आल-इमरान · 38/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
هُنَالِكَ دَعَا زَكَرِيَّا رَبَّهُ ۖ قَالَ رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً ۖ إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ ۝٣٨
Hunaaalika da`aa Zakariyyaa Rabbahoo qaala Rabbi hab lee mil ladunka zurriyyatan taiyibatan innaka samee`ud du`aaa
📖 हिंदी अर्थ
(ये माजरा देखते ही) उसी वक्त ज़करिया ने अपने परवरदिगार से दुआ कि और अर्ज क़ी ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (भी) अपनी बारगाह से पाकीज़ा औलाद अता फ़रमा बेशक तू ही दुआ का सुनने वाला है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • هُنَالِكَ: उस समय, उस स्थिति में।
  • مِن لَّدُنكَ: अपनी ओर से, अपने पास से, बिना किसी साधन के।
  • ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً: पवित्र, अच्छी और सच्ची संतान।
  • سَمِيعُ الدُّعَاءِ: दुआ सुनने वाला, अर्थात् दुआ को स्वीकार करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने देखा कि अल्लाह तआला ने हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) को उनके कमरे में ऐसा रिज़्क़ (आजीविका) प्रदान किया जो सामान्य नियमों के विपरीत था — बिना किसी साधन के, हर मौसम का फल उनके पास मौजूद था — तो यह देखकर उनके दिल में अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) के प्रति गहरा विश्वास और आशा पैदा हुई। वे स्वयं बहुत बूढ़े हो चुके थे और उनकी पत्नी भी बांझ थी, लेकिन अल्लाह की असीम शक्ति को देखकर उन्होंने महसूस किया कि अल्लाह के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। उन्होंने उसी समय अपने रब से दुआ की और कहा: "ऐ मेरे रब! मुझे अपनी ओर से एक पवित्र, अच्छी और सच्ची संतान प्रदान कर। मैं जानता हूँ कि तू हर दुआ सुनने वाला और उसे स्वीकार करने वाला है।" उन्होंने यह दुआ पूरी विनम्रता और आशा के साथ की, क्योंकि वे जानते थे कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे उम्र और साधनों की कमी कोई बाधा नहीं है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह की क़ुदरत पर भरोसा: जब इंसान अल्लाह की असीम शक्ति को देखता है, तो उसके दिल में आशा पैदा होती है। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के चमत्कार को देखकर दुआ की, जो हमें सिखाता है कि हमें भी अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए।
  2. दुआ की शक्ति: यह आयत हमें सिखाती है कि दुआ एक बहुत बड़ा हथियार है। चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों, अल्लाह से दुआ करना कभी बेकार नहीं जाता। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने बुढ़ापे और बांझपन के बावजूद दुआ की और अल्लाह ने उन्हें यह्या (अलैहिस्सलाम) जैसा पैग़म्बर पुत्र प्रदान किया।
  3. अच्छी संतान की चाहत: माता-पिता को चाहिए कि वे अपनी संतान के लिए दुआ करें कि वह पवित्र, नेक और अच्छी हो — न केवल दुनिया में कामयाब, बल्कि आख़िरत में भी कामयाब हो।
  4. अल्लाह से सीधा रिश्ता: यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान किसी माध्यम के बिना सीधे अल्लाह से दुआ कर सकता है। अल्लाह हर दुआ सुनता है और अपनी हिकमत के अनुसार उसे स्वीकार करता है।
  5. उम्मीद और आशा: इंसान को कभी निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह की रहमत और क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है। जब हालात मुश्किल हों, तो अल्लाह की ओर रुजू करना चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ कर सकता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 36-40 — आल-इमरान

