Wa makaroo wa makaral laahu wallaahu khairul maakireen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा की बारगाह में अर्ज़ की कि ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ तूने नाज़िल किया हम उसपर ईमान लाए और हमने तेरे रसूल (ईसा) की पैरवी इख्तेयार की पस तू हमें (अपने रसूल के) गवाहों के दफ्तर में लिख ले
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اور وہ (یعنی یہود قتل عیسیٰ کے بارے میں ایک) چال چلے اور خدا بھی (عیسیٰ کو بچانے کے لیے) چال چلا اور خدا خوب چال چلنے والا ہے
और ख़ुदा की बारगाह में अर्ज़ की कि ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ तूने नाज़िल किया हम उसपर ईमान लाए और हमने तेरे रसूल (ईसा) की पैरवी इख्तेयार की पस तू हमें (अपने रसूल के) गवाहों के दफ्तर में लिख ले
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
مَكَرُوا: उन्होंने चाल चली, अर्थात अपने बुरे इरादे को छिपाकर कोई योजना बनाई।
مَكَرَ اللهُ: अल्लाह ने भी उनकी चाल का जवाब दिया, अर्थात उनकी चाल को निष्फल कर दिया।
خَيْرُ الْمَاكِرِينَ: सबसे बेहतरीन चाल चलने वाला, अर्थात जिसकी चाल सबसे मजबूत और सबसे प्रभावी हो।
तफसीर (व्याख्या):
जब हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने बनी इसराइल के काफिरों के चेहरे पर कुफ्र और विद्रोह के निशान देखे, तो उन्होंने उनसे बचने की कोशिश की। उन काफिरों ने आपस में साजिश रची कि हज़रत ईसा को किसी तरह पकड़कर कत्ल कर दिया जाए। उन्होंने एक आदमी को उनके पास भेजा ताकि वह उन्हें पकड़वा सके। लेकिन अल्लाह ने उनकी इस चाल को नाकाम कर दिया। उस आदमी पर हज़रत ईसा की शक्ल डाल दी गई, और काफिरों ने उसी आदमी को पकड़कर सूली पर चढ़ा दिया, जबकि अल्लाह ने हज़रत ईसा को आसमान की तरफ उठा लिया। इस तरह अल्लाह ने उनकी साजिश को उन्हीं पर उलट दिया। अल्लाह सबसे बेहतरीन चाल चलने वाला है, क्योंकि उसकी चाल न्याय और हिकमत पर आधारित होती है, और वह अपने दुश्मनों को उनकी साजिश का बदला देता है। यहाँ अल्लाह के लिए "मक्र" (चाल) का शब्द उसके जलाल और कमाल के अनुसार है, जो सिर्फ उन लोगों के मुकाबले में है जो खुद चालें चलते हैं।
फ़ायदे (सबक):
अल्लाह की ताकत और हिकमत असीम है। वह अपने नेक बंदों की हिफाज़त उन तरीकों से करता है जिनका अंदाज़ा इंसान नहीं लगा सकता।
ज़ालिमों की साजिशें चाहे कितनी भी मजबूत क्यों न हों, अल्लाह के सामने बेकार हैं। वह उन्हें उनकी चाल का बदला देकर उन्हें रुसवा करता है।
अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह हर मुश्किल से निकलने का रास्ता निकालता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि बुराई का जवाब अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए, और हमें खुद ज़ुल्म और साजिशों से बचना चाहिए।
अल्लाह की सिफ़ात (गुण) उसके जलाल और कमाल के अनुसार हैं, और हमें उन्हें उसी तरह मानना चाहिए जैसे वह खुद बयान करता है, बिना किसी तशबीह (समानता) के।
पस उसकी इबादत करो (क्योंकि) यही नजात का सीधा रास्ता है फिर जब ईसा ने (इतनी बातों के बाद भी) उनका कुफ़्र (पर अड़े रहना) देखा तो (आख़िर) कहने लगे कौन ऐसा है जो ख़ुदा की तरफ़ होकर मेरा मददगार बने (ये सुनकर) हवारियों ने कहा हम ख़ुदा के तरफ़दार हैं और हम ख़ुदा पर ईमान लाए
और ख़ुदा की बारगाह में अर्ज़ की कि ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ तूने नाज़िल किया हम उसपर ईमान लाए और हमने तेरे रसूल (ईसा) की पैरवी इख्तेयार की पस तू हमें (अपने रसूल के) गवाहों के दफ्तर में लिख ले
और यहूदियों (ने ईसा से) मक्कारी की और ख़ुदा ने उसके दफ़ईया की तदबीर की और ख़ुदा सब से बेहतर तदबीर करने वाला है (वह वक्त भी याद करो) जब ईसा से ख़ुदा ने फ़रमाया ऐ ईसा मैं ज़रूर तुम्हारी ज़िन्दगी की मुद्दत पूरी करके तुमको अपनी तरफ़ उठा लूंगा और काफ़िरों (की ज़िन्दगी) से तुमको पाक व पाकीज़ा रखूंगा और जिन लोगों ने तुम्हारी पैरवी की उनको क़यामत तक काफ़िरों पर ग़ालिब रखूंगा फिर तुम सबको मेरी तरफ़ लौटकर आना है
तब (उस दिन) जिन बातों में तुम (दुनिया) में झगड़े करते थे (उनका) तुम्हारे दरमियान फ़ैसला कर दूंगा पस जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनपर दुनिया और आख़िरत (दोनों में) सख्त अज़ाब करूंगा और उनका कोई मददगार न होगा
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