अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَكْفُرُوهُ: यहाँ इसका अर्थ है "इनकार करना" या "नष्ट करना" नहीं, बल्कि "बदले में देना" या "पुरस्कृत न करना" के अर्थ में है। अर्थात, अच्छे काम का बदला न दिया जाना।
- الْمُتَّقِينَ: परहेज़गार, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन ईमानवालों को खुशखबरी दे रहा है जो नेक काम करते हैं। फिर चाहे वह नेकी छोटी हो या बड़ी, अल्लाह उसे कभी बेकार या बरबाद नहीं करेगा। हर अच्छे काम का बदला अल्लाह के यहाँ सुरक्षित है, और उसे पूरा-पूरा दिया जाएगा। यहाँ "فَلَن يُكْفَرُوهُ" का मतलब यह है कि अल्लाह उनके अच्छे कामों को नकारेगा नहीं, न ही उनका सवाब रोकेगा। बल्कि वह उनके अच्छे कामों को कबूल करेगा और उन्हें इसका पूरा इनाम देगा।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह "الْمُتَّقِينَ" (परहेज़गारों) को खूब जानता है। परहेज़गार वे लोग हैं जो अल्लाह के डर से बुराईयों से बचते हैं और अच्छे काम करते हैं, सिर्फ अल्लाह की रज़ा और उसके सवाब की चाहत में। अल्लाह को उनके हालात, उनकी नीयतें और उनके कर्म सब कुछ मालूम है। वह किसी के अच्छे काम को ज़ाया नहीं करेगा, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो। यह आयत उन लोगों के लिए तसल्ली और उम्मीद का पैगाम है जो अल्लाह की राह में भलाई के काम करते हैं, और उन्हें यकीन दिलाती है कि उनकी मेहनत और नेकी कभी रायगाँ नहीं जाएगी।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह का इन्साफ़ और करम बेमिसाल है—वह किसी भी नेकी को छोटा नहीं समझता, बल्कि उसे कबूल करके उसका बदला देता है। इससे मुसलमान को हौसला मिलता है कि वह छोटी से छोटी नेकी भी करता रहे।
- यह आयत मोमिन को सिखाती है कि नेकी का असली मक़सद अल्लाह की रज़ा होनी चाहिए, न कि लोगों की तारीफ़। अल्लाह परहेज़गारों की नीयतों से वाक़िफ है और उसी के अनुसार उन्हें अज्र देगा।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि अल्लाह की रहमत और इन्साफ़ का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जो भी अच्छा काम करेगा, उसका फल उसे ज़रूर मिलेगा, चाहे दुनिया में लोग उसे पहचानें या न पहचानें। यह इस्लाम की एक बुनियादी तालीम है कि आख़िरत में हर अच्छे काम का पूरा हिसाब होगा।
- परहेज़गारी (तक़वा) की फज़ीलत बयान हुई है—जो लोग अल्लाह से डरकर गुनाहों से बचते हैं, वही अल्लाह के ख़ास लोग हैं, और उनके लिए बेहतरीन इनाम तैयार है।
📜 आयत 113-117 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 115
सूरा आल-इमरान आयत 115 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह जो कुछ नेकी करेंगे उसकी हरगिज़ नाक़द्री न…सूरा आयत 115/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 113–117. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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