आल-इमरान · 91/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَن يُقْبَلَ مِنْ أَحَدِهِم مِّلْءُ الْأَرْضِ ذَهَبًا وَلَوِ افْتَدَىٰ بِهِ ۗ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ ۝٩١
Innal lazeena kafaroo wa maatoo wa hum kuffaarun falany yuqbala min ahadihim mil`ul ardi zahabanw wa lawiftadaa bih; ulaaa `ika lahum `azaabun aleemunw wa maa lahum min naasireen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तियार किया और कुफ़्र की हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी (छुटकारा पाने) में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कुबूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِلْءُ الْأَرْضِ: पूरी धरती को भरने के बराबर (मात्रा)।
  • وَهُوَ كُفَّارٌ: कुफ्र (अविश्वास) की हालत में मृत्यु को प्राप्त होना।
  • افْتَدَىٰ: बदले में कुछ देकर अपने आपको छुड़ाना, फिदया देना।
  • عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक (बहुत ही तकलीफ़देह) यातना।
  • نَّاصِرِينَ: मददगार, सहायक।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के साथ कुफ्र (इनकार) किया और इसी कुफ्र की हालत में उनकी मौत हो गई। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों से क़यामत के दिन कोई फिदया (मुआवज़ा) हरगिज़ क़बूल नहीं किया जाएगा, चाहे वे पूरी धरती भर सोना ही क्यों न दें। यानी अगर वे अपने आपको अल्लाह के अज़ाब से बचाने के लिए सारी दुनिया की दौलत भी दे दें, तो भी उनसे यह क़बूल नहीं किया जाएगा। यह बात उनके कुफ्र और अल्लाह की राह से भटकने की सज़ा है।

ऐसे लोगों के लिए क़यामत के दिन दर्दनाक अज़ाब तैयार है, और उनका कोई मददगार नहीं होगा जो उन्हें अल्लाह की यातना से बचा सके या उनके दुख को कम कर सके। यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो हक़ (सत्य) को जानते हुए भी उसे ठुकरा देते हैं और मौत तक इसी हालत पर क़ायम रहते हैं।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान (विश्वास) और अच्छे आचरण की क़ीमत दुनिया के सारे खज़ानों से बढ़कर है। अल्लाह के पास सिर्फ़ वही चीज़ क़बूल होती है जो ईमान और नेकी के साथ हो।
  2. मौत से पहले तौबा (पश्चाताप) और ईमान की ओर लौटना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि मौत के बाद कोई मौका नहीं मिलेगा। कुफ्र और गुनाह की हालत में मरना सबसे बड़ा नुक़सान है।
  3. दुनिया की दौलत और माल-ओ-दौलत आख़िरत के अज़ाब से नहीं बचा सकती। सच्ची नजात (मुक्ति) सिर्फ़ अल्लाह की रहमत और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाने में है।
  4. यह आयत हमें अल्लाह के दीन (धर्म) को अपनाने और उस पर साबित क़दम रहने की तरग़ीब (प्रेरणा) देती है, ताकि हम उन लोगों में से न हों जिनका कोई मददगार नहीं होगा।
  5. मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी ज़िंदगी को ईमान और अच्छे कर्मों से सजाए, और कभी भी अल्लाह की रहमत से निराश न हो, बल्कि हर हाल में उसकी तरफ़ रुजू करे।


📜 आयत 89-93 — आल-इमरान

89إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا مِن بَعْدِ ذَٰلِكَ وَأَصْلَحُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
मगर (हॉ) जिन लोगों ने इसके बाद तौबा कर ली और अपनी (ख़राबी की) इस्लाह कर ली तो अलबत्ता ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
90إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا بَعْدَ إِيمَانِهِمْ ثُمَّ ازْدَادُوا كُفْرًا لَّن تُقْبَلَ تَوْبَتُهُمْ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الضَّالُّونَ
जो अपने ईमान के बाद काफ़िर हो बैठे फ़िर (रोज़ बरोज़ अपना) कुफ़्र बढ़ाते चले गये तो उनकी तौबा हरगिज़ न कुबूल की जाएगी और यही लोग (पल्ले दरजे के) गुमराह हैं
91إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَمَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَن يُقْبَلَ مِنْ أَحَدِهِم مِّلْءُ الْأَرْضِ ذَهَبًا وَلَوِ افْتَدَىٰ بِهِ ۗ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तियार किया और कुफ़्र की हालत में मर गये तो अगरचे इतना सोना भी किसी की गुलू ख़लासी (छुटकारा पाने) में दिया जाए कि ज़मीन भर जाए तो भी हरगिज़ न कुबूल किया जाएगा यही लोग हैं जिनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा और उनका कोई मददगार भी न होगा
92لَن تَنَالُوا الْبِرَّ حَتَّىٰ تُنفِقُوا مِمَّا تُحِبُّونَ ۚ وَمَا تُنفِقُوا مِن شَيْءٍ فَإِنَّ اللَّهَ بِهِ عَلِيمٌ
(लोगों) जब तक तुम अपनी पसन्दीदा चीज़ों में से कुछ राहे ख़ुदा में ख़र्च न करोगे हरगिज़ नेकी के दरजे पर फ़ायज़ नहीं हो सकते और तुम कोई
93۞ كُلُّ الطَّعَامِ كَانَ حِلًّا لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ إِلَّا مَا حَرَّمَ إِسْرَائِيلُ عَلَىٰ نَفْسِهِ مِن قَبْلِ أَن تُنَزَّلَ التَّوْرَاةُ ۗ قُلْ فَأْتُوا بِالتَّوْرَاةِ فَاتْلُوهَا إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
सी चीज़ भी ख़र्च करो ख़ुदा तो उसको ज़रूर जानता है तौरैत के नाज़िल होने के क़ब्ल याकूब ने जो जो चीज़े अपने ऊपर हराम कर ली थीं उनके सिवा बनी इसराइल के लिए सब खाने हलाल थे (ऐ रसूल उन यहूद से) कह दो कि अगर तुम (अपने दावे में सच्चे हो तो तौरेत ले आओ
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अनुवाद — आल-इमरान 91

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Tuesday, August 18, 2026

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