लुकमान · 22/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
۞ وَمَن يُسْلِمْ وَجْهَهُ إِلَى اللَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ فَقَدِ اسْتَمْسَكَ بِالْعُرْوَةِ الْوُثْقَىٰ ۗ وَإِلَى اللَّهِ عَاقِبَةُ الْأُمُورِ ۝٢٢
Wa many yuslim wajha hooo ilal laahi wa huwa muhsinun faqadistamsaka bil`ur watil wusqaa; wa ilal laahi `aaqibatul umoor
📖 हिंदी अर्थ
और जो शख्स ख़ुदा के आगे अपना सर (तस्लीम) ख़म करे और वह नेकोकार (भी) हो तो बेशक उसने (ईमान की) मज़बूत रस्सी पकड़ ली और (आख़िर तो) सब कामों का अन्जाम ख़ुदा ही की तरफ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُسْلِمْ وَجْهَهُ – अपने चेहरे को (अर्थात अपने आप को) पूर्ण रूप से समर्पित कर दे।
  • مُحْسِنٌ – नेकी करने वाला, अपने अमल को अच्छी तरह से करने वाला।
  • الْعُرْوَةِ الْوُثْقَى – मज़बूत रस्सी (या पकड़), जो कभी टूटती नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि जो व्यक्ति अपने चेहरे को अल्लाह की ओर कर लेता है, यानी अपनी पूरी ज़िंदगी, अपनी इबादत, अपनी नीयत और अपने इरादे को सिर्फ़ अल्लाह के लिए समर्पित कर देता है, और वह मुहसिन भी हो – यानी अपने अमल को अच्छी तरह से, ख़ालिस नीयत के साथ और सुन्नत के अनुसार करता है – तो उसने "उर्वतुल-वुस्क़ा" यानी वो मज़बूत रस्सी पकड़ ली है जो कभी नहीं टूटती। यह रस्सी "ला इलाहा इल्लल्लाह" (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं) का कलमा है, जो ईमान की सबसे मज़बूत कड़ी है। जिसने इस रस्सी को पकड़ लिया, वह गुमराही से बच गया, हिदायत पर क़ायम रहा, और उसका भरोसा उस ज़ात पर टिक गया जो कभी ज़वाल नहीं होती।

फिर अल्लाह फ़रमाते हैं: "और अल्लाह ही की ओर सभी मामलों का अंजाम है।" यानी दुनिया के सारे काम, चाहे वो अच्छे हों या बुरे, आख़िरकार अल्लाह ही की ओर लौटने वाले हैं। क़यामत के दिन सब कुछ उसी के सामने पेश होगा, और हर इंसान को उसके अमल का पूरा-पूरा बदला मिलेगा – नेकी करने वाले को उसकी नेकी का अज्र, और बुराई करने वाले को उसकी सज़ा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि सच्ची कामयाबी और सुकून का रास्ता सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ रुजू करने में है। जब इंसान अपने आप को पूरी तरह अल्लाह के हवाले कर देता है और अपने अमल को अच्छा बनाता है, तो उसे कोई डर नहीं होता, कोई चिंता नहीं सताती, क्योंकि उसकी पकड़ वो रस्सी है जो कभी टूटती नहीं। यही वो रास्ता है जो इंसान को जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह ने अपने बंदों पर बड़ा एहसान किया है कि उन्हें यह आसान रास्ता दिखाया – बस अपने चेहरे को अल्लाह की ओर कर लो, अपनी नीयत साफ़ कर लो, और अपने अमल को अच्छा बना लो। यह कोई मुश्किल काम नहीं, बल्कि दिल की सच्चाई और अमल की पाबंदी है। जो ऐसा करेगा, वह दुनिया में भी इत्मिनान पाएगा और आख़िरत में भी कामयाब होगा। अल्लाह से दुआ है कि वह हम सबको इस मज़बूत रस्सी को पकड़ने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 20-24 — लुकमान

20أَلَمْ تَرَوْا أَنَّ اللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَأَسْبَغَ عَلَيْكُمْ نِعَمَهُ ظَاهِرَةً وَبَاطِنَةً ۗ وَمِنَ النَّاسِ مَن يُجَادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَلَا هُدًى وَلَا كِتَابٍ مُّنِيرٍ
क्या तुम लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही ने यक़ीनी तुम्हारा ताबेए कर दिया है और तुम पर अपनी ज़ाहिरी और बातिनी नेअमतें पूरी कर दीं और बाज़ लोग (नुसर बिन हारिस वगैरह) ऐसे भी हैं जो (ख्वाह मा ख्वाह) ख़ुदा के बारे में झगड़ते हैं (हालॉकि उनके पास) न इल्म है और न हिदायत है और न कोई रौशन किताब है
21وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اتَّبِعُوا مَا أَنزَلَ اللَّهُ قَالُوا بَلْ نَتَّبِعُ مَا وَجَدْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا ۚ أَوَلَوْ كَانَ الشَّيْطَانُ يَدْعُوهُمْ إِلَىٰ عَذَابِ السَّعِيرِ
और जब उनसे कहा जाता है कि जो (किताब) ख़ुदा ने नाज़िल की है उसकी पैरवी करो तो (छूटते ही) कहते हैं कि नहीं हम तो उसी (तरीक़े से चलेंगे) जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया भला अगरचे शैतान उनके बाप दादाओं को जहन्नुम के अज़ाब की तरफ बुलाता रहा हो (तो भी उन्ही की पैरवी करेंगे)
22۞ وَمَن يُسْلِمْ وَجْهَهُ إِلَى اللَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ فَقَدِ اسْتَمْسَكَ بِالْعُرْوَةِ الْوُثْقَىٰ ۗ وَإِلَى اللَّهِ عَاقِبَةُ الْأُمُورِ
और जो शख्स ख़ुदा के आगे अपना सर (तस्लीम) ख़म करे और वह नेकोकार (भी) हो तो बेशक उसने (ईमान की) मज़बूत रस्सी पकड़ ली और (आख़िर तो) सब कामों का अन्जाम ख़ुदा ही की तरफ है
23وَمَن كَفَرَ فَلَا يَحْزُنكَ كُفْرُهُ ۚ إِلَيْنَا مَرْجِعُهُمْ فَنُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
और (ऐ रसूल) जो काफिर बन बैठे तो तुम उसके कुफ्र से कुढ़ों नही उन सबको तो हमारी तरफ लौट कर आना है तो जो कुछ उन लोगों ने किया है (उसका नतीजा) हम बता देगें बेशक ख़ुदा दिलों के राज़ से (भी) खूब वाक़िफ है
24نُمَتِّعُهُمْ قَلِيلًا ثُمَّ نَضْطَرُّهُمْ إِلَىٰ عَذَابٍ غَلِيظٍ
हम उन्हें चन्द रोज़ों तक चैन करने देगें फिर उन्हें मजबूर करके सख्त अज़ाब की तरफ खीच लाएँगें
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अनुवाद — लुकमान 22

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Tuesday, August 18, 2026

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