आल-इमरान · 92/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
لَن تَنَالُوا الْبِرَّ حَتَّىٰ تُنفِقُوا مِمَّا تُحِبُّونَ ۚ وَمَا تُنفِقُوا مِن شَيْءٍ فَإِنَّ اللَّهَ بِهِ عَلِيمٌ ۝٩٢
Lan tanaalul birra hattaa tunfiqoo mimmaa tuhibboon; wa maa tunfiqoo min shai`in fa innal laaha bihee `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
(लोगों) जब तक तुम अपनी पसन्दीदा चीज़ों में से कुछ राहे ख़ुदा में ख़र्च न करोगे हरगिज़ नेकी के दरजे पर फ़ायज़ नहीं हो सकते और तुम कोई

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْبِرَّ: नेकी, भलाई, और यहाँ इसका अर्थ जन्नत और नेक लोगों का दर्जा पाना है।
  • تُنفِقُوا: खर्च करना, दान देना।
  • مِمَّا تُحِبُّونَ: उन चीज़ों में से जो तुम्हें प्रिय हैं।
  • عَلِيم: सब कुछ जानने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालों! तुम सच्ची नेकी और उसके पूरे दर्जे तक तब तक नहीं पहुँच सकते, जब तक कि तुम अपनी सबसे प्यारी और प्रिय चीज़ों में से अल्लाह की राह में खर्च न करो। यह एक बड़ी परीक्षा है — क्या तुम उस चीज़ को छोड़ सकते हो जो तुम्हारे दिल को सबसे ज़्यादा अज़ीज़ है? क्या तुम अपनी पसंदीदा चीज़ को अल्लाह की खातिर कुर्बान कर सकते हो?

यह आयत हमें सिखाती है कि नेकी का असली मक़ाम वहीं से शुरू होता है जहाँ हम अपनी पसंद से ऊपर अल्लाह की पसंद को रखते हैं। जब हम वह खर्च करते हैं जो हमें बहुत प्यारा है — चाहे वह धन हो, समय हो, या कोई और चीज़ — तभी हमारी नेकी असली बनती है। यही वह चीज़ है जो हमें जन्नत के करीब ले जाती है।

फिर अल्लाह तआला हमें आश्वस्त करता है: तुम जो भी खर्च करोगे — चाहे वह थोड़ा हो या बहुत — अल्लाह उसे पूरी तरह जानता है। वह तुम्हारी नीयत को देखता है, तुम्हारे काम को देखता है, और उसका हिसाब रखता है। कोई भी दान, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, अल्लाह की नज़र से छिपा नहीं है। वह हर चीज़ का बदला देने वाला है — और उसका बदला बहुत बड़ा है।

याद रखो, अल्लाह को तुम्हारे धन की ज़रूरत नहीं है, बल्कि उसे तुम्हारे दिल की सच्चाई और तुम्हारी नीयत की पवित्रता की परख है। जब तुम अपनी पसंदीदा चीज़ को अल्लाह की राह में देते हो, तो तुम वास्तव में अपने आपको बड़ा बनाते हो — क्योंकि तुम दुनिया की मोहब्बत से ऊपर उठकर अल्लाह की मोहब्बत को चुनते हो।

यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम में दान का महत्व सिर्फ पैसे देने से नहीं है, बल्कि दिल की गहराई से देने से है। जो व्यक्ति अपनी सबसे प्यारी चीज़ को अल्लाह की राह में खर्च करता है, वह उस मुकाम पर पहुँचता है जहाँ नेकियाँ उसका साथ देती हैं और जन्नत उसका इंतज़ार करती है।

तो आज ही सोचिए — आपके पास सबसे प्यारी चीज़ क्या है? क्या आप उसे अल्लाह की राह में देने के लिए तैयार हैं? याद रखिए, जो आप अल्लाह की राह में खर्च करते हैं, वह कभी ज़ाया नहीं होता — अल्लाह उसे कई गुना बढ़ाकर लौटाता है, और उसका इनाम आपके लिए हमेशा के लिए सुरक्षित रहता है।



📜 आयत 90-94 — आल-इमरान

90إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَانِهِمْ ثُمَّ ازْدَادُوا كُفْرًا لَّن تُقْبَلَ تَوْبَتُهُمْ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الضَّالُّونَ
जो अपने ईमान के बाद काफ़िर हो बैठे फ़िर (रोज़ बरोज़ अपना) कुफ़्र बढ़ाते चले गये तो उनकी तौबा हरगिज़ न कुबूल की जाएगी और यही लोग (पल्ले दरजे के) गुमराह हैं
91إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَن يُقْبَلَ مِنْ أَحَدِهِم مِّلْءُ الْأَرْضِ ذَهَبًا وَلَوِ افْتَدَىٰ بِهِ ۗ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तियार किया और कुफ़्र की हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी (छुटकारा पाने) में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कुबूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा
92لَن تَنَالُوا الْبِرَّ حَتَّىٰ تُنفِقُوا مِمَّا تُحِبُّونَ ۚ وَمَا تُنفِقُوا مِن شَيْءٍ فَإِنَّ اللَّهَ بِهِ عَلِيمٌ
(लोगों) जब तक तुम अपनी पसन्दीदा चीज़ों में से कुछ राहे ख़ुदा में ख़र्च न करोगे हरगिज़ नेकी के दरजे पर फ़ायज़ नहीं हो सकते और तुम कोई
93۞ كُلُّ الطَّعَامِ كَانَ حِلًّا لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ إِلَّا مَا حَرَّمَ إِسْرَائِيلُ عَلَىٰ نَفْسِهِ مِن قَبْلِ أَن تُنَزَّلَ التَّوْرَاةُ ۗ قُلْ فَأْتُوا بِالتَّوْرَاةِ فَاتْلُوهَا إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
सी चीज़ भी ख़र्च करो ख़ुदा तो उसको ज़रूर जानता है तौरैत के नाज़िल होने के क़ब्ल याकूब ने जो जो चीज़े अपने ऊपर हराम कर ली थीं उनके सिवा बनी इसराइल के लिए सब खाने हलाल थे (ऐ रसूल उन यहूद से) कह दो कि अगर तुम (अपने दावे में सच्चे हो तो तौरेत ले आओ
94فَمَنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ الْكَذِبَ مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الظَّالِمُونَ
और उसको (हमारे सामने) पढ़ो फिर उसके बाद भी जो कोई ख़ुदा पर झूठ तूफ़ान जोड़े तो (समझ लो) कि यही लोग ज़ालिम (हठधर्म) हैं
आल-इमरानकुरान सूची
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92आयत

अनुवाद — आल-इमरान 92

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Tuesday, August 18, 2026

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