अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मीथाक़: पक्का वचन, अहद, संधि।
- लतुबय्यिनुन्नहु: तुम उसे (किताब को) लोगों के सामने स्पष्ट रूप से बयान करोगे।
- ला तकतुमूनहु: उसे छिपाओगे नहीं।
- फ़नबज़ूहु: उन्होंने उसे (वचन को) पीठ पीछे फेंक दिया, यानी उसे तोड़ दिया और उसकी परवाह नहीं की।
- वश्तरौ बिही समनन क़लीला: उस (वचन और किताब) के बदले थोड़ी सी दुनियावी क़ीमत खरीद ली।
- फ़बि'सा मा यश्तरून: बहुत बुरा है वह सौदा जो वे कर रहे हैं।
तफ़सीर:
ऐ नबी! उस समय को याद करो जब अल्लाह ने अहले-किताब (यहूदी और ईसाई) के विद्वानों से पक्का वचन लिया था कि वे लोगों के सामने उस किताब (तौरात और इंजील) को स्पष्ट रूप से बयान करेंगे, उसमें छिपाने की कोशिश नहीं करेंगे, और न ही उसे तोड़-मरोड़ कर पेश करेंगे। यह वचन इसलिए लिया गया था ताकि सच्चाई लोगों तक पहुँचे, और उनमें मौजूद उस सच्चे रास्ते की निशानियाँ ज़ाहिर हों जो आख़िरी नबी (हज़रत मुहम्मद ﷺ) की आमद की ख़बर देती थीं।
लेकिन उन विद्वानों ने इस वचन को पीठ पीछे फेंक दिया — यानी उन्होंने इसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया। उन्होंने सच्चाई को छिपाया, और उसके बदले दुनिया का थोड़ा सा माल, रुतबा, या लोगों की तारीफ़ें हासिल कर लीं। उन्होंने अल्लाह की किताब को अपनी दुनियावी ख्वाहिशों का ज़रिया बना लिया, और इस तरह उन्होंने अपने आपको बहुत बड़े नुक़सान में डाल दिया।
यह वचन सिर्फ़ उन्हीं तक सीमित नहीं था, बल्कि हर उस शख्स के लिए नसीहत है जिसे अल्लाह ने इल्म और समझ दी है। जो व्यक्ति कुछ जानता है, उसे चाहिए कि वह उसे लोगों तक पहुँचाए, और इल्म छिपाना बहुत बड़ा गुनाह है। याद रखो, जो लोग सच्चाई को छिपाते हैं और उसके बदले दुनिया की मामूली चीज़ें हासिल करते हैं, उनका यह सौदा बहुत बुरा है — क्योंकि वे अल्लाह की रहमत और आख़िरत की कामयाबी को खोकर एक फ़ानी और बेकार चीज़ पर खुश हो रहे हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि इल्म अमानत है, और उसे बयान करना हर आलिम का फ़र्ज़ है। जो लोग सच्चाई को छिपाते हैं, वे न सिर्फ़ अपने ऊपर ज़ुल्म करते हैं, बल्कि पूरे समाज को अंधेरे में छोड़ देते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम जो कुछ भी जानें, उसे खुले दिल से दूसरों तक पहुँचाएँ, और अल्लाह का वचन निभाएँ — क्योंकि यही कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 185-189 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 187
सूरा आल-इमरान आयत 187 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) इनको वह वक्त तो याद दिलाओ जब…सूरा आयत 187/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 185–189. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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