36فَلَمَّا وَضَعَتْهَا قَالَتْ رَبِّ إِنِّي وَضَعْتُهَا أُنثَىٰ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا وَضَعَتْ وَلَيْسَ الذَّكَرُ كَالْأُنثَىٰ ۖ وَإِنِّي سَمَّيْتُهَا مَرْيَمَ وَإِنِّي أُعِيذُهَا بِكَ وَذُرِّيَّتَهَا مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
फिर जब वह बेटी जन चुकी तो (हैरत से) कहने लगी ऐ मेरे परवरदिगार (मैं क्या करूं) मैं तो ये लड़की जनी हूँ और लड़का लड़की के ऐसा (गया गुज़रा) नहीं होता हालॉकि उसे कहने की ज़रूरत क्या थी जो वे जनी थी ख़ुदा उस (की शान व मरतबा) से खूब वाक़िफ़ था और मैंने उसका नाम मरियम रखा है और मैं उसको और उसकी औलाद को शैतान मरदूद (के फ़रेब) से तेरी पनाह में देती हूं
37فَتَقَبَّلَهَا رَبُّهَا بِقَبُولٍ حَسَنٍ وَأَنبَتَهَا نَبَاتًا حَسَنًا وَكَفَّلَهَا زَكَرِيَّا ۖ كُلَّمَا دَخَلَ عَلَيْهَا زَكَرِيَّا الْمِحْرَابَ وَجَدَ عِندَهَا رِزْقًا ۖ قَالَ يَا مَرْيَمُ أَنَّىٰ لَكِ هَٰذَا ۖ قَالَتْ هُوَ مِنْ عِندِ اللَّهِ ۖ إِنَّ اللَّهَ يَرْزُقُ مَن يَشَاءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ
तो उसके परवरदिगार ने (उनकी नज़्र) मरियम को ख़ुशी से कुबूल फ़रमाया और उसकी नशो व नुमा (परवरिश) अच्छी तरह की और ज़करिया को उनका कफ़ील बनाया जब किसी वक्त ज़क़रिया उनके पास (उनके) इबादत के हुजरे में जाते तो मरियम के पास कुछ न कुछ खाने को मौजूद पाते तो पूंछते कि ऐ मरियम ये (खाना) तुम्हारे पास कहॉ से आया है तो मरियम ये कह देती थी कि यह खुदा के यहॉ से (आया) है बेशक ख़ुदा जिसको चाहता है बेहिसाब रोज़ी देता है
38هُنَالِكَ دَعَا زَكَرِيَّا رَبَّهُ ۖ قَالَ رَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةً ۖ إِنَّكَ سَمِيعُ الدُّعَاءِ
(ये माजरा देखते ही) उसी वक्त ज़करिया ने अपने परवरदिगार से दुआ कि और अर्ज क़ी ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (भी) अपनी बारगाह से पाकीज़ा औलाद अता फ़रमा बेशक तू ही दुआ का सुनने वाला है
39فَنَادَتْهُ الْمَلَائِكَةُ وَهُوَ قَائِمٌ يُصَلِّي فِي الْمِحْرَابِ أَنَّ اللَّهَ يُبَشِّرُكَ بِيَحْيَىٰ مُصَدِّقًا بِكَلِمَةٍ مِّنَ اللَّهِ وَسَيِّدًا وَحَصُورًا وَنَبِيًّا مِّنَ الصَّالِحِينَ
अभी ज़करिया हुजरे में खड़े (ये) दुआ कर ही रहे थे कि फ़रिश्तों ने उनको आवाज़ दी कि ख़ुदा तुमको यहया (के पैदा होने) की खुशख़बरी देता है जो जो कलेमतुल्लाह (ईसा) की तस्दीक़ करेगा और (लोगों का) सरदार होगा और औरतों की तरफ़ रग़बत न करेगा और नेको कार नबी होगा
40قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَامٌ وَقَدْ بَلَغَنِيَ الْكِبَرُ وَامْرَأَتِي عَاقِرٌ ۖ قَالَ كَذَٰلِكَ اللَّهُ يَفْعَلُ مَا يَشَاءُ
ज़करिया ने अर्ज़ की परवरदिगार मुझे लड़का क्योंकर हो सकता है हालॉकि मेरा बुढ़ापा आ पहुंचा और (उसपर) मेरी बीवी बॉझ है (ख़ुदा ने) फ़रमाया इसी तरह ख़ुदा जो चाहता है करता है
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अनुवाद — आल-इमरान 38

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Tuesday, August 18, 2026

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