Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَادْرَءُوا: अपने से दूर करो, टालो।
- أَطَاعُونَا: हमारी बात मानते।
- قُتِلُوا: मारे गए (शहीद हुए)।
- صَادِقِينَ: सच्चे हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयत उन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) के बारे में है जो जिहाद से पीछे रह गए थे और अपने उन भाइयों (रिश्तेदारों) के बारे में, जो उहुद की जंग में शहीद हुए, कहते थे: "अगर वे हमारी बात मानते और जिहाद के लिए नहीं निकलते, तो वे मारे नहीं जाते।" वे अपनी इस बात से यह समझाना चाहते थे कि उनका पीछे रहना ही सही था और युद्ध में जाना गलत था।
अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ को हुक्म दिया कि उन्हें जवाब दें: "अगर तुम सच्चे हो कि बचकर रहना मौत से बचाता है, तो फिर अपने से मौत को टालो।" यानी जब मौत आएगी, तो न तो तुम्हारी चालाकी काम आएगी और न ही पीछे रहना। मौत तो हर हाल में आएगी, चाहे इंसान जिहाद में जाए या घर में बैठा रहे। अल्लाह की तक़दीर (भाग्य) के बिना कोई नहीं मर सकता और न ही कोई उससे बच सकता है।
इस आयत में उन लोगों की ग़लतफ़हमी का खंडन किया गया है जो समझते हैं कि जिहाद से बचकर रहना या दुश्मन से दूर रहना उन्हें मौत से बचा लेगा। हक़ीक़त यह है कि मौत का वक़्त और जगह अल्लाह ने तय कर दी है। जो लोग अल्लाह की राह में जिहाद करते हैं, वे शहादत की बुलंदी हासिल करते हैं, जबकि पीछे रहने वाले भी मौत से नहीं बच सकते।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी राह में कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटना चाहिए। जो इंसान अल्लाह की राह में अपनी जान देता है, वह असल में शहादत का मुकाम पाता है, जो जन्नत में सबसे ऊँचा दर्जा है। मौत से डरकर पीछे रहना न तो ज़िंदगी बढ़ाता है और न ही अज़ाब से बचाता है। अल्लाह के पास हर इंसान की मौत का वक़्त लिखा हुआ है, और उस वक़्त को कोई नहीं टाल सकता। इसलिए हमें जिहाद और अल्लाह की राह में काम करने से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 166-170 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 168
सूरा आल-इमरान आयत 168 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये वही लोग हैं) जो (आप चैन से घरों में…सूरा आयत 168/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 166–170. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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