Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَضَعَتْهَا: उसे जन्म दिया।
- أُنثَىٰ: लड़की।
- الذَّكَرُ: लड़का।
- أُعِيذُهَا: मैं उसे पनाह देती हूँ, सुरक्षा माँगती हूँ।
- الرَّجِيمِ: जो रहमत से दूर कर दिया गया हो (शैतान)।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत इमरान की पत्नी ने अपने पेट के बच्चे को अल्लाह की खिदमत (बैतुल-मुक़द्दस की सेवा) के लिए नज़र किया था, तो उन्होंने दिल में सोचा था कि शायद लड़का होगा जो मज़बूत होगा और मंदिर की सेवा अच्छी तरह कर सकेगा। लेकिन जब बच्ची पैदा हुई, तो वे शर्मिंदा हुईं और कहने लगीं: "ऐ मेरे रब! मैंने लड़की को जन्म दिया है।" वे समझ रही थीं कि लड़की इस खिदमत के लायक़ नहीं होगी, लेकिन अल्लाह तआला को सब कुछ मालूम था। अल्लाह ने उन्हें बताया कि वह जानता है कि यह लड़की क्या है और इसका क्या मुक़ाम होगा। यह लड़की दुनिया की सबसे अफ़ज़ल और पाक दामन औरतों में से एक होगी।
फिर उन्होंने कहा: "और लड़का उस लड़की जैसा नहीं हो सकता।" यानी मैंने सोचा था कि लड़का होगा तो बेहतर होगा, लेकिन अल्लाह ने जो दिया, वही बेहतर है। अल्लाह की नज़र में यह लड़की उन सब लड़कों से बेहतर है जो मंदिर की सेवा करते थे, क्योंकि अल्लाह ने उसे ख़ास मक़ाम के लिए चुना था।
फिर उन्होंने कहा: "मैंने उसका नाम मरियम रखा है।" और फिर उन्होंने दुआ की: "मैं उसे और उसकी औलाद को शैतान के शर से तेरी पनाह में देती हूँ।" यह दुआ अल्लाह ने क़ुबूल की, और हज़रत मरियम को शैतान के वसवसों से महफ़ूज़ रखा। यही वजह है कि हज़रत मरियम पाक दामन रहीं और उनकी औलाद में हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) जैसा महान नबी पैदा हुआ, जिन्होंने शैतान के वसवसों से लोगों को बचाने का काम किया।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह की रज़ा में बंदे की मर्ज़ी नहीं चलती। हम जो चाहते हैं, वह नहीं होता, लेकिन अल्लाह जो करता है, वही बेहतर होता है। हज़रत मरियम की माँ ने लड़का चाहा था, लेकिन अल्लाह ने उन्हें लड़की दी, और वह लड़की पूरी दुनिया की औरतों से बेहतर निकली। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह के फ़ैसले पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी रज़ा में राज़ी रहना चाहिए। अल्लाह जो देता है, उसमें हमारे लिए भलाई होती है, चाहे हमें समझ न आए। साथ ही, यह भी सीख है कि माँ-बाप को अपनी औलाद के लिए दुआ करनी चाहिए, ख़ासकर उन्हें शैतान के शर से अल्लाह की पनाह में देना चाहिए। यह दुआ औलाद की हिफ़ाज़त का ज़रिया बनती है।
📜 आयत 34-38 — सूरा आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 36
सूरा आल-इमरान आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब वह बेटी जन चुकी तो (हैरत से) कहने…सूरा आयत 36/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा आल-इमरान
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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