आल-इमरान · 115/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
وَمَا يَفْعَلُوا مِنْ خَيْرٍ فَلَن يُكْفَرُوهُ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِالْمُتَّقِينَ ۝١١٥
Wa maa yaf`aloo min khairin falai yukfarooh; wallaahu `aleemun bilmuttaqeen
📖 हिंदी अर्थ
और वह जो कुछ नेकी करेंगे उसकी हरगिज़ नाक़द्री न की जाएगी और ख़ुदा परहेज़गारों से खूब वाक़िफ़ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَكْفُرُوهُ: यहाँ इसका अर्थ है "इनकार करना" या "नष्ट करना" नहीं, बल्कि "बदले में देना" या "पुरस्कृत न करना" के अर्थ में है। अर्थात, अच्छे काम का बदला न दिया जाना।
  • الْمُتَّقِينَ: परहेज़गार, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन ईमानवालों को खुशखबरी दे रहा है जो नेक काम करते हैं। फिर चाहे वह नेकी छोटी हो या बड़ी, अल्लाह उसे कभी बेकार या बरबाद नहीं करेगा। हर अच्छे काम का बदला अल्लाह के यहाँ सुरक्षित है, और उसे पूरा-पूरा दिया जाएगा। यहाँ "فَلَن يُكْفَرُوهُ" का मतलब यह है कि अल्लाह उनके अच्छे कामों को नकारेगा नहीं, न ही उनका सवाब रोकेगा। बल्कि वह उनके अच्छे कामों को कबूल करेगा और उन्हें इसका पूरा इनाम देगा।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह "الْمُتَّقِينَ" (परहेज़गारों) को खूब जानता है। परहेज़गार वे लोग हैं जो अल्लाह के डर से बुराईयों से बचते हैं और अच्छे काम करते हैं, सिर्फ अल्लाह की रज़ा और उसके सवाब की चाहत में। अल्लाह को उनके हालात, उनकी नीयतें और उनके कर्म सब कुछ मालूम है। वह किसी के अच्छे काम को ज़ाया नहीं करेगा, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो। यह आयत उन लोगों के लिए तसल्ली और उम्मीद का पैगाम है जो अल्लाह की राह में भलाई के काम करते हैं, और उन्हें यकीन दिलाती है कि उनकी मेहनत और नेकी कभी रायगाँ नहीं जाएगी।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह का इन्साफ़ और करम बेमिसाल है—वह किसी भी नेकी को छोटा नहीं समझता, बल्कि उसे कबूल करके उसका बदला देता है। इससे मुसलमान को हौसला मिलता है कि वह छोटी से छोटी नेकी भी करता रहे।
  2. यह आयत मोमिन को सिखाती है कि नेकी का असली मक़सद अल्लाह की रज़ा होनी चाहिए, न कि लोगों की तारीफ़। अल्लाह परहेज़गारों की नीयतों से वाक़िफ है और उसी के अनुसार उन्हें अज्र देगा।
  3. इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रहमत और इन्साफ़ का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जो भी अच्छा काम करेगा, उसका फल उसे ज़रूर मिलेगा, चाहे दुनिया में लोग उसे पहचानें या न पहचानें। यह इस्लाम की एक बुनियादी तालीम है कि आख़िरत में हर अच्छे काम का पूरा हिसाब होगा।
  4. परहेज़गारी (तक़वा) की फज़ीलत बयान हुई है—जो लोग अल्लाह से डरकर गुनाहों से बचते हैं, वही अल्लाह के ख़ास लोग हैं, और उनके लिए बेहतरीन इनाम तैयार है।


📜 आयत 113-117 — सूरा आल-इमरान

113۞ لَيْسُوا سَوَاءً ۗ مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ أُمَّةٌ قَائِمَةٌ يَتْلُونَ آيَاتِ اللَّهِ آنَاءَ اللَّيْلِ وَهُمْ يَسْجُدُونَ
और ये लोग भी सबके सब यकसॉ नहीं हैं (बल्कि) अहले किताब से कुछ लोग तो ऐसे हैं कि (ख़ुदा के दीन पर) इस तरह साबित क़दम हैं कि रातों को ख़ुदा की आयतें पढ़ा करते हैं और वह बराबर सजदे किया करते हैं
114يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَيَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنكَرِ وَيُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَأُولَٰئِكَ مِنَ الصَّالِحِينَ
खुदा और रोज़े आख़ेरत पर ईमान रखते हैं और अच्छे काम का तो हुक्म करते हैं और बुरे कामों से रोकते हैं और नेक कामों में दौड़ पड़ते हैं और यही लोग तो नेक बन्दों से हैं
115وَمَا يَفْعَلُوا مِنْ خَيْرٍ فَلَن يُكْفَرُوهُ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِالْمُتَّقِينَ
और वह जो कुछ नेकी करेंगे उसकी हरगिज़ नाक़द्री न की जाएगी और ख़ुदा परहेज़गारों से खूब वाक़िफ़ है
116إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا لَن تُغْنِيَ عَنْهُمْ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُم مِّنَ اللَّهِ شَيْئًا ۖ وَأُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۚ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया ख़ुदा (के अज़ाब) से बचाने में हरगिज़ न उनके माल ही कुछ काम आएंगे न उनकी औलाद और यही लोग जहन्नुमी हैं और हमेशा उसी में रहेंगे
117مَثَلُ مَا يُنفِقُونَ فِي هَٰذِهِ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا كَمَثَلِ رِيحٍ فِيهَا صِرٌّ أَصَابَتْ حَرْثَ قَوْمٍ ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ فَأَهْلَكَتْهُ ۚ وَمَا ظَلَمَهُمُ اللَّهُ وَلَٰكِنْ أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
दुनिया की चन्द रोज़ा ज़िन्दगी में ये लोग जो कुछ (ख़िलाफ़ शरा) ख़र्च करते हैं उसकी मिसाल अन्धड़ की मिसाल है जिसमें बहुत पाला हो और वह उन लोगों के खेत पर जा पड़े जिन्होंने (कुफ़्र की वजह से) अपनी जानों पर सितम ढाया हो और फिर पाला उसे मार के (नास कर दे) और ख़ुदा ने उनपर जुल्म कुछ नहीं किया बल्कि उन्होंने आप अपने ऊपर जुल्म किया
आल-इमरानकुरान सूची
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अनुवाद — आल-इमरान 115

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Thursday, October 1, 2026

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