अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- كَفَرُوا: इनकार किया, अविश्वास किया।
- عَذَابًا شَدِيدًا: बहुत सख्त और भयंकर यातना।
- نَّاصِرِينَ: मददगार, सहायक।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में उन लोगों के अंजाम को स्पष्ट कर दिया है जिन्होंने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में सही रास्ता नहीं अपनाया। यानी जिन यहूदियों ने उन्हें झुठलाया और उन पर इल्ज़ाम लगाया, और जिन नसारा (ईसाइयों) ने उन्हें खुदा का बेटा कहकर ग़ुलू (अतिशयोक्ति) किया — इन दोनों तरह के काफिरों के लिए अल्लाह ने दोहरी सज़ा का एलान किया है।
पहली सज़ा दुनिया में है — जैसे क़त्ल (हत्या), क़ैद (बंदी), ज़िल्लत (अपमान), माल की लूट, और उनके राज्य व ताकत का खात्मा। यह वादा पूरा हुआ जब अल्लाह ने उन्हें मुसलमानों के हाथों सज़ा दी और उनका दबदबा मिटा दिया। दूसरी सज़ा आख़िरत में है — यानी जहन्नम की आग, जो सबसे भयंकर और हमेशा रहने वाली है।
इस आयत में अल्लाह ने यह भी बताया कि उस दिन उन काफिरों का कोई मददगार नहीं होगा। न कोई उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा सकेगा, न कोई उनकी सिफ़ारिश करेगा। वे बिल्कुल अकेले और बेबस होंगे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और साथ ही यह सिखाती है कि सच्चे ईमान और सीधे रास्ते पर चलना ही कामयाबी की कुंजी है। जिसने भी हक़ (सच्चाई) को झुठलाया या उसमें ग़ुलू किया, उसका अंजाम बुरा हुआ। लेकिन अल्लाह की रहमत यह है कि उसने हमें सही रास्ता दिखाया — इस्लाम का रास्ता, जो हर नबी की तालीम पर ईमान रखता है और किसी भी नबी के बारे में ग़लत बात नहीं कहता। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों पर अमल करें, उसकी नाफ़रमानी से बचें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा (खुशी) के मुताबिक बनाएं। याद रखें, अल्लाह का वादा सच्चा है — नेक लोगों के लिए जन्नत और बुरे लोगों के लिए जहन्नम। आओ हम उन लोगों में से बनें जो अल्लाह की रहमत के हक़दार हैं, न कि उसके अज़ाब के।
📜 आयत 54-58 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 56
सूरा आल-इमरान आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तब (उस दिन) जिन बातों में तुम (दुनिया) में झगड़े…सूरा आयत 56/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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