लुकमान · 29/34
अनुवाद उच्चारण — लुकमान
أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ كُلٌّ يَجْرِي إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى وَأَنَّ اللَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ ۝٢٩
Alam tara annal laaha yoolijul laila fin nahaari wa yoolijun nahaara fil laili wa sakhkharash shamsa wal qamara kulluny yajreee ilaaa ajalim musammanw wa annal laaha bimaa ta`malona Khabeer
📖 हिंदी अर्थ
क्या तूने ये भी ख्याल न किया कि ख़ुदा ही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल कर देता है (तो रात बढ़ जाती है) और दिन को (बढ़ा के) रात में दाख़िल कर देता है (तो दिन बढ़ जाता है) उसी ने आफताब व माहताब को (गोया) तुम्हारा ताबेए बना दिया है कि एक मुक़र्रर मीयाद तक (यूँ ही) चलता रहेगा और (क्या तूने ये भी ख्याल न किया कि) जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़ूब वाकिफकार है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُولِجُ: दाखिल करता है, प्रवेश कराता है।
  • وَسَخَّرَ: वश में किया, अधीन किया।
  • تَجْرِي: चलते हैं, गतिशील हैं।
  • أَجَلٍ مُسَمًّى: एक निश्चित समय तक, मुक़र्रर वक़्त तक।
  • خَبِيرٌ: पूरी तरह जानने वाला, बाख़बर।

तफ़सीर:

क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ही है जो रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में दाखिल करता है? यानी वह रात के घंटों में से कम करके दिन को लंबा करता है, और दिन के घंटों में से कम करके रात को लंबा करता है। यह बदलता नज़ारा, यह मौसमों का तबादला, यह दिन-रात का आना-जाना — सब कुछ उसी की ताक़त और हिकमत से हो रहा है। वही है जिसने सूरज और चाँद को तुम्हारे लिए वश में कर रखा है। ये दोनों अपने-अपने मुक़र्रर मदार पर एक निश्चित समय तक चलते रहते हैं। न सूरज अपनी मंज़िल से भटकता है, न चाँद अपने रास्ते से हटता है। यह सब कुछ अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है, उसकी हिकमत का सबूत है, और उसकी रहमत का इज़हार है।

और फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह उन सब कामों से पूरी तरह बाख़बर है जो तुम करते हो। उससे तुम्हारा कोई अच्छा या बुरा काम छिपा नहीं है। चाहे वह दिन की रोशनी में हो या रात के अंधेरे में, चाहे लोगों के सामने हो या तन्हाई में — अल्लाह सब कुछ जानता है। वह तुम्हारे इरादों को भी जानता है और तुम्हारे अमल को भी। और यही उसका इल्म उसके इंसाफ़ की बुनियाद है — वह हर एक को उसके किए का बदला देगा।

यह आयत हमें ग़ौर करने की दावत देती है कि जिस ज़ात ने इस कायनात के निज़ाम को इतनी खूबसूरती से चलाया है, क्या वह हमारे छोटे-बड़े हर अमल से बेख़बर हो सकती है? हरगिज़ नहीं। यही अक़ीदा इंसान को अमल की तरफ़ राग़िब करता है, उसे अल्लाह से डरने और उम्मीद रखने की तालीम देता है। जब हम जानते हैं कि अल्लाह हमारे हर अमल को देख रहा है, तो हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी को उसकी पसंद के मुताबिक बनाएँ — नेकी अपनाएँ, बुराई से बचें, और उसकी रहमत के उम्मीदवार बनें। यही सच्ची कामयाबी है, और यही उस ख़ुदा की मोहब्बत का हक़ है जिसने हमारे लिए सूरज और चाँद को रोशनी और हिदायत का ज़रिया बनाया।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — लुकमान

27وَلَوْ أَنَّمَا فِي الْأَرْضِ مِن شَجَرَةٍ أَقْلَامٌ وَالْبَحْرُ يَمُدُّهُ مِن بَعْدِهِ سَبْعَةُ أَبْحُرٍ مَّا نَفِدَتْ كَلِمَاتُ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और जितने दरख्त ज़मीन में हैं सब के सब क़लम बन जाएँ और समन्दर उसकी सियाही बनें और उसके (ख़त्म होने के) बाद और सात समन्दर (सियाही हो जाएँ और ख़ुदा का इल्म और उसकी बातें लिखी जाएँ) तो भी ख़ुदा की बातें ख़त्म न होगीं बेशक ख़ुदा सब पर ग़ालिब (और) दाना (बीना) है
28مَّا خَلْقُكُمْ وَلَا بَعْثُكُمْ إِلَّا كَنَفْسٍ وَاحِدَةٍ ۗ إِنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ بَصِيرٌ
तुम सबका पैदा करना और फिर (मरने के बाद) जिला उठाना एक शख्स के (पैदा करने और जिला उठाने के) बराबर है बेशक ख़ुदा (तुम सब की) सुनता और सब कुछ देख रहा है
29أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ كُلٌّ يَجْرِي إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى وَأَنَّ اللَّهَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
क्या तूने ये भी ख्याल न किया कि ख़ुदा ही रात को (बढ़ा के) दिन में दाख़िल कर देता है (तो रात बढ़ जाती है) और दिन को (बढ़ा के) रात में दाख़िल कर देता है (तो दिन बढ़ जाता है) उसी ने आफताब व माहताब को (गोया) तुम्हारा ताबेए बना दिया है कि एक मुक़र्रर मीयाद तक (यूँ ही) चलता रहेगा और (क्या तूने ये भी ख्याल न किया कि) जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़ूब वाकिफकार है
30ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ هُوَ الْحَقُّ وَأَنَّ مَا يَدْعُونَ مِن دُونِهِ الْبَاطِلُ وَأَنَّ اللَّهَ هُوَ الْعَلِيُّ الْكَبِيرُ
ये (सब बातें) इस सबब से हैं कि ख़ुदा ही यक़ीनी बरहक़ (माबूद) है और उस के सिवा जिसको लोग पुकारते हैं यक़ीनी बिल्कुल बातिल और इसमें शक नहीं कि ख़ुदा ही आलीशान और बड़ा रुतबे वाला है
31أَلَمْ تَرَ أَنَّ الْفُلْكَ تَجْرِي فِي الْبَحْرِ بِنِعْمَتِ اللَّهِ لِيُرِيَكُم مِّنْ آيَاتِهِ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّكُلِّ صَبَّارٍ شَكُورٍ
क्या तूने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ही के फज़ल से कश्ती दरिया में बहती चलती रहती है ताकि (लकड़ी में ये क़ूवत देकर) तुम लोगों को अपनी (कुदरत की) बाज़ निशानियाँ दिखा दे बेशक उस में भी तमाम सब्र व शुक्र करने वाले (बन्दों) के लिए (कुदरत ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ दिखा दे बेशक इसमें भी तमाम सब्र व शुक्र करने वाले (बन्दों) के लिए (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
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Tuesday, August 18, 2026

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