अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- صَبَرُوا – उन्होंने धैर्य रखा, सब्र किया।
- يَتَوَكَّلُونَ – वे भरोसा करते हैं, अपने सारे मामलों में अल्लाह पर ही निर्भर रहते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मोमिनिन (ईमानवालों) की विशेषता बयान कर रही है जिनके लिए अल्लाह ने जन्नत के ऊँचे-ऊँचे महल और स्थायी नेमतें तैयार की हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की इबादत पर सब्र किया, अपने दीन (धर्म) पर दृढ़ रहे, और रास्ते में आने वाली हर मुश्किल—चाहे वह तकलीफ़ हो, वतन से दूरी हो, या दुश्मनों की साज़िशें—को अल्लाह की राह में सहन किया। उन्होंने गुनाहों से बचने में भी सब्र किया और अल्लाह के हुक्मों पर अमल करने में भी।
इसके साथ ही, उनका हाल यह है कि वे अपने रब पर ही पूरा भरोसा रखते हैं। वे अपनी रोज़ी, अपनी हिफ़ाज़त, अपने दुश्मनों के मुक़ाबले में और अपने हर छोटे-बड़े मामले में सिर्फ़ अल्लाह ही पर तवक्कुल करते हैं। वे जानते हैं कि जो अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है। यही सब्र और तवक्कुल उन्हें दुनिया में इज़्ज़त देता है और आख़िरत में कामयाबी।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि मुसलमान की पहचान यह है कि वह मुश्किलों में घबराए नहीं, बल्कि सब्र करे और अल्लाह पर भरोसा रखे। जब हम अपने कामों में अल्लाह पर तवक्कुल करेंगे, तो अल्लाह हमारे लिए ऐसे रास्ते खोलेगा जिनका हमें ख़याल भी नहीं होगा। याद रखिए, सब्र और तवक्कुल वह चाबी है जो जन्नत के दरवाज़े खोलती है। आज की दुनिया में हर इंसान बेचैन और परेशान है, लेकिन असली सुकून उसी को मिलता है जो अपने रब की तरफ़ रुजू करता है और उसी पर भरोसा रखता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी में इस सिफ़ात को अपनाएँ और अल्लाह से वादा करें कि हम सब्र करेंगे और उसी पर तवक्कुल रखेंगे। अल्लाह हमें इस तौफ़ीक़ अता करे। आमीन।
📜 आयत 57-61 — अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 59
सूरा अल-अंकबूत आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन्होंने (दुनिया में मुसिबतों पर) सब्र किया और अपने परवरदिगार…सूरा आयत 59/69 — अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंकबूत सुनें, अल-अंकबूत अनुवाद, अल-अंकबूत mp3, अल-अंकबूत pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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