Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَفْرَحُونَ – खुश होते हैं, प्रसन्न होते हैं।
- أَتَوا – किए, कमाए (यहाँ बुरे कर्मों का उल्लेख है)।
- يُحْمَدُوا – उनकी प्रशंसा की जाए, उन्हें सराहा जाए।
- مَفَازَةٍ – नजात, छुटकारा, सुरक्षित स्थान।
- عَذَابٌ أَلِيمٌ – दर्दनाक और पीड़ादायक यातना।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप उन लोगों के बारे में कभी यह ख़याल न करें जो अपने किए हुए बुरे कर्मों पर खुश होते हैं और चाहते हैं कि लोग उनकी उन अच्छाइयों के लिए प्रशंसा करें जो उन्होंने की ही नहीं। यह हालत मुनाफ़िक़ीन (दिखावटी मुसलमानों) और यहूदियों जैसे लोगों की थी, जो अच्छे कामों को छोड़कर बुराइयों में मशगूल रहते थे, फिर भी लोगों से तारीफ़ की उम्मीद रखते थे।
ऐ नबी! आप हरगिज़ यह न समझें कि ऐसे लोग अज़ाब से बच निकलने की जगह पा लेंगे। सच तो यह है कि उनके लिए आख़िरत में बहुत ही दर्दनाक और तकलीफ़देह यातना तैयार है। यह इसलिए कि उन्होंने नेकी का दिखावा किया, झूठी प्रशंसा चाही, और अपने बुरे कर्मों पर इतराए, जबकि हक़ीक़त में वे अल्लाह की नाफ़रमानी में डूबे हुए थे। यह आयत उन सभी लोगों के लिए सख्त चेतावनी है जो बुराई पर खुश होते हैं, अपने गुनाहों पर घमंड करते हैं, और जो काम उन्होंने नहीं किए उनकी तारीफ़ के भूखे रहते हैं।
फ़ायदे (सबक़):
- इंसान को अपने अच्छे कामों पर भी घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि घमंड नेकियों को बर्बाद कर देता है। जो लोग अपनी बुराइयों पर खुश होते हैं, वह अल्लाह के करीब नहीं बल्कि उसकी नाराज़गी के पात्र बनते हैं।
- दिखावे के लिए अच्छाई का जतलाना और लोगों से प्रशंसा चाहना अल्लाह के यहाँ बहुत बड़ा गुनाह है। मुसलमान को चाहिए कि उसकी नीयत सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए हो, न कि लोगों की तारीफ़ के लिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नज़र में इंसान की हक़ीक़त उसके ज़ाहिरी दिखावे से नहीं, बल्कि उसके अंदरूनी ईमान और अच्छे आचरण से होती है। जो लोग झूठ और दिखावे का सहारा लेते हैं, वे अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकते।
- मोमिन को चाहिए कि वह सच्चाई और ईमानदारी की ज़िंदगी गुज़ारे, अपने गुनाहों पर शर्मिंदा हो और अल्लाह से माफ़ी माँगे, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों को माफ़ कर देता है, लेकिन दिखावे और घमंड वालों के लिए दर्दनाक अज़ाब है।
📜 आयत 186-190 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 188
सूरा आल-इमरान आयत 188 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम उन्हें ख्याल में भी न लाना जो…सूरा आयत 188/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 186–190. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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