आल-इमरान · 55/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
إِذْ قَالَ اللَّهُ يَا عِيسَىٰ إِنِّي مُتَوَفِّيكَ وَرَافِعُكَ إِلَيَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا وَجَاعِلُ الَّذِينَ اتَّبَعُوكَ فَوْقَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ ۖ ثُمَّ إِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَأَحْكُمُ بَيْنَكُمْ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ ۝٥٥
Iz qaalal laahu yaa `Eesaaa innee mutawaffeeka wa raafi`uka ilaiya wa mutah hiruka minal lazeena kafaroo wa jaa`ilul lazeenattaba ooka fawqal lazeena kafarooo ilaa Yawmil Qiyaamati summa ilaiya marji`ukum fa ahkumu bainakum feemaa kuntum feehi takhtaliifoon
📖 हिंदी अर्थ
और यहूदियों (ने ईसा से) मक्कारी की और ख़ुदा ने उसके दफ़ईया की तदबीर की और ख़ुदा सब से बेहतर तदबीर करने वाला है (वह वक्त भी याद करो) जब ईसा से ख़ुदा ने फ़रमाया ऐ ईसा मैं ज़रूर तुम्हारी ज़िन्दगी की मुद्दत पूरी करके तुमको अपनी तरफ़ उठा लूंगा और काफ़िरों (की ज़िन्दगी) से तुमको पाक व पाकीज़ा रखूंगा और जिन लोगों ने तुम्हारी पैरवी की उनको क़यामत तक काफ़िरों पर ग़ालिब रखूंगा फिर तुम सबको मेरी तरफ़ लौटकर आना है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُتَوَفِّيكَ – तुम्हें (नींद के द्वारा) पूरा लेने वाला, अर्थात तुम्हें सोते हुए अपनी ओर उठा लेने वाला।
  • رَافِعُكَ – तुम्हें ऊपर उठाने वाला।
  • مُطَهِّرُكَ – तुम्हें पवित्र करने वाला, यानी काफिरों की गंदगी और उनके नुकसान से बचाने वाला।
  • اتَّبَعُوكَ – जो तुम्हारे अनुयायी हुए, यानी तुम्हारे दीन (एकेश्वरवाद) पर चलने वाले और अंत में मुहम्मद (ﷺ) पर ईमान लाने वाले।
  • مَرْجِعُكُمْ – तुम सबका लौटना (क़ियामत के दिन)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस समय का ज़िक्र करती है जब अल्लाह तआला ने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को संबोधित करते हुए फ़रमाया: "ऐ ईसा! मैं तुम्हें (नींद के द्वारा) पूरा लेने वाला हूँ और तुम्हें अपनी ओर उठा लेने वाला हूँ।" यानी अल्लाह ने उन्हें काफिरों की चालों और उनके नुकसान से महफूज़ रखते हुए उन्हें आसमान की तरफ उठा लिया, जबकि उनके दुश्मन उन्हें सूली पर चढ़ाने की साज़िश कर रहे थे। अल्लाह ने उन्हें उस अपमान और तकलीफ से बचाकर पवित्र किया और काफिरों की गंदगी से दूर रखा।

फिर अल्लाह ने फ़रमाया: "और मैं तुम्हारे अनुयायियों को क़ियामत तक के दिन काफिरों के ऊपर ग़ालिब रखूँगा।" यहाँ "अनुयायी" से मुराद वे लोग हैं जो हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की लाई हुई तौहीद (एकेश्वरवाद) पर चले, और फिर जब नबी मुहम्मद (ﷺ) आए तो उन पर ईमान लाए और उनकी शरीअत को अपनाया। यही लोग हमेशा सच्चाई और बुरहान (प्रमाण) के साथ काफिरों पर हावी रहेंगे, चाहे कितने ही समय बीत जाएँ। यह अल्लाह का वादा है जो क़ियामत तक जारी रहेगा।

आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "फिर तुम सबका लौटना मेरी ही ओर है, और मैं तुम्हारे बीच उन बातों का फ़ैसला करूँगा जिनमें तुम मतभेद रखते थे।" यानी हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के मामले में लोगों ने अलग-अलग राय बनाईं—कुछ ने उन्हें अल्लाह का बेटा कहा, कुछ ने अल्लाह ही कहा, और कुछ ने उन्हें नबी माना। क़ियामत के दिन अल्लाह सबके बीच सच्चा और अदल भरा फ़ैसला करेगा।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त खुद करता है, चाहे दुश्मन कितनी भी साज़िशें कर लें। हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से बचा लिया और उन्हें ऊपर उठा लिया। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी राह पर चलते रहें। साथ ही, यह आयत हमें बशारत देती है कि सच्चाई और ईमान की ताक़त हमेशा बुलंद रहती है, और अल्लाह अपने मोमिन बंदों को काफिरों पर ग़ालिब रखता है। हमें चाहिए कि हम अपने दीन को मज़बूती से पकड़ें, नबी मुहम्मद (ﷺ) की शरीअत का पालन करें, और यक़ीन रखें कि अल्लाह का वादा सच्चा है—आख़िरकार जीत ईमान वालों की ही होती है।



📜 आयत 53-57 — सूरा आल-इमरान

53رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلْتَ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ
और (ईसा से कहा) आप गवाह रहिए कि हम फ़रमाबरदार हैं
54وَمَكَرُوا وَمَكَرَ اللَّهُ ۖ وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ
और ख़ुदा की बारगाह में अर्ज़ की कि ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ तूने नाज़िल किया हम उसपर ईमान लाए और हमने तेरे रसूल (ईसा) की पैरवी इख्तेयार की पस तू हमें (अपने रसूल के) गवाहों के दफ्तर में लिख ले
55إِذْ قَالَ اللَّهُ يَا عِيسَىٰ إِنِّي مُتَوَفِّيكَ وَرَافِعُكَ إِلَيَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا وَجَاعِلُ الَّذِينَ اتَّبَعُوكَ فَوْقَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ ۖ ثُمَّ إِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَأَحْكُمُ بَيْنَكُمْ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ
और यहूदियों (ने ईसा से) मक्कारी की और ख़ुदा ने उसके दफ़ईया की तदबीर की और ख़ुदा सब से बेहतर तदबीर करने वाला है (वह वक्त भी याद करो) जब ईसा से ख़ुदा ने फ़रमाया ऐ ईसा मैं ज़रूर तुम्हारी ज़िन्दगी की मुद्दत पूरी करके तुमको अपनी तरफ़ उठा लूंगा और काफ़िरों (की ज़िन्दगी) से तुमको पाक व पाकीज़ा रखूंगा और जिन लोगों ने तुम्हारी पैरवी की उनको क़यामत तक काफ़िरों पर ग़ालिब रखूंगा फिर तुम सबको मेरी तरफ़ लौटकर आना है
56فَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَأُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا شَدِيدًا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
तब (उस दिन) जिन बातों में तुम (दुनिया) में झगड़े करते थे (उनका) तुम्हारे दरमियान फ़ैसला कर दूंगा पस जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनपर दुनिया और आख़िरत (दोनों में) सख्त अज़ाब करूंगा और उनका कोई मददगार न होगा
57وَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الظَّالِمِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए तो ख़ुदा उनको उनका पूरा अज्र व सवाब देगा और ख़ुदा ज़ालिमों को दोस्त नहीं रखता
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अनुवाद — आल-इमरान 55

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Wednesday, September 30, 2026

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