अस-सजदा · 23/30
अनुवाद उच्चारण — अस-सजदा
وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَلَا تَكُن فِي مِرْيَةٍ مِّن لِّقَائِهِ ۖ وَجَعَلْنَاهُ هُدًى لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ ۝٢٣
Wa laqad aayainaa Moosal Kitaaba falaa takun fee miryatim mil liqaaa`ihee wa ja`alnaahu hudal li Baneee Israaa`eel
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) हमने तो मूसा को भी (आसमानी किताब) तौरेत अता की थी तुम भी इस किताब (कुरान) के (अल्लाह की तरफ से) मिलने में शक में न पड़े रहो और हमने इस (तौरेत) तो तुम को भी बनी इसराईल के लिए रहनुमा क़रार दिया था
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मिर्यह (مِرْيَة): संदेह, शक।
  • लिकाइही (لِقَائِهِ): उससे मुलाकात, यानी मूसा (अलैहिस्सलाम) से मुलाकात।
  • हुदन (هُدًى): मार्गदर्शन, हिदायत।

तफसीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को तसल्ली देते हुए फरमाता है कि हमने मूसा (अलैहिस्सलाम) को किताब (तौरात) अता की थी, ठीक उसी तरह जैसे हमने आपको कुरआन अता किया है। अल्लाह तआला फरमाता है: "और हमने मूसा को किताब दी, तो आप उसकी मुलाकात के बारे में किसी संदेह में न पड़ें।" यानी ऐ नबी! आपको शक नहीं करना चाहिए कि आपने मूसा (अलैहिस्सलाम) से मुलाकात की थी। यह मुलाकात शबे-मेराज (इसरा और मेराज की रात) में हुई थी, जब आपने आसमानों की सैर की और मूसा (अलैहिस्सलाम) से मुलाकात की। यह अल्लाह की कुदरत और उसकी ताकत से हुआ, और यह कोई असंभव बात नहीं है।

फिर अल्लाह तआला फरमाता है: "और हमने उसे (तौरात को) बनी इस्राईल के लिए हिदायत बनाया।" यानी तौरात को बनी इस्राईल के लिए मार्गदर्शन और रोशनी बनाया गया, ताकि वे गुमराही से निकलकर सीधे रास्ते पर चलें। यह किताब उन्हें सच्चाई की तरफ बुलाती थी और उन्हें अल्लाह की इबादत और उसके आदेशों का पालन करने की शिक्षा देती थी।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को यह बताना चाहता है कि जिस तरह मूसा (अलैहिस्सलाम) को किताब दी गई और वह उम्मत के लिए रहनुमा बनी, उसी तरह आपको भी कुरआन दिया गया है जो पूरी इंसानियत के लिए हिदायत है। यह अल्लाह की रहमत और उसका एहसान है कि उसने अपने नबियों को किताबें अता कीं और उन्हें हिदायत का जरिया बनाया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने अपने नबियों को जो किताबें दीं, वे सब इंसानों की हिदायत के लिए थीं। हमें इन किताबों पर ईमान लाना चाहिए और उन पर अमल करना चाहिए। कुरआन आखिरी किताब है और यह सबसे पूर्ण और सबसे स्पष्ट मार्गदर्शन है। जो व्यक्ति कुरआन को अपनाएगा, वह दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाब होगा। अल्लाह तआला ने अपने नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को जो मुलाकातें और मुजिज़े अता किए, वे उनकी नबुव्वत की सच्चाई की गवाही देते हैं। हमें इन पर ईमान लाना चाहिए और इनसे सबक लेना चाहिए कि अल्लाह हर चीज़ पर कादिर है। आइए हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हमें दुनिया और आखिरत में कामयाबी मिले।

🎧 सुनें

📜 आयत 21-25 — अस-सजदा

21وَلَنُذِيقَنَّهُم مِّنَ الْعَذَابِ الْأَدْنَىٰ دُونَ الْعَذَابِ الْأَكْبَرِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हम यक़ीनी (क़यामत के) बड़े अज़ाब से पहले दुनिया के (मामूली) अज़ाब का मज़ा चखाएँगें जो अनक़रीब होगा ताकि ये लोग अब भी (मेरी तरफ) रुज़ू करें
22وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِآيَاتِ رَبِّهِ ثُمَّ أَعْرَضَ عَنْهَا ۚ إِنَّا مِنَ الْمُجْرِمِينَ مُنتَقِمُونَ
और जिस शख़्श को उसके परवरदिगार की आयतें याद दिलायी जाएँ और वह उनसे मुँह फेर उससे बढ़कर और ज़ालिम कौन होगा हम गुनाहगारों से इन्तक़ाम लेगें और ज़रुर लेंगे
23وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَى الْكِتَابَ فَلَا تَكُن فِي مِرْيَةٍ مِّن لِّقَائِهِ ۖ وَجَعَلْنَاهُ هُدًى لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ
और (ऐ रसूल) हमने तो मूसा को भी (आसमानी किताब) तौरेत अता की थी तुम भी इस किताब (कुरान) के (अल्लाह की तरफ से) मिलने में शक में न पड़े रहो और हमने इस (तौरेत) तो तुम को भी बनी इसराईल के लिए रहनुमा क़रार दिया था
24وَجَعَلْنَا مِنْهُمْ أَئِمَّةً يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا لَمَّا صَبَرُوا ۖ وَكَانُوا بِآيَاتِنَا يُوقِنُونَ
और उन्ही (बनी इसराईल) में से हमने कुछ लोगों को चूंकि उन्होंने (मुसीबतों पर) सब्र किया था पेशवा बनाया जो हमारे हुक्म से (लोगो की) हिदायत करते थे और (इसके अलावा) हमारी आयतो का दिल से यक़ीन रखते थे
25إِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
(ऐ रसूल) हसमें शक़ नहीं कि जिन बातों में लोग (दुनिया में) बाहम झगड़ते रहते हैं क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार क़तई फैसला कर देगा
अस-सजदाकुरान सूची
30आयत
मक्कीRevelation
23आयत

अनुवाद — अस-सजदा 23

सूरा अस-सजदा आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) हमने तो मूसा को भी (आसमानी किताब)…

सूरा आयत 23/30 — अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-सजदा सुनें, अस-सजदा अनुवाद, अस-सजदा mp3, अस-सजदा pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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