अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अइम्मा (أَئِمَّةً): नेता, पेशवा, जिनकी लोग अनुसरण करें।
- यहदून (يَهْدُونَ): मार्गदर्शन करना, हिदायत देना।
- लम्मा सबरू (لَمَّا صَبَرُوا): जब उन्होंने धैर्य और स्थिरता दिखाई।
- यूक़िनून (يُوقِنُونَ): पक्का यक़ीन रखना, दृढ़ विश्वास।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने बनी इसराईल में से ऐसे लोगों को चुना और उन्हें इमाम (नेता) बनाया जो लोगों को सच्चे मार्ग की ओर बुलाते थे और उन्हें अल्लाह की इबादत, एकता और आज्ञाकारिता की शिक्षा देते थे। ये वे लोग थे जिन्होंने अल्लाह के आदेशों का पालन करने, उसकी मनाही से बचने और उसके रास्ते में आने वाली मुसीबतों को सहन करने में अटूट धैर्य दिखाया। उन्होंने अल्लाह की आयतों पर पूरा यक़ीन किया और अपने जीवन को उसी के अनुसार ढाला।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ओर से नेतृत्व और ऊँचा दर्जा पाने का सबसे बड़ा ज़रिया सब्र (धैर्य) और यक़ीन (दृढ़ विश्वास) है। जब कोई व्यक्ति अल्लाह की राह में सब्र करता है और उसकी आयतों पर पक्का यक़ीन रखता है, तो अल्लाह उसे दूसरों के लिए मार्गदर्शक बना देता है। यह एक ऐसा सिद्धांत है जो हर ज़माने में लागू होता है — आज भी जो लोग सब्र और यक़ीन के साथ अल्लाह के दीन पर चलते हैं, अल्लाह उन्हें लोगों के लिए रोशनी का ज़रिया बना देता है।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि सच्ची इमामत (नेतृत्व) केवल दुनियावी ताक़त या धन से नहीं मिलती, बल्कि वह अल्लाह की नज़दीकी, सब्र और उसकी आयतों पर दृढ़ विश्वास से मिलती है। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम अपने जीवन में सब्र को अपनाएँ, अल्लाह की निशानियों पर गहराई से विचार करें और उस पर पूरा भरोसा रखें, ताकि हम भी अल्लाह के नेक बंदों में शामिल हो सकें और दूसरों के लिए हिदायत का ज़रिया बन सकें।
📜 आयत 22-26 — अस-सजदा
अनुवाद — अस-सजदा 24
सूरा अस-सजदा आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन्ही (बनी इसराईल) में से हमने कुछ लोगों को…सूरा आयत 24/30 — अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-सजदा सुनें, अस-सजदा अनुवाद, अस-सजदा mp3, अस-सजदा pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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