आल-इमरान · 33/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
۞ إِنَّ اللَّهَ اصْطَفَىٰ آدَمَ وَنُوحًا وَآلَ إِبْرَاهِيمَ وَآلَ عِمْرَانَ عَلَى الْعَالَمِينَ ۝٣٣
Innal laahas tafaaa Aadama wa Noohanw wa Aala Ibraaheema wa Aala Imraana `alal `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक ख़ुदा ने आदम और नूह और ख़ानदाने इबराहीम और खानदाने इमरान को सारे जहान से बरगुज़ीदा किया है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اصْطَفَىٰ: चुन लिया, विशेष रूप से चयन किया।
  • آلِ إِبْرَاهِيمَ: इब्राहीम अलैहिस्सलाम की संतान और उनके घराने के नबी।
  • آلِ عِمْرَانَ: इमरान की संतान और उनके घराने के नबी, जिनमें मूसा और हारून अलैहिस्सलाम शामिल हैं।
  • الْعَالَمِينَ: अपने समय के सभी लोगों और जातियों पर।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में बताया कि उसने अपनी असीम कृपा और ज्ञान से कुछ चुने हुए लोगों को दुनिया के सभी लोगों पर श्रेष्ठता प्रदान की। इनमें सबसे पहले आदम अलैहिस्सलाम हैं, जो मानव जाति के पिता हैं; अल्लाह ने उन्हें अपना ख़लीफ़ा बनाया, उन्हें सीधा रास्ता सिखाया और फ़रिश्तों को उन्हें सजदा करने का आदेश दिया। फिर नूह अलैहिस्सलाम का ज़िक्र है, जिन्हें अल्लाह ने धरती के लोगों की ओर पहला रसूल बनाकर भेजा और उनके माध्यम से तूफ़ान के बाद मानवता का नया सिलसिला शुरू किया। इसके बाद इब्राहीम अलैहिस्सलाम के घराने का उल्लेख है, जिनकी संतान में अल्लाह ने नबुव्वत को क़ायम रखा; उनके वंश में इस्माइल, इस्हाक़, याक़ूब, यूसुफ़ और आख़िर में मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जैसे महान नबी पैदा हुए। और फिर इमरान के घराने का ज़िक्र है, जिनमें मूसा और हारून अलैहिस्सलाम शामिल हैं, और उन्हीं के घराने से मरियम अलैहिस्सलाम और ईसा अलैहिस्सलाम भी हैं। अल्लाह ने इन सभी को अपने समय के लोगों पर चुना और उन्हें दुनिया और आख़िरत की भलाई से नवाज़ा। यह चयन अल्लाह की ओर से था, किसी की सिफ़ारिश या किसी के कर्मों के कारण नहीं, बल्कि यह अल्लाह की रहमत और हिक्मत का नतीजा था।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह तआला जिसे चाहता है अपनी रहमत से चुन लेता है; यह उसकी इच्छा और ज्ञान पर निर्भर है, किसी की सिफ़ारिश पर नहीं। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह के फ़ैसलों पर संतुष्ट रहना चाहिए और उसकी रहमत से निराश नहीं होना चाहिए।
  2. नबियों और अच्छे लोगों का चयन अल्लाह की ओर से होता है, और यह चयन उनके जीवन की पवित्रता और उनके संघर्ष की बदौलत होता है। इससे हमें सीख मिलती है कि हमें अच्छे कर्मों और ईमानदारी से जीवन बिताना चाहिए ताकि अल्लाह की रहमत हम पर भी हो।
  3. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने हर युग में अपने नबी भेजे और उन्हें दुनिया के लिए रहनुमा बनाया। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि हम उनके रास्ते पर चलें और उनकी सुन्नत को अपनाएं।
  4. इस आयत में मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की श्रेष्ठता का भी संकेत है, क्योंकि वे इब्राहीम अलैहिस्सलाम की संतान में से हैं और सभी नबियों के सरताज हैं। यह हमें अपने नबी से मुहब्बत और उनकी पैरवी की तरफ़ बुलाता है।


📜 आयत 31-35 — आल-इमरान

31قُلْ إِن كُنتُمْ تُحِبُّونَ اللَّهَ فَاتَّبِعُونِي يُحْبِبْكُمُ اللَّهُ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ذُنُوبَكُمْ ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
(ऐ रसूल) उन लोगों से कह दो कि अगर तुम ख़ुदा को दोस्त रखते हो तो मेरी पैरवी करो कि ख़ुदा (भी) तुमको दोस्त रखेगा और तुमको तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और खुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
32قُلْ أَطِيعُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ ۖ فَإِن تَوَلَّوْا فَإِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ الْكَافِرِينَ
(ऐ रसूल) कह दो कि ख़ुदा और रसूल की फ़रमाबरदारी करो फिर अगर यह लोग उससे सरताबी करें तो (समझ लें कि) ख़ुदा काफ़िरों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
33۞ إِنَّ اللَّهَ اصْطَفَىٰ آدَمَ وَنُوحًا وَآلَ إِبْرَاهِيمَ وَآلَ عِمْرَانَ عَلَى الْعَالَمِينَ
बेशक ख़ुदा ने आदम और नूह और ख़ानदाने इबराहीम और खानदाने इमरान को सारे जहान से बरगुज़ीदा किया है
34ذُرِّيَّةً بَعْضُهَا مِن بَعْضٍ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
बाज़ की औलाद को बाज़ से और ख़ुदा (सबकी) सुनता (और सब कुछ) जानता है
35إِذْ قَالَتِ امْرَأَتُ عِمْرَانَ رَبِّ إِنِّي نَذَرْتُ لَكَ مَا فِي بَطْنِي مُحَرَّرًا فَتَقَبَّلْ مِنِّي ۖ إِنَّكَ أَنتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
(ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब इमरान की बीवी ने (ख़ुदा से) अर्ज़ की कि ऐ मेरे पालने वाले मेरे पेट में जो बच्चा है (उसको मैं दुनिया के काम से) आज़ाद करके तेरी नज़्र करती हूं तू मेरी तरफ़ से (ये नज़्र कुबूल फ़रमा तू बेशक बड़ा सुनने वाला और जानने वाला है
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अनुवाद — आल-इमरान 33

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Tuesday, August 18, 2026

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