आल-इमरान · 114/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَيَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنكَرِ وَيُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَأُولَٰئِكَ مِنَ الصَّالِحِينَ ۝١١٤
Yu`minoona billaahi wal Yawmil Aakhiri wa yaa muroona bilma`roofi wa yanhawna `anil munkari wa yusaari`oona fil khairaati wa ulaa`ika minas saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
खुदा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम का तो हुक्म करते हैं और बुरे कामों से रोकते हैं और नेक कामों में दौड़ पड़ते हैं और यही लोग तो नेक बन्दों से हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • المعروف (अल-मारूफ़): वह अच्छा कार्य जिसे अक्ल (बुद्धि) और शरीअत (इस्लामी कानून) अच्छा ठहराएँ।
  • المنكر (अल-मुनकर): वह बुरा कार्य जिसे अक्ल या शरीअत बुरा ठहराए।
  • يسارعون (युसारिऊन): जल्दी करना, बिना देर किए आगे बढ़ना।
  • الصالحين (अस-सालिहीन): वे लोग जिनके ईमान और अमल दोनों दुरुस्त हों।

तफसीर (व्याख्या):

ये लोग (अहले-किताब में से ईमान लाने वाले) अल्लाह और आख़िरत के दिन पर पक्का और अटल ईमान रखते हैं। वे लोगों को हर उस अच्छे काम का हुक्म देते हैं जो शरीअत और अक्ल की नज़र में भला हो, और हर उस बुरे काम से रोकते हैं जो गुनाह और नापसंदीदा हो। वे नेकियों में जल्दी करते हैं—जब भी उन्हें किसी भलाई की तरफ़ बुलाया जाता है, वे फौरन उस पर अमल करते हैं और इबादत के मौक़ों को ग़नीमत जानते हैं। यही लोग अल्लाह के नेक बंदे हैं, जिनकी नीयतें और कर्म दोनों सुधर गए हैं, और वे सालिहीन (नेक लोगों) की ज़मरात में शामिल हैं।

फ़ायदे (सबक):

  1. ईमान की बुनियाद: सच्चा ईमान अल्लाह और आख़िरत पर होना चाहिए—यही निजात की पहली शर्त है। जिसके दिल में यह ईमान हो, उसके अमल अपने आप सुधर जाते हैं।
  2. अमर बिल-मारूफ़ और नही अनिल-मुनकर: यह उम्मत का फ़र्ज़ है कि वह भलाई का हुक्म दे और बुराई से रोके। यही समाज को सुधारने का ज़रिया है और इसी से उम्मत की बेहतरी है।
  3. नेकियों में जल्दी: भलाई के कामों में देर नहीं करनी चाहिए। मौका मिलते ही उसे ग़नीमत जानकर अमल करना चाहिए, क्योंकि मौत कब आ जाए, कोई नहीं जानता।
  4. सालिहीन की पहचान: असली नेकी सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि ईमान, अमल और अख़लाक़ के मिले-जुले होने से है। जो इन सिफ़ात पर क़ायम रहे, वही अल्लाह के पास नेक और पसंदीदा बंदा है।
  5. उम्मीद की किरण: यह आयत बताती है कि अहले-किताब में से भी जो लोग सच्चे दिल से ईमान लाए, वे मुसलमानों के भाई हैं और उन्हें भी अल्लाह की रहमत और नेकी का दर्जा मिलेगा। इससे पता चलता है कि इस्लाम दिलों को जोड़ने वाला दीन है, न कि फूट डालने वाला।


📜 आयत 112-116 — सूरा आल-इमरान

112ضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ الذِّلَّةُ أَيْنَ مَا ثُقِفُوا إِلَّا بِحَبْلٍ مِّنَ اللَّهِ وَحَبْلٍ مِّنَ النَّاسِ وَبَاءُوا بِغَضَبٍ مِّنَ اللَّهِ وَضُرِبَتْ عَلَيْهِمُ الْمَسْكَنَةُ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَانُوا يَكْفُرُونَ بِآيَاتِ اللَّهِ وَيَقْتُلُونَ الْأَنبِيَاءَ بِغَيْرِ حَقٍّ ۚ ذَٰلِكَ بِمَا عَصَوا وَّكَانُوا يَعْتَدُونَ
और जहॉ कहीं हत्ते चढ़े उनपर रूसवाई की मार पड़ी मगर ख़ुदा के एहद (या) और लोगों के एहद के ज़रिये से (उनको कहीं पनाह मिल गयी) और फिर हेरफेर के खुदा के गज़ब में पड़ गए और उनपर मोहताजी की मार (अलग) पड़ी ये (क्यों) इस सबब से कि वह ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते थे और पैग़म्बरों को नाहक़ क़त्ल करते थे ये सज़ा उसकी है कि उन्होंने नाफ़रमानी की और हद से गुज़र गए थे
113۞ لَيْسُوا سَوَاءً ۗ مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ أُمَّةٌ قَائِمَةٌ يَتْلُونَ آيَاتِ اللَّهِ آنَاءَ اللَّيْلِ وَهُمْ يَسْجُدُونَ
और ये लोग भी सबके सब यकसॉ नहीं हैं (बल्कि) अहले किताब से कुछ लोग तो ऐसे हैं कि (ख़ुदा के दीन पर) इस तरह साबित क़दम हैं कि रातों को ख़ुदा की आयतें पढ़ा करते हैं और वह बराबर सजदे किया करते हैं
114يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَيَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنكَرِ وَيُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَأُولَٰئِكَ مِنَ الصَّالِحِينَ
खुदा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम का तो हुक्म करते हैं और बुरे कामों से रोकते हैं और नेक कामों में दौड़ पड़ते हैं और यही लोग तो नेक बन्दों से हैं
115وَمَا يَفْعَلُوا مِنْ خَيْرٍ فَلَن يُكْفَرُوهُ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِالْمُتَّقِينَ
और वह जो कुछ नेकी करेंगे उसकी हरगिज़ नाक़द्री न की जाएगी और ख़ुदा परहेज़गारों से खूब वाक़िफ़ है
116إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا لَن تُغْنِيَ عَنْهُمْ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُم مِّنَ اللَّهِ شَيْئًا ۖ وَأُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۚ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया ख़ुदा (के अज़ाब) से बचाने में हरगिज़ न उनके माल ही कुछ काम आएंगे न उनकी औलाद और यही लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा उसी में रहेंगे
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीअवतरण स्थान
114आयत

अनुवाद — आल-इमरान 114

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Friday, October 2, 2026

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