अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- मिर्यह (مِرْيَة): संदेह, शक।
- लिकाइही (لِقَائِهِ): उससे मुलाकात, यानी मूसा (अलैहिस्सलाम) से मुलाकात।
- हुदन (هُدًى): मार्गदर्शन, हिदायत।
तफसीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को तसल्ली देते हुए फरमाता है कि हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) को किताब (तौरात) अता की थी, ठीक उसी तरह जैसे हमने आपको कुरआन अता किया है। अल्लाह तआला फरमाता है: "और हमने मूसा को किताब दी, तो आप उसकी मुलाकात के बारे में किसी संदेह में न पड़ें।" यानी ऐ नबी! आपको शक नहीं करना चाहिए कि आपने मूसा (अलैहिस्सलाम) से मुलाकात की थी। यह मुलाकात शबे-मेराज (इसरा और मेराज की रात) में हुई थी, जब आपने आसमानों की सैर की और मूसा (अलैहिस्सलाम) से मुलाकात की। यह अल्लाह की कुदरत और उसकी ताकत से हुआ, और यह कोई असंभव बात नहीं है।
फिर अल्लाह तआला फरमाता है: "और हमने उसे (तौरात को) बनी इस्राईल के लिए हिदायत बनाया।" यानी तौरात को बनी इस्राईल के लिए मार्गदर्शन और रोशनी बनाया गया, ताकि वे गुमराही से निकलकर सीधे रास्ते पर चलें। यह किताब उन्हें सच्चाई की तरफ बुलाती थी और उन्हें अल्लाह की इबादत और उसके आदेशों का पालन करने की शिक्षा देती थी।
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को यह बताना चाहता है कि जिस तरह मूसा (अलैहिस्सलाम) को किताब दी गई और वह उम्मत के लिए रहनुमा बनी, उसी तरह आपको भी कुरआन दिया गया है जो पूरी इंसानियत के लिए हिदायत है। यह अल्लाह की रहमत और उसका एहसान है कि उसने अपने नबियों को किताबें अता कीं और उन्हें हिदायत का जरिया बनाया।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने अपने नबियों को जो किताबें दीं, वे सब इंसानों की हिदायत के लिए थीं। हमें इन किताबों पर ईमान लाना चाहिए और उन पर अमल करना चाहिए। कुरआन आखिरी किताब है और यह सबसे पूर्ण और सबसे स्पष्ट मार्गदर्शन है। जो व्यक्ति कुरआन को अपनाएगा, वह दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाब होगा। अल्लाह तआला ने अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को जो मुलाकातें और मुजिज़े अता किए, वे उनकी नबुव्वत की सच्चाई की गवाही देते हैं। हमें इन पर ईमान लाना चाहिए और इनसे सबक लेना चाहिए कि अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है। आइए हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हमें दुनिया और आखिरत में कामयाबी मिले।
📜 आयत 21-25 — अस-सजदा
अनुवाद — अस-सजदा 23
सूरा अस-सजदा आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) हमने तो मूसा को भी (आसमानी किताब)…सूरा आयत 23/30 — अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-सजदा सुनें, अस-सजदा अनुवाद, अस-सजदा mp3, अस-सजदा pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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