अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नज़र की (نذرت): अपने ऊपर अनिवार्य कर लिया, मन्नत मानी।
- मुहर्ररन (محررًا): आज़ाद किया हुआ, ख़ालिस, केवल इबादत के लिए समर्पित। यानी दुनिया के कामों से मुक्त होकर सिर्फ़ बैतुल-मुक़द्दस की खिदमत और अल्लाह की इबादत के लिए वक़्फ़ किया हुआ।
- फ़तक़ब्बल (فتقبل): मेरी तरफ़ से क़बूल फ़रमा, स्वीकार कर ले।
तफ़सीर:
ये वो वक़्त याद करो जब इमरान की बीवी (हज़रत मरियम की माँ) ने दुआ की। वो बांझ थीं और बुढ़ापे में उन्हें औलाद की तमन्ना हुई। जब अल्लाह ने उन्हें गर्भ दिया तो उन्होंने अपने रब से कहा: "ऐ मेरे रब! मैंने अपने ऊपर मन्नत ले ली है कि जो मेरे पेट में है, उसे मैं तेरी राह में ख़ालिस कर दूँगी — यानी उसे दुनिया के कामों से आज़ाद करके सिर्फ़ तेरी इबादत और तेरे घर (बैतुल-मुक़द्दस) की खिदमत के लिए वक़्फ़ कर दूँगी।" उन्होंने ये उम्मीद की थी कि लड़का होगा, क्योंकि उस ज़माने में सिर्फ़ लड़कों को ही मंदिर की खिदमत के लिए मुहर्रर किया जाता था। फिर उन्होंने दुआ की: "तो मेरी तरफ़ से इसे क़बूल फरमा। बेशक तू ही सब कुछ सुनने वाला है और मेरी नीयत को पूरी तरह जानने वाला है।"
फ़ायदे:
- अल्लाह से माँगने का सलीक़ा यही है कि इंसान अपनी नीयत को ख़ालिस करे और यक़ीन रखे कि अल्लाह दुआ सुनता है और नीयत जानता है।
- औलाद को अच्छी नीयत और अल्लाह की इबादत के लिए पालना बहुत बड़ी नेकी है। माँ-बाप की नीयत की बरकत से औलाद में बरकत आती है।
- इस्लाम में नेक काम की मन्नत मानना जायज़ है, और ये दिल की सच्चाई और अल्लाह से लगाव की निशानी है।
- अल्लाह के घर से जुड़ाव और उसकी खिदमत का शौक़ इंसान को बुलंद मुक़ाम तक पहुँचाता है — हज़रत मरियम जैसी पाक और बुलंद मरतबा वाली हस्ती इसी नीयत का नतीजा थीं।
- ये आयत हमें सिखाती है कि मुश्किलों में अल्लाह से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए — बुढ़ापे में भी दुआ क़बूल हो सकती है, जब दिल सच्चा हो।
📜 आयत 33-37 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 35
सूरा आल-इमरान आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब इमरान की बीवी…सूरा आयत 35/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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