तो कुछ लोगों ने डर व्यक्त किया कि कहीं रास्ते में या नई जगह पर मौत न आ जाए। अल्लाह ने उन्हें समझाया कि मौत से भागना बेकार है — मौत तो हर हाल में आनी है, चाहे तुम कहीं भी रहो। इसलिए अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए हिजरत करो, क्योंकि मौत का डर तुम्हें अल्लाह की आज्ञा मानने से नहीं रोकना चाहिए।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "फिर तुम हमारी ओर लौटाए जाओगे" — यानी मृत्यु के बाद जीवन का अंत नहीं होता, बल्कि एक नया चरण शुरू होता है। सभी लोग क़यामत के दिन अल्लाह के सामने हाज़िर होंगे, और उनके सभी अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब लिया जाएगा। जो कोई भी अल्लाह के आगे झुककर अच्छे कर्म करेगा, उसे अच्छा बदला मिलेगा, और जो बुराई करेगा, उसे उसका फल भुगतना होगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि:
- मृत्यु का भय हमें सत्य और अच्छाई के मार्ग से विचलित नहीं करना चाहिए।
- यह दुनिया का जीवन अस्थायी है — असली जीवन आख़िरत का है, जहाँ हर व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा बदला मिलेगा।
- हमें अपने जीवन को इस तरह बिताना चाहिए कि जब हम अल्लाह के सामने पेश हों, तो हमारा पल्ला अच्छे कर्मों से भारी हो।
यह आयत मुसलमानों के लिए एक बड़ी तसल्ली और प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें याद दिलाती है कि मौत का डर हमें कमज़ोर नहीं बना सकता, बल्कि हमें मजबूत बनाना चाहिए — क्योंकि हमारा असली मक़सद अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) प्राप्त करना है। जो व्यक्ति यह समझ लेता है कि मौत के बाद भी जीवन है और उसे अपने हर कर्म का हिसाब देना है, वह कभी बुराई की तरफ नहीं जाएगा और हमेशा अच्छाई के रास्ते पर चलने की कोशिश करेगा।
अल्लाह हम सबको यह समझने की तौफ़ीक़ दे और हमें अपने आदेशों पर चलने वाला बनाए। आमीन।
📜 आयत 55-59 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 57
सूरा अल-अंकबूत आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हर शख्स (एक न एक दिन) मौत का मज़ा चखने…सूरा आयत 57/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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