अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يُولِجُ: दाखिल करता है, प्रवेश कराता है।
- وَسَخَّرَ: वश में किया, अधीन किया।
- تَجْرِي: चलते हैं, गतिशील हैं।
- أَجَلٍ مُسَمًّى: एक निश्चित समय तक, मुक़र्रर वक़्त तक।
- خَبِيرٌ: पूरी तरह जानने वाला, बाख़बर।
तफ़सीर:
क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ही है जो रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखिल करता है? यानी वह रात के घंटों में से कम करके दिन को लंबा करता है, और दिन के घंटों में से कम करके रात को लंबा करता है। यह बदलता नज़ारा, यह मौसमों का तबादला, यह दिन-रात का आना-जाना — सब कुछ उसी की ताक़त और हिकमत से हो रहा है। वही है जिसने सूरज और चाँद को तुम्हारे लिए वश में कर रखा है। ये दोनों अपने-अपने मुक़र्रर मदार पर एक निश्चित समय तक चलते रहते हैं। न सूरज अपनी मंज़िल से भटकता है, न चाँद अपने रास्ते से हटता है। यह सब कुछ अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है, उसकी हिकमत का सबूत है, और उसकी रहमत का इज़हार है।
और फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह उन सब कामों से पूरी तरह बाख़बर है जो तुम करते हो। उससे तुम्हारा कोई अच्छा या बुरा काम छिपा नहीं है। चाहे वह दिन की रोशनी में हो या रात के अंधेरे में, चाहे लोगों के सामने हो या तन्हाई में — अल्लाह सब कुछ जानता है। वह तुम्हारे इरादों को भी जानता है और तुम्हारे अमल को भी। और यही उसका इल्म उसके इंसाफ़ की बुनियाद है — वह हर एक को उसके किए का बदला देगा।
यह आयत हमें ग़ौर करने की दावत देती है कि जिस ज़ात ने इस कायनात के निज़ाम को इतनी खूबसूरती से चलाया है, क्या वह हमारे छोटे-बड़े हर अमल से बेख़बर हो सकती है? हरगिज़ नहीं। यही अक़ीदा इंसान को अमल की तरफ़ राग़िब करता है, उसे अल्लाह से डरने और उम्मीद रखने की तालीम देता है। जब हम जानते हैं कि अल्लाह हमारे हर अमल को देख रहा है, तो हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी को उसकी पसंद के मुताबिक बनाएँ — नेकी अपनाएँ, बुराई से बचें, और उसकी रहमत के उम्मीदवार बनें। यही सच्ची कामयाबी है, और यही उस ख़ुदा की मोहब्बत का हक़ है जिसने हमारे लिए सूरज और चाँद को रोशनी और हिदायत का ज़रिया बनाया।
📜 आयत 27-31 — लुकमान
अनुवाद — लुकमान 29
सूरा लुकमान आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या तूने ये भी ख्याल न किया कि ख़ुदा ही…सूरा आयत 29/34 — लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: लुकमान सुनें, लुकमान अनुवाद, लुकमान mp3, लुकमान pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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