अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُتَوَفِّيكَ – तुम्हें (नींद के द्वारा) पूरा लेने वाला, अर्थात तुम्हें सोते हुए अपनी ओर उठा लेने वाला।
- رَافِعُكَ – तुम्हें ऊपर उठाने वाला।
- مُطَهِّرُكَ – तुम्हें पवित्र करने वाला, यानी काफिरों की गंदगी और उनके नुकसान से बचाने वाला।
- اتَّبَعُوكَ – जो तुम्हारे अनुयायी हुए, यानी तुम्हारे दीन (एकेश्वरवाद) पर चलने वाले और अंत में मुहम्मद (ﷺ) पर ईमान लाने वाले।
- مَرْجِعُكُمْ – तुम सबका लौटना (क़ियामत के दिन)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस समय का ज़िक्र करती है जब अल्लाह तआला ने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को संबोधित करते हुए फ़रमाया: "ऐ ईसा! मैं तुम्हें (नींद के द्वारा) पूरा लेने वाला हूँ और तुम्हें अपनी ओर उठा लेने वाला हूँ।" यानी अल्लाह ने उन्हें काफिरों की चालों और उनके नुकसान से महफूज़ रखते हुए उन्हें आसमान की तरफ उठा लिया, जबकि उनके दुश्मन उन्हें सूली पर चढ़ाने की साज़िश कर रहे थे। अल्लाह ने उन्हें उस अपमान और तकलीफ से बचाकर पवित्र किया और काफिरों की गंदगी से दूर रखा।
फिर अल्लाह ने फ़रमाया: "और मैं तुम्हारे अनुयायियों को क़ियामत तक के दिन काफिरों के ऊपर ग़ालिब रखूँगा।" यहाँ "अनुयायी" से मुराद वे लोग हैं जो हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की लाई हुई तौहीद (एकेश्वरवाद) पर चले, और फिर जब नबी मुहम्मद (ﷺ) आए तो उन पर ईमान लाए और उनकी शरीअत को अपनाया। यही लोग हमेशा सच्चाई और बुरहान (प्रमाण) के साथ काफिरों पर हावी रहेंगे, चाहे कितने ही समय बीत जाएँ। यह अल्लाह का वादा है जो क़ियामत तक जारी रहेगा।
आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "फिर तुम सबका लौटना मेरी ही ओर है, और मैं तुम्हारे बीच उन बातों का फ़ैसला करूँगा जिनमें तुम मतभेद रखते थे।" यानी हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के मामले में लोगों ने अलग-अलग राय बनाईं—कुछ ने उन्हें अल्लाह का बेटा कहा, कुछ ने अल्लाह ही कहा, और कुछ ने उन्हें नबी माना। क़ियामत के दिन अल्लाह सबके बीच सच्चा और अदल भरा फ़ैसला करेगा।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त खुद करता है, चाहे दुश्मन कितनी भी साज़िशें कर लें। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से बचा लिया और उन्हें ऊपर उठा लिया। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी राह पर चलते रहें। साथ ही, यह आयत हमें बशारत देती है कि सच्चाई और ईमान की ताक़त हमेशा बुलंद रहती है, और अल्लाह अपने मोमिन बंदों को काफिरों पर ग़ालिब रखता है। हमें चाहिए कि हम अपने दीन को मज़बूती से पकड़ें, नबी मुहम्मद (ﷺ) की शरीअत का पालन करें, और यक़ीन रखें कि अल्लाह का वादा सच्चा है—आख़िरकार जीत ईमान वालों की ही होती है।
📜 आयत 53-57 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 55
सूरा आल-इमरान आयत 55 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और यहूदियों (ने ईसा से) मक्कारी की और ख़ुदा ने…सूरा आयत 55/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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