Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اصْطَفَىٰ: चुन लिया, विशेष रूप से चयन किया।
- آلِ إِبْرَاهِيمَ: इब्राहीम अलैहिस्सलाम की संतान और उनके घराने के नबी।
- آلِ عِمْرَانَ: इमरान की संतान और उनके घराने के नबी, जिनमें मूसा और हारून अलैहिस्सलाम शामिल हैं।
- الْعَالَمِينَ: अपने समय के सभी लोगों और जातियों पर।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में बताया कि उसने अपनी असीम कृपा और ज्ञान से कुछ चुने हुए लोगों को दुनिया के सभी लोगों पर श्रेष्ठता प्रदान की। इनमें सबसे पहले आदम अलैहिस्सलाम हैं, जो मानव जाति के पिता हैं; अल्लाह ने उन्हें अपना ख़लीफ़ा बनाया, उन्हें सीधा रास्ता सिखाया और फ़रिश्तों को उन्हें सजदा करने का आदेश दिया। फिर नूह अलैहिस्सलाम का ज़िक्र है, जिन्हें अल्लाह ने धरती के लोगों की ओर पहला रसूल बनाकर भेजा और उनके माध्यम से तूफ़ान के बाद मानवता का नया सिलसिला शुरू किया। इसके बाद इब्राहीम अलैहिस्सलाम के घराने का उल्लेख है, जिनकी संतान में अल्लाह ने नबुव्वत को क़ायम रखा; उनके वंश में इस्माइल, इस्हाक़, याक़ूब, यूसुफ़ और आख़िर में मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जैसे महान नबी पैदा हुए। और फिर इमरान के घराने का ज़िक्र है, जिनमें मूसा और हारून अलैहिस्सलाम शामिल हैं, और उन्हीं के घराने से मरियम अलैहिस्सलाम और ईसा अलैहिस्सलाम भी हैं। अल्लाह ने इन सभी को अपने समय के लोगों पर चुना और उन्हें दुनिया और आख़िरत की भलाई से नवाज़ा। यह चयन अल्लाह की ओर से था, किसी की सिफ़ारिश या किसी के कर्मों के कारण नहीं, बल्कि यह अल्लाह की रहमत और हिक्मत का नतीजा था।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह तआला जिसे चाहता है अपनी रहमत से चुन लेता है; यह उसकी इच्छा और ज्ञान पर निर्भर है, किसी की सिफ़ारिश पर नहीं। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह के फ़ैसलों पर संतुष्ट रहना चाहिए और उसकी रहमत से निराश नहीं होना चाहिए।
- नबियों और अच्छे लोगों का चयन अल्लाह की ओर से होता है, और यह चयन उनके जीवन की पवित्रता और उनके संघर्ष की बदौलत होता है। इससे हमें सीख मिलती है कि हमें अच्छे कर्मों और ईमानदारी से जीवन बिताना चाहिए ताकि अल्लाह की रहमत हम पर भी हो।
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने हर युग में अपने नबी भेजे और उन्हें दुनिया के लिए रहनुमा बनाया। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि हम उनके रास्ते पर चलें और उनकी सुन्नत को अपनाएं।
- इस आयत में मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की श्रेष्ठता का भी संकेत है, क्योंकि वे इब्राहीम अलैहिस्सलाम की संतान में से हैं और सभी नबियों के सरताज हैं। यह हमें अपने नबी से मुहब्बत और उनकी पैरवी की तरफ़ बुलाता है।
📜 आयत 31-35 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 33
सूरा आल-इमरान आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक ख़ुदा ने आदम और नूह और ख़ानदाने इबराहीम और…सूरा आयत 33/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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