अस-सजदा · 24/30
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-सजदा
وَجَعَلْنَا مِنْهُمْ أَئِمَّةً يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا لَمَّا صَبَرُوا ۖ وَكَانُوا بِآيَاتِنَا يُوقِنُونَ ۝٢٤
Wa ja`alnaa minhum a`immatany yahdoona bi amrinaa lammaa sabaroo wa kaanoo bi aayaatinaa yooqinoon
📖 हिंदी अर्थ
और उन्ही (बनी इसराईल) में से हमने कुछ लोगों को चूंकि उन्होंने (मुसीबतों पर) सब्र किया था पेशवा बनाया जो हमारे हुक्म से (लोगो की) हिदायत करते थे और (इसके अलावा) हमारी आयतो का दिल से यक़ीन रखते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अइम्मा (أَئِمَّةً): नेता, पेशवा, जिनकी लोग अनुसरण करें।
  • यहदून (يَهْدُونَ): मार्गदर्शन करना, हिदायत देना।
  • लम्मा सबरू (لَمَّا صَبَرُوا): जब उन्होंने धैर्य और स्थिरता दिखाई।
  • यूक़िनून (يُوقِنُونَ): पक्का यक़ीन रखना, दृढ़ विश्वास।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने बनी इसराईल में से ऐसे लोगों को चुना और उन्हें इमाम (नेता) बनाया जो लोगों को सच्चे मार्ग की ओर बुलाते थे और उन्हें अल्लाह की इबादत, एकता और आज्ञाकारिता की शिक्षा देते थे। ये वे लोग थे जिन्होंने अल्लाह के आदेशों का पालन करने, उसकी मनाही से बचने और उसके रास्ते में आने वाली मुसीबतों को सहन करने में अटूट धैर्य दिखाया। उन्होंने अल्लाह की आयतों पर पूरा यक़ीन किया और अपने जीवन को उसी के अनुसार ढाला।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ओर से नेतृत्व और ऊँचा दर्जा पाने का सबसे बड़ा ज़रिया सब्र (धैर्य) और यक़ीन (दृढ़ विश्वास) है। जब कोई व्यक्ति अल्लाह की राह में सब्र करता है और उसकी आयतों पर पक्का यक़ीन रखता है, तो अल्लाह उसे दूसरों के लिए मार्गदर्शक बना देता है। यह एक ऐसा सिद्धांत है जो हर ज़माने में लागू होता है — आज भी जो लोग सब्र और यक़ीन के साथ अल्लाह के दीन पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें लोगों के लिए रोशनी का ज़रिया बना देता है।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि सच्ची इमामत (नेतृत्व) केवल दुनियावी ताक़त या धन से नहीं मिलती, बल्कि वह अल्लाह की नज़दीकी, सब्र और उसकी आयतों पर दृढ़ विश्वास से मिलती है। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम अपने जीवन में सब्र को अपनाएँ, अल्लाह की निशानियों पर गहराई से विचार करें और उस पर पूरा भरोसा रखें, ताकि हम भी अल्लाह के नेक बंदों में शामिल हो सकें और दूसरों के लिए हिदायत का ज़रिया बन सकें।



📜 आयत 22-26 — सूरा अस-सजदा

22وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِآيَاتِ رَبِّهِ ثُمَّ أَعْرَضَ عَنْهَا ۚ إِنَّا مِنَ الْمُجْرِمِينَ مُنتَقِمُونَ
और जिस शख़्श को उसके परवरदिगार की आयतें याद दिलायी जाएँ और वह उनसे मुँह फेर उससे बढ़कर और ज़ालिम कौन होगा हम गुनाहगारों से इन्तक़ाम लेगें और ज़रुर लेंगे
23وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَلَا تَكُن فِي مِرْيَةٍ مِّن لِّقَائِهِ ۖ وَجَعَلْنَاهُ هُدًى لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ
और (ऐ रसूल) हमने तो मूसा को भी (आसमानी किताब) तौरेत अता की थी तुम भी इस किताब (कुरान) के (अल्लाह की तरफ से) मिलने में शक में न पड़े रहो और हमने इस (तौरेत) तो तुम को भी बनी इसराईल के लिए रहनुमा क़रार दिया था
24وَجَعَلْنَا مِنْهُمْ أَئِمَّةً يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا لَمَّا صَبَرُوا ۖ وَكَانُوا بِآيَاتِنَا يُوقِنُونَ
और उन्ही (बनी इसराईल) में से हमने कुछ लोगों को चूंकि उन्होंने (मुसीबतों पर) सब्र किया था पेशवा बनाया जो हमारे हुक्म से (लोगो की) हिदायत करते थे और (इसके अलावा) हमारी आयतो का दिल से यक़ीन रखते थे
25إِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
(ऐ रसूल) हसमें शक़ नहीं कि जिन बातों में लोग (दुनिया में) बाहम झगड़ते रहते हैं क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार क़तई फैसला कर देगा
26أَوَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّنَ الْقُرُونِ يَمْشُونَ فِي مَسَاكِنِهِمْ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ ۖ أَفَلَا يَسْمَعُونَ
क्या उन लोगों को ये मालूम नहीं कि हमने उनसे पहले कितनी उम्मतों को हलाक कर डाला जिन के घरों में ये लोग चल फिर रहें हैं बेशक उसमे (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं तो क्या ये लोग सुनते नहीं हैं
अस-सजदाकुरान सूची
30आयत
मक्कीअवतरण स्थान
24आयत

अनुवाद — अस-सजदा 24

सूरा अस-सजदा आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन्ही (बनी इसराईल) में से हमने कुछ लोगों को…

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Friday, October 2, 2026

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