अर-रूम · 20/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَمِنْ آيَاتِهِ أَنْ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ إِذَا أَنتُم بَشَرٌ تَنتَشِرُونَ ۝٢٠
Wa min Aayaatiheee an khalaqakum min turaabin summa izaaa antum basharun tantashiroon
📖 हिंदी अर्थ
और उस (की कुदरत) की निशानियों में ये भी है कि उसने तुमको मिट्टी से पैदा किया फिर यकायक तुम आदमी बनकर (ज़मीन पर) चलने फिरने लगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • आयात: निशानियाँ, सबूत, दलीलें
  • خَلَقَكُم: उसने तुम्हें पैदा किया (यहाँ तुम्हारे मूल यानी आदम अलैहिस्सलाम का ज़िक्र है)
  • مِن تُرَاب: मिट्टी से
  • تَنتَشِرُونَ: फैलते हो, पृथ्वी पर फैल जाते हो

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपनी बेपनाह क़ुदरत और वहदानियत की उन निशानियों का ज़िक्र कर रहा है जो उसकी अज़मत और कमाल ताक़त पर दलालत करती हैं। उन्हीं निशानियों में से एक यह अज़ीम निशानी है कि उसने तुम्हें मिट्टी से पैदा किया। यानी तुम्हारे आदिम मूल यानी हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को मिट्टी से बनाया, फिर उसमें रूह फूँकी और उसे ज़िंदगी अता की। और अब देखो कि तुम इंसान बनकर पृथ्वी के कोने-कोने में फैल गए हो, पूर्व और पश्चिम की तरफ़ निकल पड़े हो, अल्लाह की रिज़्क़ की तलाश में इधर-उधर भागते हो, और अपनी नस्लों को बढ़ाते जा रहे हो।

यह एक बेहद हैरतअंगेज़ मंज़र है कि बेजान मिट्टी से ज़िंदा इंसान बनाया गया। यही अल्लाह की क़ुदरत की सबसे बड़ी दलील है कि जिसने मिट्टी से इंसान को पैदा किया, वही उसे दोबारा ज़िंदा करके उठाने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। जब वह पहली बार पैदा कर सकता है तो दोबारा पैदा करना उसके लिए और भी आसान है।

इस आयत में इंसान के लिए बड़ी सीख और इबरत है। जब तुम अपनी पैदाइश पर ग़ौर करो कि तुम्हारी शुरुआत मिट्टी से हुई, तो तुम्हें अपने अंदर ग़ुरूर और घमंड नहीं आना चाहिए। तुम्हारी असलियत मिट्टी है, और तुम्हें एक दिन फिर मिट्टी में मिल जाना है। यह सोचकर इंसान को अल्लाह के सामने झुकना चाहिए, उसकी इबादत करनी चाहिए और उसके हुक्मों की पैरवी करनी चाहिए।

यह आयत हमें अल्लाह की तरफ़ रुजू करने की तरग़ीब देती है। जिस अल्लाह ने हमें मिट्टी से पैदा करके यह शानदार ज़िंदगी अता की, उसका शुक्र अदा करना हमारा फ़र्ज़ है। हमें चाहिए कि इस नेमत पर अल्लाह का शुक्र बजा लाएँ, उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें, और उस रास्ते पर चलें जो उसने अपने नबी ﷺ के ज़रिए हमें दिखाया है। यही हमारी कामयाबी और नजात का ज़रिया है।



📜 आयत 18-22 — अर-रूम

18وَلَهُ الْحَمْدُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَعَشِيًّا وَحِينَ تُظْهِرُونَ
और सारे आसमान व ज़मीन में तीसरे पहर को और जिस वक्त तुम लोगों की दोपहर हो जाए वही क़ाबिले तारीफ़ है
19يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَيُخْرِجُ الْمَيِّتَ مِنَ الْحَيِّ وَيُحْيِي الْأَرْضَ بَعْدَ مَوْتِهَا ۚ وَكَذَٰلِكَ تُخْرَجُونَ
वही ज़िन्दा को मुर्दे से निकालता है और वही मुर्दे को जिन्दा से पैदा करता है और ज़मीन को मरने (परती होने) के बाद ज़िन्दा (आबाद) करता है और इसी तरह तुम लोग भी (मरने के बाद निकाले जाओगे)
20وَمِنْ آيَاتِهِ أَنْ خَلَقَكُم مِّن تُرَابٍ ثُمَّ إِذَا أَنتُم بَشَرٌ تَنتَشِرُونَ
और उस (की कुदरत) की निशानियों में ये भी है कि उसने तुमको मिट्टी से पैदा किया फिर यकायक तुम आदमी बनकर (ज़मीन पर) चलने फिरने लगे
21وَمِنْ آيَاتِهِ أَنْ خَلَقَ لَكُم مِّنْ أَنفُسِكُمْ أَزْوَاجًا لِّتَسْكُنُوا إِلَيْهَا وَجَعَلَ بَيْنَكُم مَّوَدَّةً وَرَحْمَةً ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
और उसी की (क़ुदरत) की निशानियों में से एक ये (भी) है कि उसने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी ही जिन्स की बीवियाँ पैदा की ताकि तुम उनके साथ रहकर चैन करो और तुम लोगों के दरमेयान प्यार और उलफ़त पैदा कर दी इसमें शक नहीं कि इसमें ग़ौर करने वालों के वास्ते (क़ुदरते ख़ुदा की) यक़ीनी बहुत सी निशानियाँ हैं
22وَمِنْ آيَاتِهِ خَلْقُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَاخْتِلَافُ أَلْسِنَتِكُمْ وَأَلْوَانِكُمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّلْعَالِمِينَ
और उस (की कुदरत) की निशानियों में आसमानो और ज़मीन का पैदा करना और तुम्हारी ज़बानो और रंगतो का एख़तेलाफ भी है यकीनन इसमें वाक़िफकारों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं
अर-रूमकुरान सूची
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अनुवाद — अर-रूम 20

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Tuesday, August 18, 2026

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