आल-इमरान · 56/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
فَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَأُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا شَدِيدًا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ ۝٥٦
Fa ammal lazeena kafaroo fa u`az zibuhum `azaaban shadeedan fiddunyaa wal Aakhirati wa maa lahum min naasireen
📖 हिंदी अर्थ
तब (उस दिन) जिन बातों में तुम (दुनिया) में झगड़े करते थे (उनका) तुम्हारे दरमियान फ़ैसला कर दूंगा पस जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनपर दुनिया और आख़िरत (दोनों में) सख्त अज़ाब करूंगा और उनका कोई मददगार न होगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَفَرُوا: इनकार किया, अविश्वास किया।
  • عَذَابًا شَدِيدًا: बहुत सख्त और भयंकर यातना।
  • نَّاصِرِينَ: मददगार, सहायक।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में उन लोगों के अंजाम को स्पष्ट कर दिया है जिन्होंने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में सही रास्ता नहीं अपनाया। यानी जिन यहूदियों ने उन्हें झुठलाया और उन पर इल्ज़ाम लगाया, और जिन नसारा (ईसाइयों) ने उन्हें खुदा का बेटा कहकर ग़ुलू (अतिशयोक्ति) किया — इन दोनों तरह के काफिरों के लिए अल्लाह ने दोहरी सज़ा का एलान किया है।

पहली सज़ा दुनिया में है — जैसे क़त्ल (हत्या), क़ैद (बंदी), ज़िल्लत (अपमान), माल की लूट, और उनके राज्य व ताकत का खात्मा। यह वादा पूरा हुआ जब अल्लाह ने उन्हें मुसलमानों के हाथों सज़ा दी और उनका दबदबा मिटा दिया। दूसरी सज़ा आख़िरत में है — यानी जहन्नम की आग, जो सबसे भयंकर और हमेशा रहने वाली है।

इस आयत में अल्लाह ने यह भी बताया कि उस दिन उन काफिरों का कोई मददगार नहीं होगा। न कोई उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा सकेगा, न कोई उनकी सिफ़ारिश करेगा। वे बिल्कुल अकेले और बेबस होंगे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और साथ ही यह सिखाती है कि सच्चे ईमान और सीधे रास्ते पर चलना ही कामयाबी की कुंजी है। जिसने भी हक़ (सच्चाई) को झुठलाया या उसमें ग़ुलू किया, उसका अंजाम बुरा हुआ। लेकिन अल्लाह की रहमत यह है कि उसने हमें सही रास्ता दिखाया — इस्लाम का रास्ता, जो हर नबी की तालीम पर ईमान रखता है और किसी भी नबी के बारे में ग़लत बात नहीं कहता। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों पर अमल करें, उसकी नाफ़रमानी से बचें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा (खुशी) के मुताबिक बनाएं। याद रखें, अल्लाह का वादा सच्चा है — नेक लोगों के लिए जन्नत और बुरे लोगों के लिए जहन्नम। आओ हम उन लोगों में से बनें जो अल्लाह की रहमत के हक़दार हैं, न कि उसके अज़ाब के।



📜 आयत 54-58 — आल-इमरान

54وَمَكَرُوا وَمَكَرَ اللَّهُ ۖ وَاللَّهُ خَيْرُ الْمَاكِرِينَ
और ख़ुदा की बारगाह में अर्ज़ की कि ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ तूने नाज़िल किया हम उसपर ईमान लाए और हमने तेरे रसूल (ईसा) की पैरवी इख्तेयार की पस तू हमें (अपने रसूल के) गवाहों के दफ्तर में लिख ले
55إِذْ قَالَ اللَّهُ يَا عِيسَىٰ إِنِّي مُتَوَفِّيكَ وَرَافِعُكَ إِلَيَّ وَمُطَهِّرُكَ مِنَ الَّذِينَ كَفَرُوا وَجَاعِلُ الَّذِينَ اتَّبَعُوكَ فَوْقَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ ۖ ثُمَّ إِلَيَّ مَرْجِعُكُمْ فَأَحْكُمُ بَيْنَكُمْ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ
और यहूदियों (ने ईसा से) मक्कारी की और ख़ुदा ने उसके दफ़ईया की तदबीर की और ख़ुदा सब से बेहतर तदबीर करने वाला है (वह वक्त भी याद करो) जब ईसा से ख़ुदा ने फ़रमाया ऐ ईसा मैं ज़रूर तुम्हारी ज़िन्दगी की मुद्दत पूरी करके तुमको अपनी तरफ़ उठा लूंगा और काफ़िरों (की ज़िन्दगी) से तुमको पाक व पाकीज़ा रखूंगा और जिन लोगों ने तुम्हारी पैरवी की उनको क़यामत तक काफ़िरों पर ग़ालिब रखूंगा फिर तुम सबको मेरी तरफ़ लौटकर आना है
56فَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَأُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا شَدِيدًا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
तब (उस दिन) जिन बातों में तुम (दुनिया) में झगड़े करते थे (उनका) तुम्हारे दरमियान फ़ैसला कर दूंगा पस जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनपर दुनिया और आख़िरत (दोनों में) सख्त अज़ाब करूंगा और उनका कोई मददगार न होगा
57وَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الظَّالِمِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए तो ख़ुदा उनको उनका पूरा अज्र व सवाब देगा और ख़ुदा ज़ालिमों को दोस्त नहीं रखता
58ذَٰلِكَ نَتْلُوهُ عَلَيْكَ مِنَ الْآيَاتِ وَالذِّكْرِ الْحَكِيمِ
(ऐ रसूल) ये जो हम तुम्हारे सामने बयान कर रहे हैं कुदरते ख़ुदा की निशानियॉ और हिकमत से भरे हुये तज़किरे हैं
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अनुवाद — आल-इमरान 56

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Tuesday, August 18, 2026

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