Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُسْلِمْ وَجْهَهُ – अपने चेहरे को (अर्थात अपने आप को) पूर्ण रूप से समर्पित कर दे।
- مُحْسِنٌ – नेकी करने वाला, अपने अमल को अच्छी तरह से करने वाला।
- الْعُرْوَةِ الْوُثْقَى – मज़बूत रस्सी (या पकड़), जो कभी टूटती नहीं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि जो व्यक्ति अपने चेहरे को अल्लाह की ओर कर लेता है, यानी अपनी पूरी ज़िंदगी, अपनी इबादत, अपनी नीयत और अपने इरादे को सिर्फ़ अल्लाह के लिए समर्पित कर देता है, और वह मुहसिन भी हो – यानी अपने अमल को अच्छी तरह से, ख़ालिस नीयत के साथ और सुन्नत के अनुसार करता है – तो उसने "उर्वतुल-वुस्क़ा" यानी वो मज़बूत रस्सी पकड़ ली है जो कभी नहीं टूटती। यह रस्सी "ला इलाहा इल्लल्लाह" (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं) का कलमा है, जो ईमान की सबसे मज़बूत कड़ी है। जिसने इस रस्सी को पकड़ लिया, वह गुमराही से बच गया, हिदायत पर क़ायम रहा, और उसका भरोसा उस ज़ात पर टिक गया जो कभी ज़वाल नहीं होती।
फिर अल्लाह फ़रमाते हैं: "और अल्लाह ही की ओर सभी मामलों का अंजाम है।" यानी दुनिया के सारे काम, चाहे वो अच्छे हों या बुरे, आख़िरकार अल्लाह ही की ओर लौटने वाले हैं। क़यामत के दिन सब कुछ उसी के सामने पेश होगा, और हर इंसान को उसके अमल का पूरा-पूरा बदला मिलेगा – नेकी करने वाले को उसकी नेकी का अज्र, और बुराई करने वाले को उसकी सज़ा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बताती है कि सच्ची कामयाबी और सुकून का रास्ता सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ रुजू करने में है। जब इंसान अपने आप को पूरी तरह अल्लाह के हवाले कर देता है और अपने अमल को अच्छा बनाता है, तो उसे कोई डर नहीं होता, कोई चिंता नहीं सताती, क्योंकि उसकी पकड़ वो रस्सी है जो कभी टूटती नहीं। यही वो रास्ता है जो इंसान को जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह ने अपने बंदों पर बड़ा एहसान किया है कि उन्हें यह आसान रास्ता दिखाया – बस अपने चेहरे को अल्लाह की ओर कर लो, अपनी नीयत साफ़ कर लो, और अपने अमल को अच्छा बना लो। यह कोई मुश्किल काम नहीं, बल्कि दिल की सच्चाई और अमल की पाबंदी है। जो ऐसा करेगा, वह दुनिया में भी इत्मिनान पाएगा और आख़िरत में भी कामयाब होगा। अल्लाह से दुआ है कि वह हम सबको इस मज़बूत रस्सी को पकड़ने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 20-24 — सूरा लुकमान
अनुवाद — लुकमान 22
सूरा लुकमान आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो शख्स ख़ुदा के आगे अपना सर (तस्लीम) ख़म…सूरा आयत 22/34 — सूरा लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा लुकमान सुनें, सूरा लुकमान अनुवाद, सूरा लुकमान mp3, सूरा लुकमान pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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