अल-अंकबूत · 59/69
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंकबूत
الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ ۝٥٩
Allazeena sabaroo wa `alaa Rabbihim yatawakkaloon
📖 हिंदी अर्थ
जिन्होंने (दुनिया में मुसिबतों पर) सब्र किया और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • صَبَرُوا – उन्होंने धैर्य रखा, सब्र किया।
  • يَتَوَكَّلُونَ – वे भरोसा करते हैं, अपने सारे मामलों में अल्लाह पर ही निर्भर रहते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मोमिनिन (ईमानवालों) की विशेषता बयान कर रही है जिनके लिए अल्लाह ने जन्नत के ऊँचे-ऊँचे महल और स्थायी नेमतें तैयार की हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की इबादत पर सब्र किया, अपने दीन (धर्म) पर दृढ़ रहे, और रास्ते में आने वाली हर मुश्किल—चाहे वह तकलीफ़ हो, वतन से दूरी हो, या दुश्मनों की साज़िशें—को अल्लाह की राह में सहन किया। उन्होंने गुनाहों से बचने में भी सब्र किया और अल्लाह के हुक्मों पर अमल करने में भी।

इसके साथ ही, उनका हाल यह है कि वे अपने रब पर ही पूरा भरोसा रखते हैं। वे अपनी रोज़ी, अपनी हिफ़ाज़त, अपने दुश्मनों के मुक़ाबले में और अपने हर छोटे-बड़े मामले में सिर्फ़ अल्लाह ही पर तवक्कुल करते हैं। वे जानते हैं कि जो अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है। यही सब्र और तवक्कुल उन्हें दुनिया में इज़्ज़त देता है और आख़िरत में कामयाबी।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि मुसलमान की पहचान यह है कि वह मुश्किलों में घबराए नहीं, बल्कि सब्र करे और अल्लाह पर भरोसा रखे। जब हम अपने कामों में अल्लाह पर तवक्कुल करेंगे, तो अल्लाह हमारे लिए ऐसे रास्ते खोलेगा जिनका हमें ख़याल भी नहीं होगा। याद रखिए, सब्र और तवक्कुल वह चाबी है जो जन्नत के दरवाज़े खोलती है। आज की दुनिया में हर इंसान बेचैन और परेशान है, लेकिन असली सुकून उसी को मिलता है जो अपने रब की तरफ़ रुजू करता है और उसी पर भरोसा रखता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी में इस सिफ़ात को अपनाएँ और अल्लाह से वादा करें कि हम सब्र करेंगे और उसी पर तवक्कुल रखेंगे। अल्लाह हमें इस तौफ़ीक़ अता करे। आमीन।



📜 आयत 57-61 — सूरा अल-अंकबूत

57كُلُّ نَفْسٍ ذَائِقَةُ الْمَوْتِ ۖ ثُمَّ إِلَيْنَا تُرْجَعُونَ
हर शख्स (एक न एक दिन) मौत का मज़ा चखने वाला है फिर तुम सब आख़िर हमारी ही तरफ लौटए जाओंगे
58وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُبَوِّئَنَّهُم مِّنَ الْجَنَّةِ غُرَفًا تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ نِعْمَ أَجْرُ الْعَامِلِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको हम बेहश्त के झरोखों में जगह देगें जिनके नीचे नहरें जारी हैं जिनमें वह हमेशा रहेंगे (अच्छे चलन वालो की भी क्या ख़ूब ख़री मज़दूरी है)
59الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
जिन्होंने (दुनिया में मुसिबतों पर) सब्र किया और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं
60وَكَأَيِّن مِّن دَابَّةٍ لَّا تَحْمِلُ رِزْقَهَا اللَّهُ يَرْزُقُهَا وَإِيَّاكُمْ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
और ज़मीन पर चलने वालों में बहुतेरे ऐसे हैं जो अपनी रोज़ी अपने ऊपर लादे नहीं फिरते ख़ुदा ही उनको भी रोज़ी देता है और तुम को भी और वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
61وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ لَيَقُولُنَّ اللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ
(ऐ रसूल) अगर तुम उनसे पूछो कि (भला) किसने सारे आसमान व ज़मीन को पैदा किया और चाँद और सूरज को काम में लगाया तो वह ज़रुर यही कहेंगे कि अल्लाह ने फिर वह कहाँ बहके चले जाते हैं
अल-अंकबूतकुरान सूची
69आयत
मक्कीअवतरण स्थान
59आयत

अनुवाद — अल-अंकबूत 59

सूरा अल-अंकबूत आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन्होंने (दुनिया में मुसिबतों पर) सब्र किया और अपने परवरदिगार…

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Thursday, October 1, 2026

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